चर्चित IAS केस में एसआईटी की चार्जशीट फिर चर्चा में...: विजेंद्रसिंह रावत के खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई पर रोक लगाने से कोर्ट का इनकार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट...इंदौर।
चर्चित आईएएस संतोष वर्मा और तत्कालीन जिला न्यायाधीश विजेंद्रसिंह रावत से जुड़े फर्जी न्यायिक आदेश प्रकरण में हाई कोर्ट के ताजा आदेश ने एक बार फिर पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है। हाई कोर्ट ने रावत के खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद एसआईटी की चार्जशीट में दर्ज कई दावे दोबारा चर्चा का विषय बन गए हैं। हालांकि मामले में दर्ज सभी आरोपों पर अंतिम फैसला अभी संबंधित कोर्ट को करना है।
हाई कोर्ट में विजेंद्र सिंह रावत ने विभागीय जांच, कारण बताओ नोटिस और आरोप-पत्र को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि वर्ष 2020 की घटना के लगभग पांच साल बाद विभागीय कार्रवाई शुरू की गई, इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब आपराधिक प्रकरण विचाराधीन है, तब विभागीय जांच आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए, लेकिन हाई कोर्ट की युगलपीठ ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि केवल देरी विभागीय कार्रवाई समाप्त करने का आधार नहीं हो सकती।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद एसआईटी की चार्जशीट में दर्ज घटनाक्रम फिर चर्चा में है। जांच एजेंसी का दावा है कि वर्ष 2020 के दौरान आईएएस वर्मा और तत्कालीन जिला न्यायाधीश रावत के बीच करीब 140 बार मोबाइल पर बातचीत हुई थी। एसआईटी के अनुसार इन संपर्कों के दौरान मामले से जुड़ी कई प्रशासनिक और न्यायिक गतिविधियां हुईं। चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि 6 अक्टूबर 2020 को दोनों के बीच फोन पर बातचीत के बाद ग्रैंड माचल रिसॉर्ट में मुलाकात हुई। जांच एजेंसी ने इस मुलाकात को मामले की महत्वपूर्ण कड़ी माना है।
अभी न्यायिक परीक्षण बाकी
एसआईटी ने जांच पूरी कर आईएएस वर्मा और तत्कालीन न्यायाधीश रावत के खिलाफ आरोप-पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया है। हाई कोर्ट के ताजा आदेश के बाद विभागीय जांच का रास्ता साफ माना जा रहा है, लेकिन चार्जशीट में किए गए सभी दावे अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। आरोप सिद्ध होना या न होना संबंधित कोर्ट के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।
जमानत देने वाले सेशन जज का तबादला
इसी प्रकरण में एक अन्य घटनाक्रम भी सामने आया है। फर्जी आदेश मामले के आरोपियों को जमानत देने वाले इंदौर के सेशन जज प्रकाश कसेरा का तबादला कर दिया गया। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी आदेश के तहत उन्हें इंदौर से सीधी जिले के रामपुर सेशन कोर्ट भेजा गया है। हालांकि तबादले को आधिकारिक रूप से नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना गया और इसे उक्त मामले से जोड़कर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
आदेश की कॉपी रात में सौंपने का दावा
एसआईटी के मुताबिक 7 अक्टूबर 2020 को न्यायालय के आदेश की कॉपी तैयार हुई और उसी रात आईएएस वर्मा को उनके निवास के पास इसकी प्रति उपलब्ध कराई गई। अगले दिन वे भोपाल स्थित सामान्य प्रशासन विभाग पहुंचे और उससे संबंधित आवेदन प्रस्तुत किया। जांच एजेंसी का दावा है कि बाद में आदेश की प्रतियां संबंधित अधिकारियों और अभियोजन पक्ष को भी भेजी गईं।
महिला की शिकायत से खुला मामला
जांच के अनुसार पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिलने के बाद संबंधित महिला ने 9 नवंबर 2020 को हाई कोर्ट की विजिलेंस शाखा और जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष शिकायत की। इसके बाद आरटीआई के जरिये दस्तावेज जुटाए गए और कथित फर्जी न्यायिक आदेश तैयार किए जाने की शिकायत एमजी रोड थाने में दर्ज हुई। बाद में मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई।
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