राजा रघुवंशी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी के सामने रखे दो विकल्प; जानिए पूरी सुनवाई में क्या हुआ
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी की जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के वकील के सामने दो विकल्प रखे हैं। अदालत ने कहा कि या तो वह मेघालय सरकार की जमानत रद्द करने वाली याचिका पर मेरिट के आधार पर फैसला करेगी, या फिर सोनम को पहले सरेंडर करने का निर्देश देकर बाद में जमानत याचिका पर विचार करेगी।
यह मामला मई 2025 में हुए उस चर्चित हत्याकांड से जुड़ा है, जिसमें राजा रघुवंशी की मेघालय में हनीमून के दौरान हत्या कर दी गई थी। पुलिस का आरोप है कि हत्या की साजिश में उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी और उसके कथित प्रेमी समेत अन्य लोग शामिल थे। सोनम को जून 2025 में गिरफ्तार किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सोनम को कौन से दो विकल्प दिए?
जस्टिस एमएम सुंदेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान सोनम के वकील से कहा कि अदालत के पास दो रास्ते हैं।
पहला विकल्प: सुप्रीम कोर्ट मेघालय सरकार की याचिका पर पूरी तरह सुनवाई कर सकता है और यह तय कर सकता है कि निचली अदालत और हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत सही थी या नहीं।
दूसरा विकल्प: अदालत सोनम को पहले सरेंडर करने का निर्देश दे सकती है। इसके बाद गवाहों और जांच से जुड़े मामलों पर विचार करते हुए जमानत याचिका पर फैसला किया जा सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि वह मामले को लंबित रखते हुए केवल प्रक्रिया के आधार पर नहीं, बल्कि पूरे मामले के गुण-दोष (मेरिट) के आधार पर निर्णय लेना चाहता है।
सोनम के वकील ने मांगा दो दिन का समय
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सोनम रघुवंशी के वकील ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय मांगा। वकील ने कहा कि उन्हें अपने पक्ष की रणनीति तय करने से पहले सोनम से बातचीत करनी होगी। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए उन्हें समय दिया।
कोर्ट ने सोनम के व्यवहार पर भी उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजा रघुवंशी की हत्या के बाद सोनम के व्यवहार को लेकर भी सवाल किए। अदालत ने पूछा कि हत्या की घटना के बाद सोनम का आचरण कैसा रहा और उसने किन परिस्थितियों में पुलिस के सामने अपनी बात रखी।
इसके अलावा कोर्ट ने सोनम से उस दलील पर भी स्पष्टीकरण मांगा जिसमें कहा गया था कि उसे गिरफ्तारी का आधार नहीं बताया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि यदि गिरफ्तारी के आधार की जानकारी नहीं दी गई थी, तो सोनम ने यह मुद्दा पहले क्यों नहीं उठाया।
मेघालय सरकार ने जमानत का किया विरोध
मेघालय सरकार की ओर से भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में सोनम की जमानत का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सोनम ने खुद पुलिस के सामने सरेंडर किया था। इसलिए बाद में वह यह दावा नहीं कर सकती कि उसे गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए।
मेहता ने अदालत में कहा कि गिरफ्तारी मेमो में कोई कमी यदि थी तो वह केवल एक तकनीकी या क्लेरिकल गलती थी। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जब कोई व्यक्ति खुद पुलिस के पास आता है, तो बाद में वह गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठा सकता।
सोनम की गिरफ्तारी को लेकर क्या विवाद है?
सोनम की ओर से यह दलील दी गई थी कि गिरफ्तारी के समय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और उसे गिरफ्तारी का आधार नहीं बताया गया। वहीं मेघालय सरकार का कहना है कि सोनम ने खुद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था और जांच एजेंसियों के पास उसके खिलाफ पर्याप्त आधार मौजूद थे।
हाईकोर्ट ने क्यों बरकरार रखी थी जमानत?
मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून को निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें जमानत रद्द करने की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने कहा था कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं और गिरफ्तारी के आधार तैयार करने में न्यायिक विवेक का सही इस्तेमाल नहीं हुआ। निचली अदालत ने 27 अप्रैल को सोनम और अन्य आरोपियों को जमानत दी थी, जिसे राज्य सरकार ने चुनौती दी थी।
अब आगे क्या होगा?
अब सुप्रीम कोर्ट में सोनम रघुवंशी और मेघालय सरकार दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी। सोनम की ओर से यह तय करना होगा कि वह जमानत मामले में मेरिट पर बहस चाहती हैं या पहले सरेंडर करने के विकल्प पर विचार करेंगी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला यह तय करेगा कि सोनम को मिली जमानत जारी रहेगी या उसे दोबारा हिरासत में जाना पड़ेगा।
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