सुप्रीम कोर्ट के आदेश से तय हुई ट्रायल की रफ्तार: छह महीने की डेडलाइन लागू होने की तारीख पर बहस
KHULASA FIRST
संवाददाता

सोनम के सरेंडर के बाद कोर्ट में अगला दांव क्या?.. नए आधार पर फिर जमानत मांग सकती है मुख्य आरोपी
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी के दोबारा जेल पहुंचने के साथ अब मामला सिर्फ सरेंडर और जमानत तक सीमित नहीं रहा। सुप्रीम कोर्ट के 23 जुलाई के आदेश के बाद मुकदमे की दिशा को लेकर दो अहम सवाल खड़े हो गए हैं।
ट्रायल पूरा करने की छह महीने की अवधि आखिर किस तारीख से गिनी जाएगी और क्या इस अवधि के दौरान सोनम फिर जमानत मांग सकती है। सोनम ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन कर बुधवार को मेघालय के शिलांग ट्रायल कोर्ट में सरेंडर किया। इसके बाद उसे फिर जेल भेज दिया गया।
कानूनी जानकारों के मुताबिक असली लड़ाई अदालत में ट्रायल की गति और उसके दौरान सामने आने वाले नए कानूनी आधारों पर होगी। लीगल एक्सपर्ट्स की मानें तो सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई के आदेश में सोनम को अंतरिम राहत देते हुए दो अहम बातें तय की थीं।
पहली, आदेश की तारीख से तीन सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करना था। दूसरी छह महीने में ट्रायल अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ता, गवाहों की नियमित सुनवाई नहीं होती या मुकदमा पूरा नहीं हो पाता, तो दोबारा जमानत मांगने की स्वतंत्रता रहेगी।
अधिवक्ताओं के मुताबिक आदेश में छह महीने की अवधि को सरेंडर की तारीख से जोड़ने का कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है। ऐसे में आदेश की भाषा के आधार पर यह अवधि 23 जुलाई 2026 से प्रभावी मानी जाने की संभावना है, न कि सरेंडर की तारीख से।
जनवरी तक आ सकता है फैसला?... यदि ट्रायल सुप्रीम कोर्ट की अपेक्षा के अनुरूप तेजी से चलता है, गवाहों के बयान और जिरह समय पर पूरी होती है तथा साक्ष्यों का परीक्षण निर्धारित अवधि में पूरा हो जाता है, तो मुकदमे में अगले साल जनवरी के आसपास फैसला आने की संभावना बन सकती है। हालांकि, यह पूरी तरह ट्रायल की वास्तविक गति और अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
छह महीने पूरे होने से पहले भी जमानत संभव...एक अहम सवाल यह भी है क्या सोनम को दोबारा जमानत के लिए छह महीने इंतजार करना पड़ेगा? एडवोकेट शर्मा के मुताबिक ऐसा जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की छह महीने वाली शर्त मुख्य रूप से ट्रायल में अनावश्यक देरी की स्थिति में जमानत मांगने की स्वतंत्रता से जुड़ी है।
इस दौरान यदि कोई नया और स्वतंत्र कानूनी आधार सामने आता है, तो उससे पहले भी जमानत याचिका दाखिल की जा सकती है। उदाहरण के तौर पर गंभीर स्वास्थ्य समस्या या नई चिकित्सकीय परिस्थिति, गवाह की जिरह में सामने आया कोई महत्वपूर्ण नया तथ्य या ऐसा अन्य वैधानिक आधार, जो आरोपी के पक्ष में अदालत के विचार का कारण बन सके।
फैसला साक्ष्यों की कड़ी पर टिका...सुनवाई आगे बढ़ने के साथ अभियोजन के सामने सबसे बड़ी चुनौती परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों की पूरी शृंखला अदालत में साबित करने की होगी।
संबंधित समाचार

अंकित शर्मा हत्याकांड:ताहिर हुसैन सहित 5 दोषियों को उम्रकैद; नाले में मिला था IB अधिकारी का शव

अवैध शराब पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई:564 लीटर की जब्त; मुखबिर की सूचना पर दी दबिश

कंठ में विष और माथे पर चंद्र:सावन के पहले सोमवार पर जगती है ‘शिव संकल्प’ की महाशक्ति

निगम टीम पर हमला:नोटिस देने पहुंचे कर्मचारियों को गमले; पत्थर, लाठी-डंडों से मारा, कई घायल

अमरनाथ यात्रा:23वें जत्थे का काफिला चंदरकोट से रवाना; कड़ी सुरक्षा के बीच पवित्र गुफा की ओर बढ़े श्रद्धालु

विधायक के खिलाफ हाई कोर्ट में दायर हुई याचिका:चुनावी हलफनामे में संपत्ति छिपाने का आरोप

छात्रों को पढ़ाए बिना कर दिया सह प्राध्यापकों का प्रमोशन:स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई में नया फर्जीवाड़ा

प्रशासन ने किया सील:संचालिका पर दर्ज होगा केस; अवैध वृद्धाश्रम में वृद्धा को पीटने का मामला

पहले निर्माण फिर गतिविधि पर थमाया नोटिस:एमआईसी मेंबर उदावत के दबाव में निगम का कारनामा

महिला से बीच सड़क मारपीट का मामला:पीड़िता बोली- आरोपी मेरा पति नहीं; काम छोड़ने की रंजिश में करता था हमला, पुलिस ने किया गिरफ्तार

टक्कर से बचा, सिस्टम ने ली जान:गंभीर घायल को निजी अस्पताल ने नहीं किया भर्ती

अतिक्रमण का अड्डा बनी गोकुलदास अस्पताल रोड:होटल श्रीमाया और सेलिब्रेशन की मनमानी से जनता परेशान

पहली बारिश में 120 करोड़ के आरओबी की सड़क उखड़ी

दतिया में 71.44% वोटिंग पिछली बार से 9% कम

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ी कार्रवाई:पहली गोली चलाने वाला STF जवान गिरफ्तार; सीएम से मुलाकात के बाद लिया एक्शन

टेलीकॉम सेक्टर में होगा 3500 करोड़ का निवेश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव:ग्वालियर में टेलीकॉम हब के लिए प्रदेश का केंद्र सरकार से समझौता

सावन माह में भक्तों का सेवा-सत्कार हुआ प्रारंभ

नगर निगम में वेतन घोटाले का खुलासा:2 कर्मचारियों पर गबन का आरोप; दूसरे खातों में भेजी सैलरी, सेवाएं की समाप्त

सईदा का बयान- साहू को नहीं किया गया ब्लैकमेल:प्रॉपर्टी कारोबारी की संदिग्ध मौत मामले में भोपाल से लाई पुलिस

अभियान समाप्त नहीं, नशा मुक्ति की शुरुआत, पुलिस कमिश्नर:वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ थमा नशे के खिलाफ कैंपेन
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!