कौन बोले: 'चंपत राय बेदाग-निष्कलंक; उनका भोलापन मुसीबत बना, सब पर भरोसा करना उनकी गलती थी'
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, अयोध्या।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए महासचिव गोविंद देव गिरि महाराज ने जिम्मेदारी संभालने के बाद अपने पहले इंटरव्यू में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, चढ़ावा चोरी, पारदर्शिता और पूर्व महासचिव चंपत राय को लेकर खुलकर बात की।
उन्होंने चंपत राय को बेदाग और निष्कलंक बताते हुए कहा कि उनका भोलापन ही उनके लिए मुसीबत बन गया। गोविंद देव गिरि के मुताबिक, चंपत राय ने लोगों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा किया और व्यक्तियों की पहचान करने में उनसे चूक हुई।
चढ़ावा चोरी के मामले पर उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की जिम्मेदारियों को निभाने में कुछ कमियां जरूर रही हैं। अगर व्यवस्था में कोई कमी नहीं होती तो चोरी कैसे होती? उन्होंने कहा कि जहां कमियां हैं, वहां सुधार किया जाएगा और चोरी करने वालों को सजा मिलनी चाहिए।
गोविंद देव गिरि ने यह भी कहा कि चढ़ावा चोरी के पीछे उन्हें कुछ षड्यंत्र नजर आता है। उनके मुताबिक घटना हुई है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, लेकिन पूरे घटनाक्रम को किस तरह पेश किया गया, इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
'चंपत राय बेदाग हैं, लेकिन लोगों की पहचान करने में चूक हुई'
सवाल: चंपत राय को लेकर हाल में कई तरह की बातें सामने आई हैं। आप उन्हें किस तरह देखते हैं?
जवाब: चंपत राय बेदाग और निष्कलंक हैं। यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं। उनका भोलापन उनके लिए मुसीबत बन गया। उन्होंने सब पर विश्वास करके गलती की। लोगों की पहचान करने में उनसे चूक हुई।
'ट्रस्ट में कमियां थीं, तभी चोरी हुई'
सवाल: चढ़ावा चोरी के मामले को आप किस तरह देखते हैं?
जवाब: ट्रस्ट के दायित्व निभाने में कुछ कमियां रही हैं। अगर कोई कमी नहीं होती तो चोरी कैसे हो सकती थी? जहां कमी रही है, वहां सुधार किया जाएगा। चोरी करने वालों को सजा जरूर मिलनी चाहिए।
हमें इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि घटना को जिस तरह से पेश किया गया, उसमें क्या-क्या बातें थीं। मुझे इसके पीछे कुछ षड्यंत्र भी नजर आता है। लेकिन घटना हुई है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
'तीन प्राथमिकताएं- मंदिर सेवा का केंद्र बने, पारदर्शिता बढ़े, अयोध्या से संवाद मजबूत हो'
सवाल: महासचिव के तौर पर आपकी तीन प्राथमिकताएं क्या होंगी?
जवाब: मेरी पहली प्राथमिकता है कि यह मंदिर देव सेवा का केंद्र बने और देश के मंदिरों के लिए राम मंदिर आदर्श बने। मंदिर की व्यवस्था से लोग प्रेरणा लेकर जाएं।
दूसरी प्राथमिकता व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है। तीसरी प्राथमिकता अयोध्या के लोगों और मंदिर के बीच संवाद को मजबूत करना है। उनकी अपेक्षाओं और भावनाओं को समझना जरूरी है। इसके लिए बेहतर संवाद व्यवस्था तैयार की जाएगी।
'पद नहीं, रामलला की सेवा महत्वपूर्ण'
सवाल: अब तक ट्रस्ट में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, अब महासचिव हैं। इसे किस तरह देखते हैं?
जवाब: प्रभु अपने चरणों में मुझे कहीं भी रखें, मेरे लिए सब बराबर है।
कोषाध्यक्ष के रूप में भी मुझे समय देना पड़ता था, लेकिन अब महासचिव के रूप में ज्यादा समय देना पड़ेगा। मुझे अपनी व्यवस्था बदलनी होगी। प्रभु राम की सेवा के लिए जितना समय देना पड़ेगा, मैं दूंगा। मेरे लिए पद नहीं, रामलला की सेवा महत्वपूर्ण है।
'महासचिव बनने को लेकर संकोच नहीं, समय निकालने की चिंता थी'
सवाल: महासचिव की जिम्मेदारी संभालने से पहले आपके मन में कोई संकोच था?
जवाब: प्रभु राम की सेवा के लिए किसी तरह का संकोच नहीं होता। लेकिन चिंता जरूर थी। पूरे साल मेरे कार्यक्रम पहले से निर्धारित रहते हैं।
महासचिव का दायित्व बड़ा है, इसलिए अब मुझे समय निकालकर अयोध्या आना पड़ेगा। सवाल यह था कि समय कैसे निकाल पाऊंगा। लेकिन मैंने तय किया कि प्रभु राम के लिए समय निकालना ही है।
पहली बार महिला ट्रस्टी को लेकर बोले- माताओं को साथ लेकर चलना चाहिए
सवाल: ट्रस्ट में पहली बार निर्मला यादव को महिला ट्रस्टी बनाया गया है। इसके पीछे क्या सोच है?
जवाब: हमें माताओं को साथ लेकर चलना चाहिए। यही मेरी सोच है। निर्मला जी की प्रोफाइल मैंने पढ़ी है। उनके अनुभव और योग्यता के अनुसार यहां उनकी आवश्यकता है। वह संस्कृत और हिंदी से एमए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने बहुत काम किया है। उनकी योग्यता और अनुभव का लाभ ट्रस्ट को मिलेगा।
'चढ़ावे की प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी होगी'
सवाल: मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपए के चढ़ावे की निगरानी और पारदर्शिता के लिए नई व्यवस्था क्या होगी?
जवाब: कई बैंकों के लोग आकर हमें सुझाव दे चुके हैं। इस पर विचार-विमर्श के बाद व्यवस्था तय कर दी जाएगी। इसके बाद विस्तार से बताया जाएगा। हमारी कोशिश रहेगी कि चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी हो।
'CEO और महासचिव की जिम्मेदारियां अलग, लक्ष्य एक'
सवाल: ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को पहला CEO बनाया है। महासचिव और CEO की जिम्मेदारियां कैसे तय होंगी?
जवाब: CEO सिर्फ महासचिव के लिए काम करने वाली व्यवस्था नहीं होगी। हमारा न्यास जो तय करेगा, उसे कैसे लागू करना है, इसकी जिम्मेदारी CEO की होगी। इसलिए दोनों के बीच तालमेल बहुत अच्छा होना चाहिए। जिम्मेदारियां अलग हैं, लेकिन लक्ष्य एक ही है।
'नीति और निर्णय न्यास करेगा, CEO उन्हें लागू कराएगा'
सवाल: अगर महासचिव और CEO की राय किसी मुद्दे पर अलग होती है तो अंतिम फैसला कौन करेगा?
जवाब: ऐसा नहीं होगा, क्योंकि निर्णय अकेले महासचिव को नहीं लेना है। नीति और निर्णय न्यास करेगा और उसे लागू कराने की जिम्मेदारी CEO की होगी। जब पूरी प्रणाली इसी प्रकार निर्धारित है तो मतभेद का प्रश्न ही नहीं उठता।
वेबसाइट पर रोज सार्वजनिक होगी चढ़ावे की जानकारी
सवाल: क्या आने वाले समय में ट्रस्ट के फैसलों, चढ़ावे की रकम और खर्च को सार्वजनिक करने की नई व्यवस्था बनेगी?
जवाब: जरूर। हमारा प्लान है कि श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर में चढ़ने वाली रकम का ब्योरा रोज वेबसाइट पर डाला जाए। इसके लिए काम चल रहा है। धीरे-धीरे सभी व्यवस्थाओं को अपडेट किया जाएगा। हमारा उद्देश्य मंदिर की व्यवस्थाओं में अधिक से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है।
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