पांच दिवसीय विचार मंथन का श्रीगणेश, नवाचार आधारित: खेती और टिकाऊ कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता
KHULASA FIRST
संवाददाता

ब्रिक्स देशों का सम्मेलन
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
ब्रिक्स देशों के सामने अब केवल उत्पादन बढ़ाने की चुनौती नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन, जलसंकट, उर्वरक आपूर्ति, खाद्य गुणवत्ता पोषण और कीमतों में उतार-चढ़ाव और टिकाऊ कृषि को लेकर साझा रणनीति बनाने की जरूरत है।
भारत अपनी अध्यक्षता में कृषि व्यापार और खाद्य सुरक्षा को नया आयाम देने की कोशिश कर रहा है। इसी के तहत कल यहां ब्रिक्स देश ने पांच दिवसीय विचार मंथन का श्री गणेश किया।
इस आयोजन का केंद्र बिंदु खाद्य सुरक्षा, स्मार्ट फार्मिंग, वैश्विक कृषि व्यापार और किसान कल्याण है। भारत इसे ग्लोबल साउथ के कृषि सहयोग को मजबूत करने के के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। ब्रिक्स देशों और साझेदार राष्ट्रों के पास दुनिया की बड़ी आबादी के पास खेती किसानी और खाद्य उत्पादन की बड़ी क्षमता है।
इंदौर की बैठक के निष्कर्ष इस कारण से वैश्विक कृषि नीति को प्रभावित कर सकते हैं। इंदौर में शुरू हुई पांच दिवसीय बैठक के पहले दिन खाद्य सुरक्षा, जलवायु-सहिष्णु कृषि, स्मार्ट फार्मिंग और किसान कल्याण जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।
21 देशों के प्रतिनिधि सम्मेलन में भाग ले रहे हैं और इसे वैश्विक कृषि सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है। बैठक में कृषि क्षेत्र पर बढ़ते जलवायु संकट, खाद्य आपूर्ति की चुनौतियों, डिजिटल तकनीक के उपयोग और कृषि व्यापार को अधिक समावेशी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
भारत ने ब्रिक्स मंच के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने, नवाचार आधारित खेती और टिकाऊ कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
आज दूसरे दिन कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल समाधान, कृषि मूल्य शृंखला, मृदा स्वास्थ्य और छोटे किसानों की चुनौतियों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। सम्मेलन का समापन 12-13 जून को होगा।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) अजीत कुमार साहू ने पत्रकारों को बताया कि इनमें कृषि पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव और कृषि क्षेत्र के लिए वित्तपोषण जैसे मुद्दे शामिल हैं।
साहू ने कहा कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की लगभग आधी आबादी रहती है, जिससे खाद्य सुरक्षा एक साझा चिंता का महत्वपूर्ण क्षेत्र बन जाता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की लगभग आधी आबादी रहती है, इसलिए इन देशों में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और भविष्य में इसे बनाए रखना चर्चा का एक महत्वपूर्ण साझा विषय है।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित चर्चा के पहले दौर में ब्रिक्स देशों के अधिकारियों ने भाग लिया। कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा, कृषि पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव और कृषि सहयोग को मजबूत करना जैसे मुद्दे उन प्रमुख विषयों में शामिल हैं, जिन पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
बैठक में ब्रिक्स देशों के कृषि क्षेत्र में आम मुद्दों पर चर्चा की जा रही है, ताकि सहयोग को बढ़ाया जा सके और किसानों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं का संयुक्त रूप से समाधान किया जा सके।
साहू ने बताया कि कृषि, खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करती है, इसलिए कृषि विकास आवश्यक है। इस बैठक में कृषि प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान और ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के तरीकों पर भी चर्चा हो रही है।
साहू के अनुसार, कृषि कार्य समूह के चार सत्रों के तहत लगभग आठ बैठकें पहले ही आयोजित की जा चुकी हैं, जबकि इंदौर में शुरू हुआ पांचवां सत्र व्यक्तिगत रूप से आयोजित किया जा रहा है।
कृषि कार्य समूह 11 जून तक अपनी चर्चा जारी रखेगा। साहू ने बताया कि ब्रिक्स और साझेदार देशों के कृषि मंत्रियों की बैठक 12 और 13 जून को होने वाली है। इससे पहले दिन में कृषि और किसान कल्याण विभाग के सचिव आतिश चंद्र ने सम्मेलन के उद्घाटन सत्र का नेतृत्व किया।
अधिकारियों ने बताया कि पांच दिवसीय इस कार्यक्रम के दौरान खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, पोषण, जलवायु अनुकूल स्मार्ट कृषि, अंतरराष्ट्रीय कृषि व्यापार, आपूर्ति शृंखला, डिजिटल कृषि, अनुसंधान, ज्ञान साझाकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और रोबोटिक्स जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
भाग लेने वाले देशों के कृषि मंत्रियों द्वारा प्रमुख मुद्दों पर आम सहमति बनने के बाद एक संयुक्त घोषणा जारी किए जाने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय मामलों की जानकार बताते हैं कि इस सम्मेलन को खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यापार और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच बढ़ते सहयोग का महत्वपूर्ण अवसर है।
ब्रिक्स को कुछ कूटनीतिज्ञ उभरती बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का आधार मानते हैं, जबकि कुछ इसे पश्चिमी प्रभाव के विरुद्ध एक राजनीतिक मंच के रूप में देखते हैं। वास्तविकता इन दोनों दृष्टिकोणों के बीच है।
ब्रिक्स अभी भी विकसित हो रहा एक ऐसा समूह है, जो वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में अपनी भूमिका लगातार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
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