चार गुना मुआवजे के लिए किसानों का कलेक्टोरेट में डेरा: रात में बनाई दाल-बाटी; हनुमान चालीसा-सुंदरकांड का किया पाठ
KHULASA FIRST
संवाददाता

महिलाओं और आदिवासी किसानों की बड़ी भागीदारी आज और किसानों के पहुंचने की तैयारी
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बदनावर-झाबुआ नेशनल हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन जारी है। किसानों ने गुरुवार से कलेक्टर कार्यालय पर ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया है। मांग पूरी होने तक आंदोलन समाप्त नहीं करने की घोषणा की है।
धरनास्थल पर दाल-बाटी बनाई। सुरक्षाकर्मियों को भी भोजन कराया। इसके बाद हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और भजन-कीर्तन किया। रातभर परिसर में ही रहे। आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं, विशेषकर आदिवासी महिला किसान भी शामिल हैं।
आज पहुंचेगा किसान संघ का नेतृत्व
किसान संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के शुक्रवार को झाबुआ पहुंचने की जानकारी है। प्रांत संगठन मंत्री अतुल माहेश्वरी के भी पहुंचने की संभावना है। किसान संघ के जिला पदाधिकारियों के अनुसार धार जिले के प्रभावित किसान भी शामिल हो सकते हैं, जिससे आंदोलनकारियों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
चार गुना मुआवजा क्यों मांग रहे किसान
किसानों का कहना है प्रदेश में भूमि अधिग्रहण के मामलों में चार गुना मुआवजे की नीति लागू किए जाने के बावजूद बदनावर-झाबुआ नेशनल हाईवे के लिए प्रभावित किसानों को दो गुना मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया अपनाई गई है।
चार गुना मुआवजे की नीति की घोषणा से कुछ दिन पहले ही अधिकारियों ने मुआवजा अवॉर्ड जारी कर दिया, जिससे बाद में लागू हुई नीति का लाभ प्रभावितों को नहीं मिल पा रहा है।
किसानों का यह भी आरोप है भू-अधिग्रहण में कई निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। परियोजना की पर्याप्त जानकारी देने, आपत्ति और सुनवाई प्रक्रिया तथा अन्य प्रावधानों जैसे धारा चार और सामाजिक समघात और पर्यावरण मूल्यांकन का समुचित पालन नहीं हुआ। किसानों का दावा है इन प्रक्रियागत कमियों के आधार पर अवार्ड को न्यायालय में चुनौती देने का कानूनी आधार बनता है।
आदिवासी किसानों की बड़ी भागीदारी... परियोजना प्रभावित किसानों में बड़ी संख्या आदिवासी और जनजातीय समाज के किसानों की बताई जा रही है। आंदोलन स्थल पर आदिवासी महिला किसानों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
किसानों का कहना है भूमि उनके लिए केवल संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार की आजीविका और भविष्य का आधार है। इसलिए अधिग्रहण के बदले उचित और न्यायसंगत मुआवजा उनके लिए आर्थिक सुरक्षा का प्रश्न है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी नाराजगी... आंदोलनकारी किसानों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है क्षेत्र के किसानों की समस्या को अपेक्षित गंभीरता से नहीं उठाया गया। झाबुआ क्षेत्र से प्रदेश सरकार में मंत्री निर्मला भूरिया भी प्रतिनिधित्व करती हैं।
किसानों का कहना है इन्हें किसानों के समर्थन से जनप्रतिनिधित्व मिला है। क्षेत्र के विधायकों, सांसद और मंत्री का जो रवैया है उस कारण किसानों को संकट की घड़ी में उनसे प्रभावी हस्तक्षेप की अपेक्षा नहीं है।
किसानों ने खंडवा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा हरसूद विधायक और प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने क्षेत्र के किसानों के चार गुना मुआवजे के मुद्दे को मुख्यमंत्री के सामने उठाया और किसानों के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इसी तरह झाबुआ क्षेत्र के किसानों की समस्या को भी सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जाना चाहिए।
मांग पूरी होने तक चलेगा आंदोलन... किसानों ने स्पष्ट किया है कलेक्टर कार्यालय पर ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ आंदोलन अनिश्चितकालीन है। शुक्रवार को किसान संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों और आसपास के क्षेत्रों से किसानों के पहुंचने के बाद आंदोलन को और व्यापक किए जाने की संभावना है। किसानों का कहना है शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
कलेक्टर कार्यालय झाबुआ का नजारा बदला हुआ है। रात में भी आबाद है। पूरी रात जनता मौजूद है लेकिन अधिकारी नदारद। अधिकारी बांगलो मैं प्रजा को रामभरोसे छोड़ चैन की नींद ले रहे हैं वहीं जनता इन्हें जगाने के लिए खुले आसमान के नीचे डटी है।
कलेक्टर कार्यालय में कल से किसान अपनी समस्याओं को लेकर डटे हैं। रात में भी प्रजा अपनी मांगे राजा तक पहुंचाने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ कर रही है। किसानों ने मांगों को लेकर धरना दिया। रात में दाल-बाटी बनाई और खुले में ही विश्राम किया।
कई किसानों ने मुआवजा लेने से किया इनकार
किसान नेताओं के मुताबिक कई प्रभावित किसानों ने दो गुना मुआवजा स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। कुछ को अभी तक मुआवजा नहीं मिलने की बात भी सामने आई है। आंदोलनरत किसानों का कहना है दो गुना मुआवजा स्वीकार नहीं करेंगे।
चार गुना मुआवजे की मांग पर ही कायम रहेंगे। किसानों का कहना है आंदोलन की चेतावनी पहले भी दी गई थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्हें कलेक्टर कार्यालय पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
मुख्यमंत्री की किसान हितैषी भावना नजरअंदाज
किसानों का आरोप है मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों की आर्थिक सुरक्षा और उनके हितों को लेकर संवेदनशील रुख रखते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर अधिकारियों ने इस भावना के अनुरूप काम नहीं किया।
मुख्यमंत्री के समक्ष नीति स्पष्ट होने से पहले ही मुआवजा अवॉर्ड की प्रक्रिया बढ़ा दी गई। आंदोलनकारी चाहते हैं सरकार पूरी प्रक्रिया और अवॉर्ड की वैधानिकता की समीक्षा करे तथा प्रभावित किसानों को चार गुना मुआवजे का लाभ दिया जाए।
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