खबर
Top News

राहुल-प्रियंका: देश के प्रति योगदान जीरो: फिर भी हैं मीडिया के ‘हीरो’

Khulasa First

KHULASA FIRST

संवाददाता

12 मई 2026, 5:59 pm
शेयर करें:
राहुल-प्रियंका: देश के प्रति योगदान जीरो

संजय सक्सेना वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट।
एक समय था जब भारतीय राजनीति में कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार की जड़ें समान रूप से काफी मजबूत हुआ करती थीं। लोग तो यहां तक कहते थे कि नेहरू-गांधी परिवार के बिना कांग्रेस अधूरी मानी जाती थी।

कांग्रेस ने देश को जितने प्रधानमंत्री दिए, उनमें इस परिवार के तीन सदस्य  प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी  तक ने कुल मिलाकर कई दशक तक देश पर राज किया।

कांग्रेस तब तक उभार पर रही, जब तक पार्टी के भीतर इन तीनों का सिक्का चला, लेकिन इसके बाद सोनिया गांधी के हाथ में कांग्रेस की बागडोर आने के बाद धीरे-धीरे कांग्रेस का बुरा दौर शुरू हो गया। हालांकि यह इतना बुरा भी नहीं था कि कांग्रेस हाशिये पर चली गई हो।

2014 तक वह किसी न किसी तरह सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने में कामयाब हो ही जाती थी, परंतु जब से सोनिया गांधी की पकड़ पार्टी पर कमजोर और राहुल गांधी की मजबूत होना शुरू हुई, तब से कांग्रेस का बेहद बुरा दौर आ गया।

केंद्र की सत्ता तो कांग्रेस से फिसली ही, राज्य दर राज्य भी कांग्रेस की सरकारें जाती रहीं। हालात यह हो गया कि नेशनल पार्टी का तमगा हासिल किए हुए कांग्रेस क्षेत्रीय दलों की पिछलग्गू बनकर रह गई।

यूपी में समाजवादी पार्टी, बिहार में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल, तमिलनाडु में डीएमके, झारखंड में शिबू सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा, महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी के साथ कांग्रेस पिछलग्गू बनी हुई है।

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर कांग्रेस चुनाव लड़ चुकी है। यहां भी अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस को अपनी इच्छानुसार सीटें दी थीं। हाल में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में केरल में कांग्रेस मुस्लिम लीग के सहारे सत्ता में आई है।

कांग्रेस का क्षेत्रीय दलों का पिछलग्गू बनने का दौर राहुल गांधी के समय ही शुरू हुआ था। कांग्रेस के खोते जनाधार और गिरते मनोबल को बचाने में जब राहुल गांधी कामयाब होते नहीं दिखे, तो प्रियंका वाड्रा को भी कांग्रेस का ट्रंप कार्ड बताते हुए मैदान में उतार दिया गया, लेकिन उनका भी जादू चल नहीं पाया।

भाई-बहन की जोड़ी भी कांग्रेस की तस्वीर नहीं बदल पाई। यह और बात है कि आज भी कांग्रेस को अर्श से फर्श पर ला देने वाले राहुल गांधी की ही पार्टी के भीतर तूती बोलती है। कांग्रेस का छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा नेता राहुल-प्रियंका के सामने हाथ बांधे खड़ा रहता है, जबकि राहुल के कई फैसले पार्टी के लिए घातक साबित हो चुके हैं।

बहरहाल, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि आज की तारीख तक राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा गांधी का देश और पार्टी को आगे ले जाने में किसी तरह का कोई खास योगदान नहीं है।

पार्टी के लिए इन दोनों ने अभी तक कुछ ऐसा नहीं किया, जिससे कांग्रेस आगे बढ़ती दिख रही हो। इसके उलट कांग्रेस लगातार जनाधार खोती जा रही है। सवाल यह है कि कांग्रेस के पतन के लिये जिम्मेदार राहुल गांधी और प्रियंका को भारतीय मीडिया इतना हाईलाइट क्यों करता है, जबकि देश-विदेश में भारत की छवि दागदार करने, राहुल के देश विरोधी ट्वीट और हिंदू विरोधी छवि के कारण जनता इन्हें लगातार नकारती जा रही है।

आश्चर्य होता है कि क्यों मीडिया की दुनिया में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का नाम आज भी प्रमुखता से चमकता रहता है। यह सवाल भारतीय राजनीति और मीडिया के गठजोड़ की उस जटिल गुत्थी को खोलता है, जहां वोट की बजाय व्यूअरशिप और एडवर्टाइजमेंट राज करता है।

गहराई से विश्लेषण करें तो पता चल जाता है कि कैसे ये दोनों नेहरू-गांधी परिवार के वारिस बनकर राजनीति में बने हुए हैं। दरअसल, राहुल गांधी की राजनीतिक यात्रा शुरू से ही विवादों और असफलताओं से भरी रही।

2004 में अमेठी से सांसद बने, फिर 2014 और 2019 में हार का सामना करना पड़ा। 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी हार के बाद उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।

प्रियंका गांधी ने 2019 में महासचिव बनकर पूर्वी उत्तर प्रदेश संभाला, लेकिन 2022 यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी को महज 2 सीटें मिलीं।

2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 99 सीटें जरूर मिलीं, लेकिन यह राहुल या प्रियंका के व्यक्तिगत करिश्मे से कम, गठबंधन और मोदी विरोधी माहौल से ज्यादा जुड़ा रहा।

आंकड़े साफ कहते हैं कि 2014 में कांग्रेस के पास 44 लोकसभा सीटें थी, 2019 में 52, लेकिन राज्य स्तर पर हाहाकार मचा रहा। यूपी में 403 सीटों वाली विधानसभा में 2022 में कांग्रेस को केवल 2 सीटें मिलीं, पंजाब में 2022 विधानसभा चुनाव में पार्टी 92 से घटकर 18 सीटों पर पहुंच गई।

हिमाचल में भले कांग्रेस जीती, लेकिन गुजरात में 156 में से केवल 1 सीट मिली। ये आंकड़े दिखाते हैं कि इन दोनों का नेतृत्व पार्टी को मजबूत बनाने में नाकाम रहा। जनाधार का सिकुड़ना भी छिपा हुआ नहीं है।

2014 में कांग्रेस का वोट शेयर 19.5 फीसदी था, 2019 में 19.3 फीसदी, जबकि बीजेपी 38 फीसदी से ऊपर कायम रही।फिर भी मीडिया का फोकस इन पर क्यों रहता है? पहला कारण परिवार का ब्रांड है।

नेहरू-गांधी परिवार भारतीय राजनीति का सबसे पुराना राजनीतिक वंश माना जाता है। जवाहरलाल नेहरू से इंदिरा और राजीव गांधी तक, यह नाम ही समाचार बन जाता है। मीडिया हाउस जानते हैं कि राहुल गांधी का कोई बयान  चाहे ‘चौकीदार चोर है’ वाला हो या फिर देश को हिंदू आतंकवाद से खतरा बताने वाला  तुरंत वायरल हो जाता है।

प्रियंका की साड़ी-स्टाइल या भावुक अपील पर टीआरपी बढ़ती है। 2024 चुनाव में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को कई न्यूज चैनलों ने घंटों कवर किया, जबकि बीजेपी के विकसित भारत अभियान को अपेक्षाकृत कम।

टीआरपी के आंकड़े बताते हैं कि राहुल के भाषणों पर डिबेट शो की रेटिंग 2-3 पॉइंट तक ऊपर चली जाती है। क्यों? क्योंकि विवाद बिकता है। राहुल के विदेशी दौरे, अमेरिका और यूके में ‘भारत में डेमोक्रेसी खतरे में है’ जैसे बयान, अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी प्रमुखता से दिखाता है, जिसे भारतीय चैनल भी तुरंत उठाते हैं। दूसरा कारण मीडिया का राजनीतिक एजेंडा माना जाता है।

मुख्यधारा मीडिया के एक हिस्से में लेफ्ट-लिबरल विचारधारा का प्रभाव अब भी मजबूत बताया जाता है। कुछ डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म राहुल-प्रियंका को मोदी के विकल्प के रूप में पेश करते हैं।

यही वजह है कि 2023 में मणिपुर हिंसा पर राहुल गांधी के मार्च को कई चैनलों ने लाइव दिखाया, जबकि प्रधानमंत्री मोदी के बयान को कम प्राथमिकता मिली। प्रियंका के महिलाओं के लिए न्याय अभियान को फेमिनिस्ट एंगल से हाइलाइट किया गया।

कुल मिलाकर यह राहुल-प्रियंका की राजनीति को जिंदा रखने की रणनीति मानी जाती है। अगर कांग्रेस खत्म हो गई, तो विपक्ष के बिना डिबेट शो कैसे चलेंगे? कई न्यूज चैनलों के पैनल में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताया जाता है, भले जनता उन्हें 2014 और 2019 में नकार चुकी हो।

2014 में अमेठी में स्मृति ईरानी से राहुल गांधी की हार, 2019 में रायबरेली में सोनिया गांधी की सीट पर प्रियंका की सक्रियता के बावजूद घटता मार्जिन, और 2024 में राहुल गांधी की वायनाड व रायबरेली दोनों सीटों पर जीत  इन सबके बावजूद कांग्रेस 100 का आंकड़ा नहीं छू पाई, जबकि बीजेपी 240 सीटें जीतने में सफल रही। (यह लेखक के निजी विचार हैं।)

संबंधित समाचार

‘फूल और कांटे’ के डायरेक्टर का निधन
Top News

‘फूल और कांटे’ के डायरेक्टर का निधन:बॉलीवुड को बड़ा झटका; 77 की उम्र में ली आखिरी सांस

about 6 hours ago
एनकाउंटर केस में फिर गरमाई कानूनी लड़ाई
Top News

एनकाउंटर केस में फिर गरमाई कानूनी लड़ाई:21 पुलिसकर्मियों की बरी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती; मृतक के भाई ने दायर की याचिका

about 6 hours ago
बैरिकेड्स हटाकर जलभराव वाले अंडरब्रिज में घुसा स्कूली वाहन
Top News

बैरिकेड्स हटाकर जलभराव वाले अंडरब्रिज में घुसा स्कूली वाहन:बच्चों को रस्सी के सहारे निकाला; चालक गिरफ्तार

about 6 hours ago
फोरलेन पर मौत बनकर दौड़ा कंटेनर
Top News

फोरलेन पर मौत बनकर दौड़ा कंटेनर:बाइक सवारों में मचा हड़कंप; पुलिस ने घेरकर नशे में धुत चालक को पकड़ा

about 7 hours ago
हाइब्रिड गांजे के साथ युवक गिरफ्तार
Top News

हाइब्रिड गांजे के साथ युवक गिरफ्तार:हजारों रुपए का ओजी जब्त; आरोपी पर पहले से तीन केस

about 7 hours ago
टोल प्लाजा के एसी आउटर में लगी आग
Top News

टोल प्लाजा के एसी आउटर में लगी आग:वाहनों की आवाजाही प्रभावित; लंबी कतारों से मचा हड़कंप

about 7 hours ago
सिंहस्थ से पहले तैयारियों की रफ्तार तेज
Top News

सिंहस्थ से पहले तैयारियों की रफ्तार तेज:कमिश्नर ने दिए घाट-स्वच्छता के निर्देश; श्रद्धालुओं के लिए होल्डिंग एरिया और ई-कार्ट

about 8 hours ago
घी के नाम पर मिलावट
Top News

घी के नाम पर मिलावट:25 ब्रांड के सैंपल फेल; पॉम ऑयल मिला, त्योहार से पहले खाद्य विभाग सख्त

about 8 hours ago
महाकाल की नगरी में महापर्व की तैयारी
Top News

महाकाल की नगरी में महापर्व की तैयारी:सिंहस्थ-2028 होगा भव्य-दिव्य; सीएम बोले- संत, प्रशासन और समाज मिलकर निभाएं जिम्मेदारी

about 8 hours ago
‘पटाखा साउंड’ का खेल खत्म
Top News

‘पटाखा साउंड’ का खेल खत्म:सैकड़ों मॉडिफाइड साइलेंसर रोड रोलर से चकनाचूर; ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई जारी

about 9 hours ago
बैंड भर्ती पर हाईकोर्ट सख्त
Top News

बैंड भर्ती पर हाईकोर्ट सख्त:विभाग से 4 हफ्ते में पूरा रिकॉर्ड और जवाब मांगा; सुनवाई अगले माह

about 9 hours ago
कार से करोड़ों की ड्रग्स बरामद
Top News

कार से करोड़ों की ड्रग्स बरामद:पुलिस ने 5 किमी तक किया पीछा; फायरिंग कर जंगल में भागे तस्कर

about 9 hours ago
आईसीयू में मरीज की मौत के बाद बवाल
Top News

आईसीयू में मरीज की मौत के बाद बवाल:डॉक्टर से मारपीट; मेडिकल उपकरण फेंके, नर्सिंग स्टाफ ने भागकर बचाई जान

about 9 hours ago
सब इंजीनियर भर्ती में बड़ा बदलाव
Top News

सब इंजीनियर भर्ती में बड़ा बदलाव:सैकड़ों पदों की एक्जाम निरस्त; नए पद जुड़ने के बाद फिर होगी परीक्षा

about 10 hours ago
कर्मचारियों ने घेरा नगर निगम मुख्यालय
Top News

कर्मचारियों ने घेरा नगर निगम मुख्यालय:तीन दिन में मांगें नहीं मानीं तो हड़ताल की चेतावनी

about 10 hours ago
ऑनलाइन बिक रहा था जहरीला धतूरा
Top News

ऑनलाइन बिक रहा था जहरीला धतूरा:इस सरकार ने तीन बड़ी कंपनियों पर कसा शिकंजा

about 10 hours ago
नदियां बन रहीं सीवेज की नाली
Top News

नदियां बन रहीं सीवेज की नाली:सैकड़ों निकायों में एसटीपी नहीं; नर्मदा-क्षिप्रा-चंबल में गंदा पानी

about 10 hours ago
मिलावटखोरों पर शिकंजा
Top News

मिलावटखोरों पर शिकंजा:खाद्य विभाग की चार प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई; 1 हजार किलो से ज्यादा माल मिला

about 11 hours ago
बेहतरीन काम करने वाले पुलिसकर्मियों को मिला सम्मान
Top News

बेहतरीन काम करने वाले पुलिसकर्मियों को मिला सम्मान:इन्होंने हासिल किया पहला स्थान

about 11 hours ago
TVS का नया इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च
Top News

TVS का नया इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च:सिंगल चार्ज में मिलेगी इतनी रेंज; USB Type-C सहित मिलेंगे ये फीचर्स, कीमत भी है बेहद कम

about 11 hours ago

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!