अवैध रिसोर्ट फर्जी डायवर्शन का राजा सरपंच से साठगांठ कर बनाया: खुलकर चल रही अनैतिक गतिविधियां, न पुलिस का ध्यान और न एमपीआईडीसी का, नोटिस देकर भूला
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट...इंदौर।
शहर से करीब 30 किमी दूर स्थित ग्राम बेटमा के उस पार अमन माता की प्रसिद्ध अमन चमन टेकरी से लगी एमपीआईडीसी की औद्योगिक उद्देश्य की जमीन पर इंदौर के भांग व्यापारी राजा पिता भगवतीप्रसाद जायसवाल ने नंदी हिल्स रिसोर्ट्स एवं रेस्टॉरेंट फर्जी डायवर्शन के आधार पर बना दिया है। उम्रदराज राजा ने भ्रष्टाचार और पैसा कमाने की हवस में प्रशासन को भी धोखा दिया और डायवर्शन की फर्जी फाइल तैयार की और उस आधार पर जमीन हथियाकर रिसोर्ट बना दिया। ये रिसोर्ट अनैतिक और अवैधानिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बना दिया है, जहां दिनभर अय्याशों की भीड़ लगी रहती है।
चिमनबाग चौराहा के नजदीक दो माह पूर्व खुली भांग की दुकान में भी बड़ा घालमेल करने वाला उम्रदराज राजा जायसवाल धोखाधड़ी और पीठ में छुरा घोंपने की बड़ी मिसाल है। इस उम्र में भी उसने ऐसे ऐसे कारनामे किए हैं, जिसे सुनकर व्यक्ति का सिर शर्म से झुक जाता है। उसकी भांग की दुकान पर ग्राहकों के साथ जो धोखाधड़ी की जाती है, वो तो जगजाहिर है ही, अब उसका एक और कारनामा सामने आया है।
उसने इंदौर से 30 किमी दूर धार रोड पर बेटमा के उस पार अमन चमन टेकरी से लगी एमपीआईडीसी (मप्र औद्योगिक विकास निगम) की जमीन पर नंदी हिल्स रिसोर्ट्स और रेस्टारेंट बना दिया है। करीब 8 बीघा जमीन पर लगभग 80 प्रतिशत आकार ले चुका ये रिसोर्ट्स अनैतिक गतिविधियों व अय्याशों का अड्डा बना हुआ है। खुलासा फर्स्ट की टीम जब यहां पहुंची तो पाया कि पूरी जमीन औद्योगिक उद्देश्य की है जिसका डायवर्शन नहीं किया जा सकता।
इसके लिए भोपाल से विशेष अनुमति लेनी होगी, लेकिन राजा जायसवाल ने इस उम्र में भी फर्जीवाड़ा किया और फर्जी डायवर्शन की फाइल बनाई। इसके बाद ये फाइल ग्राम पंचायत शंकरपुरा-सलमपुर में पेश करके जमीन का डायवर्शन बदलवा लिया। इस मामले में सरपंच भोलाराम यादव की भूमिका भी संदिग्ध है क्योंकि उन्होंने फाइल की कोई तसदीक नहीं कराई। नियमानुसार, डायवर्शन की फाइलों की जांच होती है और रिपोर्ट आने पर ही आगे की कार्रवाई की जाती है। लेकिन चांदी के चंद टुकड़ों की लालच में सरपंच भोलाराम यादव ने फाइल को ठीक से पढ़ा भी नहीं और जमीन के डायवर्शन को मंजूरी दे दी।
बताते हैं कि राजा जायसवाल ने इस फर्जी डायवर्शन की फाइल के साथ सरपंच के साथ ग्राम पंचायत कार्यालय के बाहर उनके घर पर बैठक की थी और वहीं सरपंच ने फाइल पर हस्ताक्षर भी किए। इससे साफ समझा जा सकता है कि डायवर्शन की फाइल फर्जी थी और इसमें प्रशासन के पत्र भी सब फर्जी हैं। अब सरपंच भी इस कहानी को छिपा रहे हैं।
दस सवालों का एक जवाब: फाइल देखकर मंजूरी दी
खुलासा फर्स्ट की टीम सरपंच भोलाराम यादव से भी मिली। इस दौरान उनसे राजा जायसवाल के रिसोर्ट्स को लेकर दस सवाल किए गए लेकिन उनका एक ही जवाब था-फाइल देखकर मंजूरी दी। उनसे पूछा गया कि जब आपने डायवर्शन फाइल देखी तो क्या उसकी एमपीआईडीसी इंदौर से तसदीक कराई? फाइल पर एमपीआईडीसी से रिपोर्ट मांगी? आपने एमपीआईडीसी से इस बारे में बात भी की? फाइल आने के बाद तुरंत मंजूरी क्यों दे दी गई? राजा जायसवाल ग्राम पंचायत कार्यालय न आकर आपके घर क्यों आया? आपने सील घर पर मंगवालकर क्यों साइन की?
लेकिन सवालों से सकपकाए सरपंच भोलाराम यादव एक ही रट लगाते रहे कि उन्होंने इंदौर जिला प्रशासन द्वारा दी गई डायवर्शन की फाइल देखी और साइन कर दिए। सचिव ने रिपोर्ट बनाई थी। वो इस बात का भी जवाब नहीं दे सके कि फाइल को मंजूरी देने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? जब सवालों से घिरे तो कहने लगे कि तब के एसडीएम ने कहा था। नाम बताने को तैयार नहीं और क्या कहा, ये भी नहीं बताया।
साप है कि राजा जायसवाल जैसे पैसों के हवसी ने अपनी जेब का थोड़ा ढीला किया और सरपंच को खरीद लिया। औद्योगिक उद्देश्य की जमीन पर रिसोर्ट्स तान दिया ताकि वो यहां अवैध, अनैतिक और अवांछनीय गतिविधयां चलाकर अपनी तिजोरी भर सके। चिमनबाग चौराहा के समीप अपनी भांग की दुकान पर ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी से इस उम्रदराज व्यापारी का पेट नहीं भर रहा तो वो ऐसी ओछी हरकत पर उतर आया है।
ये झूठ बोला राजा जायसवाल- पैसों की चमक में अंधा हो चुका भांग व्यापारी राजा पिता भगवतीप्रसाद जायसवाल सबकुछ सही बता रहा है। उससे बात हुई तो कहने लगा कि मेरे पास सारी अनुमतियां हैं। लेकिन वो इस सवाल का जवाब नहीं दे सका कि सब सही है तो एमपीआईडीसी ने जनवरी में नोटिस क्यों दिया था? उसके बाद एमपीआईडीसी के कार्यालय में चक्कर क्यों लगाए थे? वो अनुमतियों के बारे में ज्यादा कुछ जानकारियां नहीं दे सका जिससे भी संदेह होता है कि वो झूठ बोल रहा है।
एमपीआईडीसी ने दिया था नोटिस
मामले में खुलासा फर्स्ट टीम को पता चला कि गत 16 जनवरी को ही एमपीआईडीसी ने राजा जायसवाल को नोटिस भी दिया था। तत्कालीन कार्यपालन यंत्री द्वारा दिए गए नोटिस में कहा गया है कि पीथमपुर निवेश क्षेत्र विकास एवं प्रबंधन योजनांतर्गत के तहत विकसित किए जा रहे स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप सेक्टर-7 में सम्मिलित ग्राम सलमपुर की भूमि खसरा नंबर 329/12, 329/9, रकबा 1.777 हैक्टेयर पर आपने अप्राधिकृत/अवैध रूप से कार्यालय से बिना अनुज्ञा प्राप्त किए विकास कार्य और भवन निर्माण किया है, जिसे 24 जून 2024 को हटाने के लिए निर्देशित किया गया था, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया।
इसलिए अब अंतिम रूप से आपको सूचित किया जाता है कि आप सात दिन के भीतर इस अवैध निर्माण को हटाया जाना सुनिश्चित करें अन्यथा एमपीआईडीसी इसे हटाएगा जिसका खर्च भी आपसे वसूला जाएगा। मामले में नवागत कार्यपालन यंत्री भावेश अग्रवाल ने बताया कि वे जल्दी ही रिसोर्ट्स का दौरा करेंगे और यदि कुछ गलत लगा तो कार्रवाई करेंगे। तहसीलदार शैवालसिंह ने भी कहा कि निर्माण अवैध है। एमपीआईडीसी ने नोटिस दिया है। आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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