कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास दूषित पानी की सप्लाई का दावा: 63 में से 43 सैंपल फेल; गैस पीड़ित संगठनों ने जताई बड़ी चिंता
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गैस पीड़ितों के चार संगठनों ने दावा किया है कि कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के इलाकों में नगर निगम द्वारा सीवेज से दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही है। संगठनों ने 30 बस्तियों से लिए गए पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि करीब 70 प्रतिशत सैंपल दूषित पाए गए हैं। उनका आरोप है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो भोपाल में भी इंदौर के भागीरथपुरा जैसी स्थिति बन सकती है।
63 में से 43 सैंपल में मिला फीकल कोलीफॉर्म
भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने बताया कि इस महीने 30 बस्तियों के नलों से 63 पानी के नमूने एकत्र कर जांच कराई गई। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म (मल से जुड़े बैक्टीरिया) पाए गए। इसका अर्थ है कि 30 में से 19 बस्तियों में लोगों तक दूषित पेयजल पहुंच रहा है।
उन्होंने बताया कि बड़ा तालाब (अपर लेक) से सप्लाई किए गए पानी के 90 प्रतिशत नमूने, जबकि कोलार डैम से सप्लाई होने वाले पानी के 25 प्रतिशत नमूने भी जांच में दूषित पाए गए।
जलजनित बीमारियों का बढ़ रहा खतरा
संगठनों का कहना है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास रहने वाले लोग लंबे समय से सीवेज मिश्रित पानी पीने को मजबूर हैं। इसके कारण दस्त, उल्टी, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उनका दावा है कि कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और निजी क्लीनिकों में टाइफाइड के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी किया जिक्र
भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा कि वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले कचरे से आसपास का भूजल जहरीले रसायनों और भारी धातुओं से प्रदूषित हो चुका है। इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
गैस पीड़ित संगठनों ने मांग की है कि प्रभावित इलाकों में पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए, दूषित पानी की आपूर्ति तत्काल रोकी जाए और लोगों को सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्वास्थ्य संबंधी गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
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