पेड़ों पर फिर हाईकोर्ट की ढाल: NGT की अनुमति पेश नहीं कर सका मेट्रो; सैकड़ों पेड़ों की कटाई पर रोक बरकरार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
रीगल तिराहे स्थित रानी सराय के सैकड़ों पेड़ों पर फिलहाल कटाई की तलवार टल गई है। पेड़ों की कटाई के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पहले से लगी रोक को बरकरार रखा है।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान इंदौर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से मिली कथित अनुमति का दस्तावेज कोर्ट में पेश करना था, लेकिन वह इसे प्रस्तुत नहीं कर सका।
मेट्रो की ओर से दस्तावेज पेश करने के लिए समय मांगा गया। कोर्ट ने NGT की अनुमति सहित जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी।
NGT की अनुमति का दावा, लेकिन दस्तावेज नहीं आया सामने
पिछली सुनवाई में मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि रानी सराय क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के लिए NGT से अनुमति मिल चुकी है।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान इसी अनुमति को रिकॉर्ड पर पेश किया जाना था। हालांकि, मेट्रो की ओर से अनुमति का दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका।
इसके बाद कोर्ट ने फिलहाल पेड़ों की कटाई पर लगी रोक को जारी रखते हुए मेट्रो को चार सप्ताह का समय दिया। अब अगली सुनवाई में मेट्रो को NGT की अनुमति के साथ अपना विस्तृत जवाब कोर्ट के सामने रखना होगा।
पेड़ों को बताया- पक्षियों का बड़ा आशियाना
रानी सराय के पेड़ों को बचाने के लिए दायर जनहित याचिका में पुराने और घने पेड़ों के पर्यावरणीय महत्व को प्रमुखता से उठाया गया है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन पेड़ों पर बड़ी संख्या में पक्षियों का बसेरा है और पेड़ों की कटाई होने पर उनके प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचेगा।
याचिका में पेड़ों की कटाई से पर्यावरण पर पड़ने वाले असर के साथ-साथ पक्षियों के आश्रय के खत्म होने का मुद्दा भी उठाया गया है।
दो जनहित याचिकाओं में उठे पर्यावरण के सवाल
रानी सराय और शहर में पेड़ों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं।
प्रियांशु जैन ने अधिवक्ता लवेश सारस्वत के माध्यम से रानी सराय के पेड़ों को बचाने की मांग की है। याचिका में पेड़ों की कटाई से पर्यावरण और पक्षियों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का मुद्दा उठाया गया है।
वहीं डॉ. अमन शर्मा ने अधिवक्ता अभिनव धनोतकर के माध्यम से मध्यप्रदेश वृक्षों का परिरक्षण (नगरीय क्षेत्र) अधिनियम को चुनौती देते हुए अलग जनहित याचिका दायर की है।
मेट्रो ने कहा- यहां अंडरग्राउंड स्टेशन प्रस्तावित
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता लवेश सारस्वत के मुताबिक, सुनवाई के दौरान मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की ओर से यह भी कहा गया कि रानी सराय क्षेत्र में मेट्रो का अंडरग्राउंड स्टेशन प्रस्तावित है। ऐसे में यहां मौजूद पेड़ों को काटने की आवश्यकता नहीं होगी।
इस दलील के बावजूद NGT की अनुमति से संबंधित दस्तावेज फिलहाल कोर्ट के सामने पेश नहीं हो सका। अब अगली सुनवाई में यह दस्तावेज और मेट्रो का विस्तृत जवाब महत्वपूर्ण होगा।
2024 में भी पेड़ों की कटाई पर रोक लगा चुका है हाईकोर्ट
शहर में पेड़ों की कटाई से जुड़े मामलों में हाईकोर्ट पहले भी हस्तक्षेप कर चुका है। वर्ष 2024 में एमओजी लाइंस और मल्हाराश्रम क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर कोर्ट ने रोक लगाई थी।
अब रानी सराय के पेड़ों को लेकर जारी रोक को भी पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
19 सितंबर को तय होगी अगली दिशा
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के चलते रानी सराय के सैकड़ों पेड़ों की कटाई नहीं हो सकेगी। 19 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में मेट्रो द्वारा NGT की अनुमति और अपना जवाब पेश किया जाना है।
इसके बाद कोर्ट यह तय करेगा कि पेड़ों की कटाई को लेकर आगे क्या व्यवस्था रहेगी। तब तक रानी सराय के पुराने पेड़ और उनमें बसे पक्षियों का आशियाना सुरक्षित रहेगा।
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