शहर के नामी अस्पताल पर पैकेज के बावजूद अतिरिक्त बिलिंग के आरोप: परिजन बोले- हर सुविधा के नाम पर की अलग से वसूली
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के नामी केयर सीएचएल अस्पताल में कैंसर के इलाज के दौरान पैकेज और अतिरिक्त बिलिंग को लेकर परिजनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उज्जैन जिले के बड़नगर निवासी एक महिला मरीज को 2 सितंबर को इंदौर केयर सीएचएल अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इलाज शुरू होने से पहले पैकेज बताया था
परिजनों का आरोप है कि इलाज शुरू होने से पहले 1 लाख 47 हजार रुपए का पैकेज बताया गया था, जिसमें सर्जरी और सात दिन का रेस्ट शामिल होने की जानकारी दी गई थी। परिजनों के मुताबिक कैंसर की सर्जरी डॉ. रितेश टपकीरे ने की।
अलग-अलग रकम जमा कराई
इसके बाद उन्हें अलग-अलग मदों में अतिरिक्त भुगतान करने के लिए कहा गया। परिवार का कहना है कि पैकेज की रकम जमा करने के बाद भी करीब 90 हजार, 40 हजार और 47 हजार रुपए सहित अलग-अलग रकम जमा कराई गई।
पैकेज में क्या शामिल था, इसे लेकर उठे सवाल
परिजनों का दावा है कि पैकेज बताए जाने के बाद अस्पताल की ओर से उन्हें बताया गया कि इसमें डॉक्टर की फीस शामिल नहीं है। इसके अलावा दवाइयों और सेमी-प्राइवेट वार्ड का शुल्क भी अलग बताया गया।
परिवार का सवाल है कि यदि सर्जरी और निर्धारित अवधि के इलाज के लिए पैकेज तय किया गया था, तो बाद में बड़ी रकम क्यों जमा कराई गई? परिजनों के अनुसार सेमी-प्राइवेट वार्ड के लिए करीब 12 हजार रुपए प्रतिदिन का शुल्क बताया गया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए लगातार बढ़ता बिल बड़ी परेशानी बन गया।
परिवार में कमाने वाला कोई नहीं
परिजनों के मुताबिक मरीज विधवा हैं और उनकी तीन बेटियां हैं। परिवार में कमाने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं होने के कारण बेटियों ने जैसे-तैसे इलाज के लिए पैसों की व्यवस्था की।
परिवार का आरोप है कि शुरुआती पैकेज की रकम 1.47 लाख रुपए जमा कराने के बाद भी लगातार अतिरिक्त भुगतान के लिए कहा गया, जिससे उनकी आर्थिक मुश्किल बढ़ती गई।
कई स्तर पर मांगी मदद
परिवार की ओर से दावा किया गया है कि अस्पताल के बिल और इलाज से जुड़ी परेशानी को लेकर उन्होंने कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से संपर्क किया।
इनमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक गोलू शुक्ला के प्रतिनिधि सहित स्वास्थ्य विभाग और मंत्रालय के अधिकारियों तक मामला पहुंचाने की बात कही गई है।
परिजनों के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी मामले से अवगत कराया गया, लेकिन तत्काल अपेक्षित समाधान नहीं मिला।
कांग्रेस नेता से संपर्क के बाद बिल कम होने का दावा
परिवार के मुताबिक बाद में उन्होंने कांग्रेस संगठन के संगठन मंत्री संजय कामले से संपर्क किया। उनका दावा है कि कामले ने अस्पताल प्रबंधन से बातचीत कर मदद के लिए प्रयास किया और इसके बाद अस्पताल का बिल कम करने में सहायता मिली। परिजनों ने इसके लिए उनका आभार भी जताया है।
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