श्रद्धा की डकैती: चंपत राय-अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर सस्पेंस बरकरार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुफिया कैमरों से हुआ चोरी का खुलासा, गड्डियों को गिनते थे, नोट नहीं
गिरफ्त में आए चढ़ावा चोर ट्रस्ट वालों के रिश्तेदार या जान-पहचान वाले, लाखों की संपत्ति बना रहे थे
ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर सबसे बड़ा सवाल- लंबे समय से चल रही चोरी की भनक क्यों नहीं लगी?
जीजा-साला, ससुर-दामाद की भूमिका का खुलासा, कोर्ट में पेश हुए सभी आरोपी, जेल भेजे गए, पैसे ही नहीं, जेवरात-आभूषण भी चुरा रहे थे आरोपी, चढ़ावा चोरी की रकम से प्रॉपर्टी खरीदी
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव टिन्नू के पास उस कमरे की चाबी रहती थी, जिसमें चढ़ावे की रकम रखी जाती थी। टिन्नू का रिश्तेदार मनीष यादव नोट की गिनती करता था। जांच में उसके घर से 10 लाख से ज्यादा रुपए मिले।
लवकुश मिश्रा व अनुकल्प मिश्रा, ट्रस्ट के पदाधिकारी तथा शक के दायरे में आने वाले अनिल मिश्रा के रिश्तेदार हैं। लवकुश-अनुकल्प भी आपस में रिश्तेदार हैं। दोनों के बीच साले-बहनोई का नाता है। अब तक एसआईटी ने आरोपियों के पास से 80 लाख रुपए बरामद किए हैं।
बावजूद इसके अनिल मिश्रा एसआईटी की रिपोर्ट व राडार से दूर है। सभी आरोपी दान चोरी की राशि से प्रॉपर्टी खरीद रहे थे। अनुकल्प की चाची नेहा मिश्रा ने ऑन कैमरा स्वीकार किया कि बीते दो-तीन साल से ये अब पैसे वाले होते जा रहे थे।
जमीन-फार्म हाउस व प्लॉट ले रहे थे। चढ़ावे की हर चोरी सुनियोजित थी। सीसीटीवी कैमरों को भी धता बताई जा रही थी। एसआईटी ने इन्हीं सीसीटीवी कैमरों से चोरी पकड़ी। छोटे चोर पकड़ में आए हैं। जेल भी भेज दिए गए हैं। अब देश की नजरें बड़े चोरों पर हैं। एसआईटी क्या उनकी गर्दन नाप पाएगी?
इस बीच नैतिकता के आधार पर ट्रस्ट के महासचिव और विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपतराय तथा पदेन ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबर पर 24 घंटे बाद भी सस्पेंस बरकरार है। किसी भी अधिकृत प्लेटफॉर्म से इस्तीफों की अब तक पुष्टि नहीं हुई है।
नोट गिनने वालों पर गाज, बड़ी मछलियां आजाद का देशभर में ऐसा शोर मचा कि शुक्रवार दोपहर को ये खबर तेजी से तैरी कि चंपतराय व अनिल मिश्रा ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे दिया है। गोपाल राव के विषय में कोई खबर नहीं आई।
इन तीनों किरदारों पर सबसे ज्यादा उंगलियां उठ रही थीं। विपक्ष ही नहीं, देश का जनमानस भी ये जानना चाह रहा था कि रामभक्तों की अपने इष्ट के प्रति अनन्य श्रद्धा की इस डकैती व आस्था के साथ हुए खिलवाड़ में इन तीन प्रमुख पदाधिकारियों की क्या जवाबदेही? एसआईटी की शुरुआती जांच से भी जब ये तीनों ट्रस्टी नदारद नजर आए तो सवालों की बारिश अयोध्या, उत्तर प्रदेश से लेकर देशभर में शुरू हो गई।
इस्तीफा प्रकरण इसके बाद सामने आया। लेकिन करीब 24 घंटे बीत जाने के बाद भी इस्तीफे पर रहस्य बरकरार है। कोई पुष्टि नहीं कर रहा कि इस्तीफा हो गया है।
इस्तीफे की खबर के बाद भी गोपाल राव ने मीडिया के समक्ष ये कहा कि लगता है आप सब दबाव बनाकर चंपतजी का इस्तीफा लेकर ही रहेंगे।
उधर, अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे और दान घोटाला मामले में पुलिस ने सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर यादव (टिन्नू यादव) और सुभाषचंद्र श्रीवास्तव शामिल हैं। ये सभी मंदिर में दान की गई राशि और आभूषणों की गिनती का काम संभालते थे।
पुलिस ने इनके पास से 79.85 लाख रुपए बरामद किए हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत और एसआईटी की सिफारिश पर इन 8 लोगों के खिलाफ चोरी, विश्वासघात और आपराधिक साजिश की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।
वहीं मंदिर प्रशासन ने पैसे की गिनती वाले कमरे (काउंटिंग रूम) में सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले कपड़े पहनना अनिवार्य कर दिया गया है और उनकी चेकिंग भी की जा रही है। ट्रस्ट में आमूलचूल बदलाव की सिफारिशों की भी जानकारी सामने आई है। अगर इस्तीफा प्रकरण हकीकत में घटा है, तो कोई बड़ी बात नहीं राम मंदिर का पूरा ट्रस्ट ही भंग हो जाए।
प्रधानमंत्री दफ्तर को ट्रस्ट ने चोरी की जानकारी देने से किया इनकार
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जिला प्रशासन को संदर्भित पत्र पर एसआईटी जांच का हवाला देते हुए वित्तीय जानकारी देने से इनकार कर दिया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय को स्थानीय भाजपा नेता की ओर से लिखे गए पत्र पर जब जिला प्रशासन ने ट्रस्ट से आय-व्यय, दान, बैंक खातों, जमीन के लेन-देन और संपत्ति के बारे में जानकारी मांगी तो ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने जानकारी देने से ही इनकार कर दिया।
चढ़ावा चोरी का मामला सामने आते ही भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने 9 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा था। उन्होंने मांग की थी कि मंदिर ट्रस्ट को निर्देश दिया जाए कि वह अपनी शुरुआत से लेकर अब तक के वित्तीय लेनदेन और संपत्ति की पूरी जानकारी सार्वजनिक करे।
इसके बाद भी उन्होंने एक पत्र 12 जून को लिखा। 13 जून को एसआईटी गठित की गई। इस पर मंगलवार को पीएमओ ने इसे जिला प्रशासन को संदर्भित किया, लेकिन ट्रस्ट ने जानकारी नहीं दी।
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