वीडियो देखिये, निर्माणाधीन सुरंग पर लैंडस्लाइड: अब तक इतने मजदूरों की मौत; इतने अब भी फंसे, मीथेन गैस से रेस्क्यू में बड़ी चुनौती
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, गंगटोक।
सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन सुरंग पर हुए भीषण लैंडस्लाइड हादसे में अब तक आठ मजदूरों की मौत हो गई है, जबकि 19 मजदूर अभी भी सुरंग के भीतर फंसे हुए हैं। सोमवार दोपहर हुए इस हादसे के बाद से राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन सुरंग के मुहाने पर भारी मात्रा में मलबा जमा होने और अंदर मीथेन गैस रिसाव की आशंका के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। गैस के प्रभाव से कुछ बचावकर्मी भी बेहोश हो गए, जिसके चलते अभियान की रफ्तार प्रभावित हुई है।
प्रशासन के अनुसार हादसा सोमवार दोपहर करीब 3:40 बजे नामची जिले के मामरिंग स्थित समरदुंग सुरंग में हुआ। अचानक हुए लैंडस्लाइड से सुरंग का प्रवेश द्वार पूरी तरह मलबे से बंद हो गया। उस समय अंदर बड़ी संख्या में मजदूर निर्माण कार्य में लगे हुए थे और बाहर निकलने का रास्ता बंद होने से वे सुरंग के भीतर ही फंस गए।
जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार सुरंग के अंदर 27 मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। हालांकि उन्होंने कहा कि वास्तविक संख्या इससे कम या अधिक भी हो सकती है, क्योंकि मौके पर मौजूद सभी श्रमिकों का सत्यापन अभी किया जा रहा है।
हादसे के बाद शुरू किए गए राहत अभियान में अब तक आठ मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि शेष 19 मजदूरों तक पहुंचने के प्रयास लगातार जारी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सुरंग के भीतर सुरक्षित तरीके से प्रवेश नहीं मिल जाता, तब तक फंसे लोगों की स्थिति के बारे में निश्चित जानकारी देना संभव नहीं है।
मीथेन गैस बनी सबसे बड़ी चुनौती
रेस्क्यू अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के भीतर मीथेन गैस के रिसाव की आशंका है। अधिकारियों के मुताबिक सुरंग में प्रवेश करने वाले कई बचावकर्मियों को अचानक चक्कर आने लगे, जबकि कुछ कर्मी बेहोश भी हो गए। इसके बाद अभियान को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा और सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि बंद सुरंग के भीतर मीथेन गैस का जमाव ऑक्सीजन की कमी और विस्फोट जैसी स्थिति भी पैदा कर सकता है। इसी वजह से बचाव दल गैस मास्क और विशेष सुरक्षा उपकरणों की मदद से अंदर पहुंचने की कोशिश कर रहा है।
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ समेत कई एजेंसियां जुटीं
हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया। मौके पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), जिला पुलिस, अग्निशमन विभाग और प्रशासन की टीमें तैनात की गई हैं।
भारी मशीनों की सहायता से सुरंग के प्रवेश द्वार पर जमा मलबा हटाने का काम जारी है। हालांकि लगातार गिरते पत्थरों और अस्थिर पहाड़ी क्षेत्र के कारण मशीनों का संचालन भी सावधानी से किया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल से बुलाई गई विशेष टीम
मीथेन गैस की आशंका को देखते हुए पश्चिम बंगाल से गैस-रोधी उपकरणों से लैस एक विशेष रेस्क्यू टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया है। यह टीम अत्याधुनिक गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम और विशेष सुरक्षा किट के साथ राहत अभियान में शामिल हुई है।
अधिकारियों ने बताया कि घटनास्थल पर पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस भी तैनात की गई हैं ताकि किसी भी मजदूर को बाहर निकालते ही तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। मेडिकल टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है।
दो कंपनियों के मजदूर थे सुरंग के अंदर
प्रशासन के अनुसार निर्माणाधीन सुरंग में पटेल इंजीनियरिंग के 21 और एनएचपीसी के छह कर्मचारी मौजूद थे। कुल मिलाकर 27 मजदूरों के अंदर फंसे होने की आशंका है। प्रशासन सभी श्रमिकों की उपस्थिति का रिकॉर्ड मिलान कर वास्तविक संख्या की पुष्टि कर रहा है।
हाइड्रो पावर परियोजना का हिस्सा है सुरंग
यह सुरंग तीस्ता स्टेज-6 हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के तहत बनाई जा रही है। परियोजना का निर्माण कार्य पटेल इंजीनियरिंग कंपनी द्वारा किया जा रहा था। यह परियोजना सिक्किम में जलविद्युत उत्पादन क्षमता बढ़ाने की महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल है।
पूरे इलाके में चिंता का माहौल
हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल है। मजदूरों के परिजन घटनास्थल पर पहुंच रहे हैं और प्रशासन से लगातार जानकारी ले रहे हैं। जिला प्रशासन ने कहा है कि राहत अभियान को युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है और फंसे हुए सभी मजदूरों तक जल्द से जल्द पहुंचने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
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