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2 हजार रुपए के डिवाइस से 9 चोर पकड़े: सांची पार्लर संचालक ने बनाया अलर्ट सिस्टम; दुकान में संदिग्ध हलचल होते ही मोबाइल पर आता है अलर्ट

Khulasa First

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संवाददाता

21 अगस्त 2026, 5:15 pm
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2 हजार रुपए के डिवाइस से 9 चोर पकड़े

खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
चोरी की लगातार घटनाओं से परेशान एक सांची पार्लर संचालक ने ऐसा अलर्ट सिस्टम तैयार किया, जो दुकान में संदिग्ध गतिविधि होते ही मोबाइल पर सूचना भेज देता है।

खास बात यह है कि करीब 2 हजार रुपए की लागत से तैयार किए गए इस टावर बेस्ड डिवाइस की मदद से अब तक 9 बार चोरों को पकड़ने में पुलिस की मदद की जा चुकी है।

देवास रोड स्थित सांची पार्लर संचालक विशाल सिंह जादौन ने यह सिस्टम वर्ष 2012 में तैयार किया था। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य केवल अपनी दुकान को सुरक्षित रखना नहीं था, बल्कि ऐसी तकनीक तैयार करना था, जिसका इस्तेमाल बड़े स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था में किया जा सके। हालांकि आर्थिक और तकनीकी सहयोग नहीं मिलने के कारण उन्होंने 2017 के बाद अपने रिसर्च प्रोजेक्ट बंद कर दिए।

चूहे को पकड़ने से आया डिवाइस बनाने का आइडिया
ऋषि नगर निवासी विशाल जादौन ने 14 दिसंबर 2003 को सांची पार्लर शुरू किया था। आसपास झाड़ियां होने और दुकान का स्ट्रक्चर कमजोर होने के कारण वहां आए दिन चोरी की घटनाएं होती थीं।

एक दिन उन्होंने दुकान में चूहे को पकड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाली व्यवस्था देखी। यहीं से उनके मन में विचार आया कि जब तकनीक की मदद से चूहे की गतिविधि का पता लगाया जा सकता है, तो ऐसी व्यवस्था क्यों न बनाई जाए, जिससे दुकान में किसी व्यक्ति के प्रवेश करते ही सूचना मिल जाए। इसके बाद उन्होंने करीब 6 से 8 महीने तक प्रयोग किए और वर्ष 2012 में टावर बेस्ड अलर्ट सिस्टम तैयार किया।

दुकान में हलचल होते ही मोबाइल पर आता है अलर्ट
विशाल के मुताबिक, उनके बनाए सिस्टम में दुकान के अलग-अलग हिस्सों को एक्टिवेट किया जा सकता है। किसी सक्रिय हिस्से में संदिग्ध गतिविधि होने पर सिस्टम मोबाइल पर अलर्ट मैसेज भेजता है। इसके साथ GSM तकनीक के जरिए कॉल भी आती है।

अलर्ट मिलने के बाद विशाल संबंधित थाना और पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देते हैं। हाल ही में रात करीब 1:15 बजे सिस्टम सक्रिय हुआ। विशाल ने पुलिस को जानकारी दी और टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

पुलिसकर्मियों ने दुकान के अंदर मौजूद एक आरोपी को पकड़ लिया। विशाल का दावा है कि इस सिस्टम की मदद से अब तक 9 मामलों में चोरों को पकड़ने में पुलिस की मदद मिल चुकी है।

पहले खुद चोरों का पीछा करते थे, हमले के बाद बदला तरीका
विशाल बताते हैं कि शुरुआत में वे खुद चोरी करने वालों का पीछा करते थे और उन्हें पकड़ने की कोशिश करते थे। एक घटना में कथित तौर पर कंजर गिरोह के एक सदस्य ने उनकी उंगली काट दी थी।

इसके बाद उन्होंने अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस की मदद लेना शुरू किया। उनका कहना है कि कई बार सूचना मिलने के बाद पुलिस और कंट्रोल रूम ने तेजी से कार्रवाई की। विशाल ने पुलिस प्रशासन के सहयोग की भी सराहना की।

स्वच्छ भारत और बाढ़ के लिए भी बनाए डिवाइस
विशाल का प्रयोग केवल चोरी रोकने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान और बाढ़ की समस्या से जुड़े दो अन्य डिवाइस भी तैयार किए।

स्वच्छ भारत अभियान से संबंधित उनका एक डिवाइस नगर निगम प्रशासन तक भी पहुंचा था। हालांकि बाद में उस तकनीक का किस तरह उपयोग किया गया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं मिली।

पॉलिटेक्निक की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए
विशाल ने इलेक्ट्रिकल से पॉलिटेक्निक की पढ़ाई शुरू की थी। वे जावरा के 1997 बैच के विद्यार्थी रहे और चार सेमेस्टर तक पढ़ाई की, लेकिन फाइनल ईयर पूरा नहीं कर सके।

उनका कहना है कि नौकरी के अवसर मिलने के बावजूद उज्जैन में रहना जरूरी था। इसके चलते उन्होंने सांची पार्लर के जरिए अपना रोजगार शुरू किया और इसी के साथ तकनीकी प्रयोग भी जारी रखे।

सीमा सुरक्षा के लिए सरकारी संस्थानों में दिए डेमो
वर्ष 2013 से 2017 के बीच विशाल ने अपने डिवाइस को सीमा सुरक्षा में इस्तेमाल किए जाने की संभावना को लेकर कई सरकारी संस्थानों में डेमो दिए। इसके लिए वे दिल्ली और भोपाल भी गए।

उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, विज्ञान मंत्रालय, गृह मंत्रालय, पुलिस मॉडर्नाइजेशन विभाग और BSF से जुड़े अधिकारियों के सामने अपनी तकनीक का प्रदर्शन किया।

उनका विचार था कि दुकान में घुसने वाले व्यक्ति की गतिविधि का अलर्ट देने वाली तकनीक का इस्तेमाल सीमा क्षेत्र, चेकपोस्ट या निगरानी वाले स्थानों पर किया जा सकता है।

विशाल के अनुसार, अधिकारियों ने तकनीक की सराहना करते हुए इसमें और सुधार की सलाह दी। साथ ही उन्हें बताया गया कि देश की सीमा की भौगोलिक परिस्थितियां बेहद विविध हैं। पहाड़, बर्फ, दलदल और समुद्री क्षेत्र जैसे इलाकों में एक ही टावर बेस्ड सिस्टम को सीधे लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

प्रशंसा मिली, लेकिन मदद नहीं मिली तो बंद कर दी रिसर्च
विशाल का कहना है कि वर्ष 2013 से 2017 तक उन्होंने सरकारी कार्यालयों के कई चक्कर लगाए। अधिकारियों से प्रोत्साहन और सुझाव मिले, लेकिन आर्थिक या तकनीकी सहयोग नहीं मिल सका।

आर्थिक स्थिति सीमित होने के कारण बार-बार दुकान बंद कर रिसर्च के सिलसिले में दूसरे शहरों में जाना भी मुश्किल होता गया। आखिरकार वर्ष 2017 के बाद उन्होंने अपने सभी रिसर्च प्रोजेक्ट बंद कर दिए और बनाए गए उपकरणों को डिब्बों में रख दिया।

‘सरकार मदद करे तो बड़े काम आ सकती है तकनीक’
विशाल का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ कमाना नहीं था। उन्होंने अपनी जरूरत से शुरू किए गए प्रयोग को बड़े स्तर पर सुरक्षा और जनहित में इस्तेमाल करने की कोशिश की।

उनका मानना है कि यदि सरकार की ओर से आर्थिक और तकनीकी सहयोग मिले तो एक छोटी सी गुमटी से शुरू हुई यह सोच आगे विकसित होकर सुरक्षा व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक उपयोग के काम आ सकती है।

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