क्लब चुनाव से पहले नए प्रस्ताव पर बवाल: हर साल 10 नए सदस्य बनाने की तैयारी; पुराने सदस्यों में नाराजगी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के सबसे प्रतिष्ठित और वीआईपी क्लबों में शुमार 'यशवंत क्लब' के सालाना चुनाव से ठीक 24 घंटे पहले सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। वर्तमान चेयरमैन टोनी सचदेवा और सचिव संजय गोरानी की मैनेजिंग कमेटी द्वारा चुनावी एजीएम में रखे गए एक नए प्रस्ताव ने क्लब की राजनीति में भूचाल ला दिया है। कमेटी ने आगामी 10 वर्षों तक हर साल 10 नए 'परमानेंट' सदस्य बनाने का प्रस्ताव रखा है। लेकिन पेंच यह है कि ये 10 सदस्य वास्तव में 10 अलग-अलग श्रेणियों (कैटेगरी) के तहत होंगे, जिससे हर साल लगभग 100 नए सदस्य क्लब से जुड़ेंगे।
रविवार यानी 28 जून को सुबह 9:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक होने वाली वोटिंग से ठीक पहले आए इस प्रस्ताव को विपक्ष 'चुनावी दांव' और 'वोट बैंक पॉलिटिक्स' मान रहा है। मतदान के तुरंत बाद शाम 5:00 बजे से मतगणना शुरू होगी और रात 10:30 बजे तक यशवंत क्लब के नए सरताज का फैसला हो जाएगा।
बुनियादी सुविधाओं पर बढ़ेगा भारी बोझ
क्लब के वरिष्ठ और पुराने सदस्यों में इस प्रस्ताव को लेकर भारी नाराजगी है। दरअसल, वर्तमान मैनेजिंग कमेटी ने हाल ही में 100 नए सदस्य बनाए हैं। नियमतः इन्हें 25-25 की संख्या में चार साल के भीतर चरणबद्ध तरीके से बनाया जाना था, लेकिन चुनावी साल को देखते हुए इस काम को आनन-फानन में पहले ही पूरा कर लिया गया।
वरिष्ठ सदस्यों का तर्क है कि यशवंत क्लब में पहले से ही करीब 5500 सदस्य मौजूद हैं, जिससे डाइनिंग, स्पोर्ट्स और पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधाओं पर पहले से ही भारी दबाव है। जब एक नया सदस्य बनता है, तो उसका पूरा परिवार क्लब की सुविधाओं का उपयोग करता है। इस लिहाज से हाल ही में बने 100 सदस्यों के कारण क्लब पर सीधे 400 से 500 लोगों का अतिरिक्त लोड आया है। अब यदि हर साल 100 और नए सदस्य (यानी परिवारों सहित 400-500 लोग) जुड़ेंगे, तो महज कुछ ही वर्षों में क्लब का मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह खस्ताहाल हो जाएगा।
संविधान बदलने की कोशिशें भी रही थीं नाकाम
यह पहला मौका नहीं है जब वर्तमान कमेटी के फैसलों का विरोध हुआ हो। इसके पूर्व मैनेजिंग कमेटी ने क्लब के मूल संविधान में बदलाव की मंशा जताई थी। वर्तमान नियम के मुताबिक, कोई भी पदाधिकारी लगातार दो कार्यकाल (टर्म) के बाद तीसरी बार चुनाव नहीं लड़ सकता, उसे एक बार का ब्रेक लेना अनिवार्य है। सचदेवा-गोरानी पैनल इस 'टू-टर्म' कैपिंग के नियम को हटाना चाहता था ताकि पदाधिकारी असीमित समय तक पद पर बने रहें। हालांकि, क्लब के प्रबुद्ध और वरिष्ठ सदस्यों के कड़े विरोध के चलते कमेटी को कदम पीछे खींचने पड़े थे।
जैन और पम्मी पैनल आमने-सामने
इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय हो चुका है। मैदान में मुख्य रूप से जितेंद्र जैन और पम्मी छाबड़ा की मजबूत टीमें आमने-सामने हैं।
पम्मी छाबड़ा पैनल: इस पैनल से चेयरमैन पद के लिए खुद पम्मी छाबड़ा, सचिव पद के लिए अतुल सेठ, सह-सचिव के लिए पंकज कुकरेजा और कोषाध्यक्ष पद के लिए सतीश मंगलानी ताल ठोक रहे हैं। कार्यकारिणी के लिए अमृत देव, सौरभ भंडारी, बॉबी थम्मन, कुणाल कासलीवाल और शिखा वर्मा मैदान में हैं।
जितेंद्र जैन पैनल: इस पैनल से जितेंद्र जैन स्वयं चेयरमैन पद के उम्मीदवार हैं। उनके साथ सचिव पद के लिए विजय कस्तूरी, सह-सचिव के लिए तेजवीर जुनेजा और कोषाध्यक्ष पद के लिए रूपल पारिख भाग्य आजमा रहे हैं। कार्यकारिणी के लिए वैभव दुआ, गुनीत चड्ढा, राजेश तलवार, भारती बरोडिया और आशुतोष कौशिक मैदान में हैं।
निर्दलीय बिगाड़ रहे समीकरण: सचिव पद के लिए मुकाबला उस समय त्रिकोणीय हो गया जब कुलविंदर गिल ने भी निर्दलीय पर्चा भर दिया। इसके अलावा कार्यकारिणी सदस्य के लिए भी निशांत तिवारी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर दोनों पैनल्स के समीकरण बिगाड़ने की तैयारी में हैं। अब देखना यह होगा कि रविवार को क्लब के संभ्रांत मतदाता क्लब के इन्फ्रास्ट्रक्चर को बचाने के पक्ष में वोट करते हैं या नए समीकरणों को स्वीकार करते हैं।
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