उमाजी... फिर एक चिट्ठी शराबबंदी के नाम लिखिए: उमा-शिवराज-मोहन के त्रिकोण में शराब का ‘सागर’
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट…सागर।
सागर के बांदा में हुए जहरीली शराबकांड के बाद प्रदेश की आबकारी नीति शराब के व्यापार को भाजपा नेताओं का संरक्षण और नेता हर विधायक, सांसद, मंत्री के अपने-अपने ठेकेदार पंचायत से लेकर राजधानी तक खुलकर शराब का व्यवसाय करते हुए बताए जाते हैं, इसलिए इनके आगे अधिकारी सबकुछ जानते हुए भी अंजान बने रहते हैं।
सागर के जहरीली शराबकांड ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। बदनामी देशभर में हो रही है। इससे पहले भाजपा की शिवराज सरकार में भी शराबबंदी की मांग उन्हीं की पार्टी की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने उठाई थी और आंदोलन जैसा अभियान भी छेड़ा था। उमा भारती ने शराबबंदी को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को पत्र भी लिखे। अब फिर से समाज अपेक्षा कर रहा है कि उमा भारती प्रदेश को तबाह करने वाली शराब पर बंदिश लगाने के लिए आगे आएं और एक चिट्ठी फिर सरकार के नाम लिख दें।
महिला संगठनों और आम नागरिकों का भी यही कहना है कि जब तक प्रदेश में सख्त शराबबंदी लागू नहीं होगी, तब तक ऐसे जहरीले हादसों में गरीब परिवारों के उजड़ने का सिलसिला नहीं थमेगा। शराब से लाड़ली बहनों के परिवार भी बर्बाद हो रहे हैं। समाज को तबाह करने वाली शराब से राजस्व कमाने वाली सरकारें यह तथ्य जानती हैं, फिर भी शराब और सरकार का चोली-दामन का रिश्ता और प्रगाढ़ होता जा रहा है।
प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शराब के अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं, ऐसे में उमा भारती को शराबबंदी का मोर्चा फिर संभालना चाहिए। सरकार को प्रभावित करने वाले भाजपा के दिल्ली से लेकर भोपाल तक के शक्ति केंद्र इस कारोबार में बताए जाते हैं।
सरकार की भी शायद यही मजबूरी है कि भाजपा के प्रदेश के दिल्ली से भोपाल और हर सूबे में बैठे शक्ति केंद्र कहे जाने वाले सूबेदार शराब कारोबारियों के गॉडफादर बने हुए हैं। कोई भी पार्टी हो, उसके बड़े नेता और उनके अधीन छोटे नेता सभी शराब की बहती गंगा में डुबकी लग रहे हैं। सोशल मीडिया की खबरों में तो प्रदेश के मंत्री और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थक गोविंदसिंह राजपूत व शिवराजसिंह चौहान के करीबी भूपेंद्र सिंह के साथ ही कांग्रेस के भी कई नेताओं पर आरोप-प्रत्यारोप सामने आ रहे हैं।
अवैध शराब के कारोबार से जनप्रतिनिधि बेखबर कैसे: उमा भारती... पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। उज्जैन में भगवान महाकाल के दर्शन के बाद मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार चल रहा था, तो पंचायत से लेकर संसद तक के जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? पंचायत सदस्य, सरपंच, जनपद और जिला पंचायत के पदाधिकारी, पार्षद, विधायक और सांसद अपने क्षेत्र की गतिविधियों से परिचित होते हैं। ऐसे में यदि अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से चल रहा था, तो जनप्रतिनिधि इससे अनभिज्ञ कैसे व क्यों रहे?
उन्होंने परोक्ष रूप से प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा किसी इलाके में अवैध शराब का कारोबार लगातार चलता रहे और जिम्मेदारों को इसकी भनक तक न लगे? इसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है। हालांकि उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा शराब के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और कहा कि सरकार को शराब के दुष्प्रभाव और अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाने की दिशा में लगातार काम करना चाहिए।
वही तीखे तेवर अब भी दिखाएं उमा... प्रदेश की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती शराबबंदी और अहातों को बंद कराने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरी थीं। उस दौरान उन्होंने ताबड़तोड़ पत्र लिखकर और खुद सड़कों पर उतरकर सरकार की नींद उड़ा दी थी। वहीं वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में सागर जिले में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौतें होने के बाद भी उमा भारती की ओर से वैसे आक्रामक तेवर अभी तक नहीं दिखाना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
शिवराज सरकार के दौर में ऐसा था उमा का प्रदर्शन... शिवराजसिंह चौहान के मुख्यमंत्रित्वकाल में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कई बार पत्र लिखकर और सार्वजनिक मंचों से शराब नीति पर कड़ा हमला बोला था। मार्च 2022 में भोपाल के बरखेड़ी स्थित शराब दुकान में घुसकर उन्होंने महिलाओं के सम्मान की रक्षा का हवाला देते हुए पत्थरों से हमला किया था। इसके बाद सीएम शिवराज को पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि समाज और सरकार दोनों को मिलकर पूर्ण शराबबंदी की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।
अप्रैल 2022 में नई आबकारी नीति लागू होने पर उन्होंने सिलसिलेवार ट्वीट और पत्रों के जरिये सरकार पर दबाव बनाया था। उन्होंने मांग की थी कि धार्मिक स्थलों, स्कूलों और रिहायशी इलाकों के पास की दुकानें तुरंत बंद हों और शराब की होम डिलीवरी पर रोक लगे।
जनवरी 2023 में उमा भारती ने सार्वजनिक रूप से पत्र लिखकर सरकार को चेतावनी दी थी कि उनका सद्गुणी चरित्र प्रदेश को नशामुक्त करने के लिए बड़े फैसले लेने में बाधक नहीं बनना चाहिए। हर मुलाकात में वे शराबबंदी की मांग दोहराती रहीं। जवाब में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज ने शराब के लिए जनता को जिम्मेदार ठहराते हुए अव्यवहारिक तर्क दिया था कि यदि जनता खुद शराब पीना बंद कर दे, तो सरकार दुकानें बंद करने में पीछे नहीं हटेगी।
शिवराज समर्थक भूपेंद्र सिंह व सिंधिया समर्थक गोविंद सिंह जैसे नेताओं के नाम शराबकांड को लेकर चर्चा में
आखिर क्या है इस खामोशी का कारण?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछली सरकार में जिस मुखरता के साथ उमा भारती अपनी ही पार्टी की सरकार पर शराबबंदी को लेकर दबाव बनाती थीं, वर्तमान प्रशासनिक सख्ती और मुख्यमंत्री के त्वरित एक्शन के बाद उनका यह मौन या संयम प्रदेश के राजनीतिक पटल पर एक नया और अलग अध्याय लिख रहा है।
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