रात 3-4 बजे तक चलता था दफ्तर: विदेशी पेमेंट का हिसाब खंगालने पहुंची ईडी टीम
KHULASA FIRST
संवाददाता

इंकग्राफ पर एक साथ 3 ठिकानों पर छापा
गेमिंग-क्रेडिट कार्ड और फंड ट्रांसफर की जांच, कर्मचारियों से भी पूछताछ
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मल्हार मेगा मॉल के पीछे पीयू-4 स्थित आईटी-केपीओ कंपनी इंकग्राफ का दफ्तर शुक्रवार सुबह उस समय जांच एजेंसियों के घेरे में आ गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने कंपनी के कार्यालय और संचालक जोशी बंधुओं के घरों पर एक साथ दबिश दी।
सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई कार्रवाई देर रात तक जारी रही। कंपनी के विदेशी कारोबार, गेमिंग और क्रेडिट कार्ड से जुड़े पेमेंट, विदेशी ट्रांजेक्शन और कथित फंड ट्रांसफर को जांच का मुख्य आधार बताया जा रहा है। ईडी की टीम में 10 से अधिक अधिकारी शामिल रहे। स्थानीय टीम के साथ दिल्ली से पहुंचे अधिकारियों ने भी कार्रवाई में हिस्सा लिया।
जांच के दौरान कंपनी के संचालक अर्पित जोशी और अपूर्व जोशी के महालक्ष्मी नगर स्थित घरों की भी तलाशी ली गई। बाद में दोनों को कंपनी कार्यालय लाकर रिकॉर्ड और लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की गई।
ईडी की टीमें सुबह कार्यालय पहुंचीं तो कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों में भी हलचल मच गई। अधिकारियों ने कंपनी के कंप्यूटर सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की जांच शुरू की। शाम को कुछ कर्मचारियों को भी बुलाकर पूछताछ की गई।
जांच का फोकस यह पता लगाने पर बताया जा रहा है कि कंपनी के जरिए विदेशी ग्राहकों से आने वाली रकम का पेमेंट फ्लो क्या था, पैसा किस खाते में पहुंचता था और वहां से आगे कहां ट्रांसफर होता था।
फ्लोरिडा तक फैला कारोबार: इंकग्राफ करीब 10 वर्षों से इंदौर में काम कर रही है। कंपनी का अमेरिका के फ्लोरिडा में भी कार्यालय बताया जा रहा है। यहां विदेशी कंपनियों के लिए आउटसोर्स बैकऑफिस, कॉल सेंटर और पेमेंट गेटवे मैनेजमेंट जैसे काम किए जाने का खुलासा हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, कंपनी का काम अमेरिका और यूरोप की कुछ कंपनियों के साथ-साथ गेमिंग और क्रेडिट कार्ड से जुड़े कारोबार से भी जुड़ा रहा है। इसी वजह से विदेशी भुगतान और फंड ट्रांसफर का पूरा नेटवर्क ईडी की जांच में महत्वपूर्ण हो गया है।
अब आगे क्या होगा?: जांच का सबसे अहम हिस्सा यहीं से शुरू : ईडी की छापेमारी का मतलब यह नहीं है कि कंपनी या संचालकों पर आरोप साबित हो गए हैं। अभी जांच चल रही है। लेकिन यदि तलाशी में संदिग्ध ट्रांजेक्शन, बेनामी लाभार्थी, गलत इनवॉइस, विदेशी खातों में फंड ट्रांसफर या रकम के स्रोत को छिपाने से जुड़े दस्तावेज मिलते हैं तो मामला आगे गंभीर रूप ले सकता है।
रात की शिफ्ट और विदेशी टाइमिंग भी जांच में
कंपनी में सामान्य ऑफिस टाइम के बजाय अलग-अलग शिफ्ट में काम होता था। कर्मचारी शाम 4 से 6 बजे के बीच आते थे और कई बार काम तड़के 3-4 बजे तक चलता था। विदेशी कंपनियों के टाइम जोन के हिसाब से काम करने के कारण रात में कार्यालय संचालित करने की अनुमति स्थानीय पुलिस से ली गई थी।
अब ईडी यह भी देख रही है कि रात की शिफ्ट में होने वाले काम का स्वरूप क्या था और विदेशी ग्राहकों के साथ किए जा रहे वित्तीय लेन-देन की वास्तविक प्रकृति क्या थी।
डिजिटल रिकॉर्ड से होगा खुलासा
इस जांच में सबसे अहम भूमिका कंपनी के कंप्यूटर, ई-मेल, सर्वर, बैंक स्टेटमेंट, पेमेंट गेटवे रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की हो सकती है। यदि ईडी को डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग ट्रेल में कोई कड़ी मिलती है तो आगे पूछताछ का दायरा संचालकों से बढ़कर अन्य कंपनियों और संबंधित लोगों तक भी जा सकता है।
जरूरत पड़ने पर ईडी आगे बैंक खातों और संपत्तियों की जांच, संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए बुलाने और संदिग्ध रकम की पहचान होने पर उसे फ्रीज करने जैसी कार्रवाई भी कर सकती है।
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