आखिर किसने कहा: 'सेकेंड क्लास' यात्री नहीं, सिर्फ कोच होता है; हादसा पीड़ित परिवार को मुआवजे का आदेश
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे यात्रियों की गरिमा और दुर्घटना मुआवजा मामलों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि 'सेकेंड क्लास पैसेंजर' जैसी अभिव्यक्ति उचित नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि 'सेकेंड क्लास' केवल रेलवे कोच की श्रेणी है, किसी यात्री की नहीं। किसी व्यक्ति की पहचान उसके टिकट या यात्रा श्रेणी से नहीं की जा सकती।
8 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के फैसले को पलटते हुए ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले यात्री के परिवार को 8 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है।
अदालत ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर राशि जारी करने के निर्देश दिए हैं। तय समय में भुगतान नहीं होने पर दावा दायर करने की तारीख से 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
टिकट नहीं मिलने से मुआवजा नहीं रोका जा सकता
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि केवल टिकट बरामद न होने के आधार पर किसी मृतक को वैध यात्री (बोना फाइड पैसेंजर) मानने से इनकार नहीं किया जा सकता। रेलवे दुर्घटना मुआवजा कानून एक कल्याणकारी कानून है, इसलिए इसकी उदार व्याख्या की जानी चाहिए।
2015 के हादसे में गई थी जान
मामला नवंबर 2015 का है। मध्य प्रदेश निवासी चंद्रकांत ठक्कर रायपुर से अहमदाबाद जा रहे थे। यात्रा के दौरान वे अहमदाबाद-हावड़ा मेल से गिर गए, जिससे उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद उनका बैग भी गायब हो गया, जिसमें टिकट होने की बात कही गई थी।
टिकट बरामद नहीं होने के कारण रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल और बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उन्हें वैध यात्री मानने से इनकार कर दिया था और मुआवजा देने से मना कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने दोनों फैसलों को पलटते हुए मृतक की पत्नी लता ठक्कर को 8 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की तीन अहम टिप्पणियां
1. हादसों की जिम्मेदारी केवल रेलवे की नहीं
अदालत ने कहा कि ट्रेन दुर्घटनाओं के लिए पूरी जिम्मेदारी सिर्फ रेलवे पर नहीं डाली जा सकती। यात्रियों को भी अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना चाहिए। चलती ट्रेन पकड़ना, दरवाजे पर लटककर सफर करना या अनावश्यक जोखिम उठाना खतरनाक है।
2. भीड़ प्रबंधन और स्टाफ बढ़ाने की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में गिरने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। रेलवे को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, भीड़ नियंत्रण के प्रभावी उपाय करने और पर्याप्त स्टाफ नियुक्त करने की जरूरत है, ताकि टिकट जांच, भीड़ प्रबंधन और आपात स्थिति में सहायता बेहतर ढंग से दी जा सके।
3. वैध यात्री का दर्जा सिर्फ टिकट से तय नहीं होता
अदालत ने कहा कि यदि टिकट उपलब्ध नहीं है, तब भी शपथपत्र, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और अन्य प्रमाणों के आधार पर यह साबित किया जा सकता है कि व्यक्ति वैध यात्री था। इसके बाद यह जिम्मेदारी रेलवे की होगी कि वह उस दावे को गलत साबित करे।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को रेलवे दुर्घटना मुआवजा मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है। इससे भविष्य में ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने का रास्ता और मजबूत होगा।
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