नदियां बन रहीं सीवेज की नाली: सैकड़ों निकायों में एसटीपी नहीं; नर्मदा-क्षिप्रा-चंबल में गंदा पानी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश में सीवेज और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की बदहाल स्थिति पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य के 413 नगरीय निकायों में से 352 में सीवेज उपचार की सुविधा नहीं होने और करीब 637 MLD सीवेज 1,315 नालों के जरिए जलस्रोतों में छोड़े जाने पर अधिकरण ने चिंता जताई है। इनमें नर्मदा, क्षिप्रा और चंबल जैसी प्रमुख नदियां भी शामिल हैं।
NGT ने राज्य सरकार को नगर निकायों से मिले आंकड़ों का केवल कागजी आधार पर भरोसा करने के बजाय प्रत्येक जिले के कलेक्टर के माध्यम से मैदानी सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव को अगली रिपोर्ट में सत्यापित जानकारी पेश करनी होगी।
352 निकायों में STP नहीं, 584.81 MLD सीवेज का इंतजाम अधूरा
अधिकरण के सामने पेश आंकड़ों के मुताबिक 352 नगरीय निकाय करीब 584.81 MLD सीवेज उत्पन्न करते हैं, लेकिन इनके पास वर्तमान में कोई उपचार सुविधा नहीं है। राज्य ने इन क्षेत्रों के लिए 736 MLD क्षमता के STP प्रस्तावित होने की जानकारी दी है। हालांकि NGT ने इनके निर्माण और संचालन की समयसीमा पर स्पष्ट जानकारी मांगी है।
637 MLD सीवेज सीधे जलस्रोतों में
NGT ने पाया कि इन 352 निकायों में 1,315 नालों के जरिए करीब 637 MLD सीवेज और सीवेजयुक्त पानी अलग-अलग जलस्रोतों में छोड़ा जा रहा है। नर्मदा, क्षिप्रा और चंबल जैसी नदियों में गंदा पानी पहुंचना पर्यावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
61 निकायों में करीब 2,075.86 MLD सीवेज उत्पादन के मुकाबले सिर्फ 1,117.49 MLD उपचार दर्ज किया गया। राज्य में सीवेज ट्रीटमेंट का अनुमानित अंतर 1,542.18 MLD बताया गया है।
12.67 लाख घर सीवर लाइन से बाहर
अधिकरण ने यह भी नोट किया कि 12,67,626 घर अभी मौजूदा सीवर लाइनों से नहीं जुड़े हैं। पर्याप्त सीवरेज और कन्वेयंस सिस्टम नहीं होने के कारण सीवेज और सुल्लेज के नालों तथा नदियों में पहुंचने पर NGT ने गंभीर चिंता जताई।
12.86 लाख टन विरासत कचरा भी बाकी
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में भी बड़ी कमी सामने आई है। 110 निकायों में करीब 12.86 लाख मीट्रिक टन विरासत अपशिष्ट का उपचार बाकी है। इसे दिसंबर 2026 तक निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं। 303 निकायों में बचे अन्य विरासत कचरे के निस्तारण की समयसीमा भी दिसंबर 2026 तय की गई है।
ग्वालियर के स्टॉर्म-वॉटर ड्रेन पर भी सवाल
NGT ने ग्वालियर की स्थिति पर भी विशेष टिप्पणी की। यहां आठ स्टॉर्म-वॉटर ड्रेनों से करीब 190 MLD पानी सीवर ट्रंक लाइन की ओर जाने की जानकारी सामने आई है, जो स्वर्ण रेखा नदी के पास या उसमें जा रही है। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि बारिश के पानी की निकासी वाली लाइनों को स्थायी रूप से सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
अगली रिपोर्ट में प्रत्येक निकाय के कचरा प्रसंस्करण और विरासत कचरा स्थलों की जियो-कोडेड तस्वीरें भी पेश करनी होंगी।
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