बेटे के नाम लाखों की प्रॉपर्टी डील, 6 चेक बाउंस केस अब जांच के घेरे में: कंडवाल के ‘करोड़ों के खेल’ में नया मोड़
KHULASA FIRST
संवाददाता

लोकायुक्त की छापेमारी के बाद खुल रही परतें
खुलासा फर्स्ट...इंदौर।
महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मीनारायण कंडवाल पर लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद अब जांच केवल आलीशान जिम, सुपर मार्केट और करोड़ों की संपत्तियों तक सीमित नहीं रही है। जांच में सामने आए कुछ दस्तावेजों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। अब लोकायुक्त की नजर कंडवाल के बेटे अभिषेक के नाम हुई प्रॉपर्टी डील, चेक बाउंस मामलों और करोड़ों के कथित वित्तीय लेन-देन पर भी टिक गई है।
सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2022 में अभिषेक कंडवाल ने एक प्रॉपर्टी कारोबारी के खिलाफ छह चेक बाउंस के मामले अदालत में लगाए थे। बाद में इन मामलों में समझौता हो गया, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि उस समय पढ़ाई कर रहे अभिषेक के पास इतनी बड़ी रकम निवेश करने के लिए आई कहां से? जांच एजेंसियों का फोकस अब इस बात पर है कि प्रॉपर्टी सौदे में लगी रकम का असली स्रोत क्या था। सूत्रों का दावा है कि प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हंे कि परिवार के भीतर ही धन का हस्तांतरण कर कुछ निवेश किए गए हो सकते हैं। यही वजह है कि अब केवल कंडवाल ही नहीं, बल्कि उनके परिजन के नाम पर मौजूद संपत्तियां और वित्तीय गतिविधियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं।
लोकायुक्त की कार्रवाई में कंडवाल की पत्नी शारदा, पुत्रवधू तनु और हर्षिता के नाम पर भी बड़ी संख्या में संपत्तियां और निवेश सामने आए हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि इन संपत्तियों की वास्तविक फंडिंग और आय के स्रोतों की पड़ताल से कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।
सिर्फ अफसर नहीं, कारोबारी साम्राज्य भी... लोकायुक्त जांच में यह भी सामने आया कि कंडवाल परिवार के पास सुपर मार्केट, आधुनिक दो मंजिला जिम और अन्य निवेश मौजूद हैं। जिम में लगी महंगी मशीनें, व्यवसाय में निवेश और संपत्तियों का फैलाव यह संकेत दे रहा है कि सरकारी नौकरी के साथ-साथ परिवार का आर्थिक दायरा काफी बड़ा हो चुका था।
1986 में शिक्षक, अब 241% अधिक संपत्ति का मामला... कंडवाल ने वर्ष 1986 में एक सहायक शिक्षक के रूप में सरकारी सेवा शुरू की थी। बाद में पदोन्नति पाते-पाते वे महिला एवं बाल विकास विभाग में संयुक्त संचालक के पद तक पहुंचे, लेकिन लोकायुक्त की शुरुआती जांच में उनकी ज्ञात आय की तुलना में करीब 241 प्रतिशत अधिक संपत्ति मिलने के तथ्य सामने आए हैं।
सूदखोरी का एंगल भी जांच में...सूत्रों का दावा है कि जांच एजेंसियों को ऐसे संकेत भी मिले हैं कि नौकरी के दौरान कंडवाल कथित तौर पर ब्याज पर रुपए भी देते थे। हालांकि इस संबंध में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच टीम इस एंगल को भी गंभीरता से खंगाल रही है।
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