भगोड़े सतीश सनपाल के मामलों की कतार 2 साल में 9 केस: अब दुबई के पैसों पर भी सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

छह थानों तक पहुंच गई एफआईआर की फाइल
सट्टेबाजी, धोखाधड़ी के आरोपों से लेकर लुकआउट सर्कुलर तक की कहानी
अब यूएई में कथित वित्तीय कार्रवाई ने बढ़ाई हलचल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एक तरफ जबलपुर के छह थानों में दर्ज नौ प्रकरणों की न्यायिक प्रक्रिया चल रही है, दूसरी तरफ दुबई में सतीश सनपाल से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन को लेकर कार्रवाई की खबरों ने पुराने मामलों को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
दो साल के भीतर दर्ज हुए मामलों में कथित सट्टेबाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों का खुलासा हुआ है। पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क की जांच के लिए एसआईटी तक बनाई।
सनपाल के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर की जानकारी भी सामने आई। अब यूएई से जुड़े वित्तीय जांच के दावों ने इस कहानी में एक नया सवाल जोड़ दिया है, जिन पैसों को लेकर भारत में शिकायतें और जांच होती रही, उनकी विदेश तक पहुंची कथित कड़ियां आखिर क्या हैं? हालांकि, इस पूरी कहानी का दूसरा पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सनपाल की ओर से आरोपों को खारिज किया जाता रहा है।
उसके वकीलों का कहना है कि कई मामलों में जमानत मिल चुकी है और किसी अदालत ने उन्हें दोषी नहीं ठहराया है। यूएई में कथित वित्तीय कार्रवाई को लेकर भी सनपाल ने किसी सक्षम प्राधिकारी का आधिकारिक आदेश मिलने से इनकार किया है और कारोबार सामान्य रूप से चलने की बात कही है। इसलिए एफआईआर, शिकायत और जांच में सामने आए आरोपों को अदालत में साबित होना अभी बाकी है।
जबलपुर से शुरू हुई फाइल, छह थानों तक पहुंची...उपलब्ध न्यायिक एवं सार्वजनिक रिकॉर्ड के मुताबिक सनपाल से जुड़े मामलों की फाइल किसी एक शिकायत या एक थाने तक सीमित नहीं रही। ओमती, मदनमहल, लार्डगंज, कोतवाली, गोरखपुर और गढ़ा थाना क्षेत्रों में दर्ज प्रकरणों का उल्लेख सामने आता है।
इन मामलों में अलग-अलग स्तर पर जुआ अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत कार्रवाई दर्ज होने की जानकारी है। ओमती थाने की एफआईआर 271/2022 में आपराधिक साजिश और जुआ अधिनियम की धारा का उल्लेख न्यायिक रिकॉर्ड में मिलता है।
मदनमहल की एफआईआर 170/2022 में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं का उल्लेख है। वहीं लार्डगंज की एफआईआर 356/2022 धोखाधड़ी से संबंधित धारा के तहत दर्ज होने का रिकॉर्ड सामने आता है।
इसके अलावा कोतवाली की एफआईआर 247/2022 तथा ओमती की एफआईआर 258/2022 और 441/2022 का भी सनपाल से जुड़े पुलिस जांच रिकॉर्ड में उल्लेख मिलता है। गोरखपुर और गढ़ा थाना क्षेत्रों के प्रकरण भी उपलब्ध रिकॉर्ड में शामिल हैं।
ऑनलाइन सट्टे की जांच के लिए बनी थी एसआईटी... वर्ष 2022 में जबलपुर पुलिस ने सनपाल से जुड़े बताए गए ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी। अलग-अलग थानों में दर्ज मामलों को एक साथ जोड़कर जांच आगे बढ़ाई गई।
इस दौरान कथित सट्टेबाजी नेटवर्क, उससे जुड़े लोगों और वित्तीय लेन-देन को लेकर पुलिस ने अलग-अलग पहलुओं पर पड़ताल की। यही वह दौर था, जब सनपाल के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या बढ़ती गई और मामला स्थानीय पुलिस कार्रवाई से निकलकर व्यापक जांच के दायरे में आने लगा।
लुकआउट सर्कुलर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तक
सनपाल के खिलाफ वर्ष 2022 से लुकआउट सर्कुलर होने की जानकारी भी सार्वजनिक रिकॉर्ड में सामने आई है। दूसरी ओर, सनपाल की ओर से अदालत में यह पक्ष रखा गया कि वह वर्ष 2020 से भारत नहीं आए हैं।
अदालती कार्यवाही के दौरान विभिन्न मामलों में उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति मिलने की जानकारी भी सामने आई। उनके वकीलों का पक्ष है कि कई मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है और अभी किसी मामले में दोषसिद्धि नहीं हुई है यानी पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज आरोप अपनी जगह हैं, लेकिन उनका अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया से ही तय होगा।
अब कहानी का सिरा दुबई तक
अगस्त 2026 में सामने आई रिपोर्टों ने इस पुराने प्रकरण को नया मोड़ दिया। रिपोर्टों में दावा किया गया कि यूएई की फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट ने संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जांच के दौरान सनपाल, उनकी पत्नी ताबिंदा और उनसे जुड़ी कुछ कंपनियों के बैंक खातों, निवेशों तथा डिजिटल वॉलेट को लेकर अस्थायी रोक जैसी कार्रवाई की।
यदि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होती है तो भारत में चल रही पुरानी कानूनी प्रक्रिया के समानांतर विदेश में वित्तीय गतिविधियों की जांच का एक अलग पहलू सामने आएगा, लेकिन यहां भी सनपाल का पक्ष अलग है।
उसकी ओर से ऐसे किसी सक्षम प्राधिकारी के आधिकारिक आदेश की जानकारी से इनकार किया गया है। उनका कहना है कि उनका कारोबार सामान्य तरीके से चल रहा है।
एक हजार करोड़ के दावे ने भी खींचा था ध्यान
जून 2026 में जबलपुर निवासी सौरभ बावरिया ने कलेक्टर और एसपी को आवेदन देकर सनपाल से जुड़े बताए गए कथित सट्टेबाजी नेटवर्क को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में दावा किया गया था कि ‘सेटस्पोर्ट’ और आईपीएल सट्टेबाजी नेटवर्क के जरिए करीब एक हजार करोड़ रुपए जुटाए गए और शैल कंपनियों के माध्यम से रकम ट्रांसफर की गई। सनपाल से जुड़े मामलों की गूंज अदालत में सिर्फ आपराधिक प्रकरणों तक सीमित नहीं रही। उनके खिलाफ प्रकाशित खबरों और
सोशल मीडिया सामग्री को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में भी मामला पहुंचा। सनपाल ने मीडिया रिपोर्टिंग को चुनौती दी थी। अदालत की अंतरिम टिप्पणियों में यह बात सामने आई कि लंबित जांच के दौरान किसी व्यक्ति को इस तरह प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए, जिससे आरोप साबित होने से पहले ही उसे दोषी मान लिया जाए।
बड़ा सवाल- रकम का रास्ता क्या था?
जबलपुर की एफआईआर से शुरू होकर एसआईटी की जांच, लुकआउट सर्कुलर, अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अब दुबई में कथित वित्तीय कार्रवाई तक पहुंची यह कहानी कई सवाल छोड़ती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन वित्तीय लेन-देन को लेकर अलग-अलग शिकायतों और जांचों में सवाल उठाए गए, उनका वास्तविक स्रोत क्या था, पैसा किन खातों से होकर गुजरा और उसकी अंतिम मंजिल कहां थी?इन सवालों के जवाब पुलिस जांच, वित्तीय रिकॉर्ड और अदालत में पेश होने वाले दस्तावेजों से ही सामने आएंगे।
सनपाल के खिलाफ जबलपुर में केसों की फाइल
न्यायिक एवं सार्वजनिक रिकॉर्ड में सतीश सनपाल से जुड़े जबलपुर के छह थाना क्षेत्रों ओमती, मदनमहल, लार्डगंज, कोतवाली, गोरखपुर और गढ़ा में कुल नौ प्रकरणों का उल्लेख मिलता है।
ओमती थाना: एफआईआर 271/2022 में आईपीसी की धारा 120-बी और जुआ अधिनियम की धारा 4-ए का उल्लेख न्यायिक रिकॉर्ड में मिलता है।
मदनमहल थाना: एफआईआर 170/2022 में आईपीसी की धारा 109, 112, 114, 120-बी और 420 तथा जुआ अधिनियम की धारा 4-ए का उल्लेख है।
लार्डगंज थाना: एफआईआर 356/2022 का उल्लेख न्यायिक रिकॉर्ड में मिलता है। इसमें आईपीसी की धारा 420 से संबंधित मामला बताया गया है।
कोतवाली थाना: एफआईआर 247/2022 का उल्लेख सनपाल से जुड़े पुलिस रिकॉर्ड में सामने आया है।
ओमती थाना: एफआईआर 258/2022 और 441/2022 का भी पुलिस जांच से जुड़ी रिपोर्टों में उल्लेख मिलता है।
गोरखपुर और गढ़ा थाना: दोनों थाना क्षेत्रों के प्रकरण भी उपलब्ध रिकॉर्ड में सनपाल से जुड़े मामलों की सूची में शामिल हैं।
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