एमवाय अस्पताल के पीछे मस्जिद के नाम पर अवैध निर्माण ध्वस्त: 30 हजार वर्गफीट सरकारी जमीन मुक्त
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से सटे बेहद संवेदनशील क्षेत्र में शनिवार को प्रशासन का बुलडोजर चला। महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवायएच) के पीछे स्थित करोड़ों रुपए मूल्य की करीब 30 हजार वर्गफीट सरकारी भूमि को जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने सुरक्षा के कड़े घेरे के बीच अतिक्रमण मुक्त करा लिया।
कार्रवाई के दौरान परिसर की बाउंड्रीवॉल, टीन शेड और निर्माणाधीन छह आरसीसी कमरों को दो पोकलेन मशीनों की सहायता से जमींदोज कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान वहां रह रहे परिवारों का घरेलू सामान और राशन भी मलबे की चपेट में आ गया, जिसे बाद में लोग मलबे के बीच से निकालते देखे गए।
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह पूरी भूमि नजूल की घोषित है और जूनी इंदौर तहसील के ब्लॉक नंबर 12 (नया सर्वे 38) में दर्ज है। तहसीलदार कोर्ट ने इस जमीन पर वक्फ बोर्ड और प्रबंधन के तमाम दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया था। जांच में यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 1985 में प्रशासन द्वारा केवल 300 वर्गफीट क्षेत्र में निर्माण की अनुमति दी गई थी, लेकिन कालांतर में नियमों को ताक पर रखकर इसे करीब 30 हजार वर्गफीट के विशाल क्षेत्र तक विस्तारित कर लिया गया।
प्रशासन की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि अनुमति के मूल दस्तावेजों में मस्जिद शब्द को अलग लिखावट (हैंडराइटिंग) में बाद में जोड़ा गया था, जिसकी पुष्टि गूगल सैटेलाइट इमेज से भी हुई है। स्थानीय स्तर पर हुई शिकायतों के बाद यह मामला तहसीलदार कोर्ट पहुंचा था, जहां तथ्यों के आधार पर इसे अवैध माना गया और बेदखली के आदेश जारी किए गए।
अलसुबह शुरू हुई कार्रवाई, मलबे के बीच इबादत का जज्बा
कल सुबह करीब 7.30 बजे एसडीएम घनश्याम धनगर, तहसीलदार कमलेश कुशवाहा, एडिशनल डीसीपी रामस्नेही मिश्रा और एसीपी तुषार सिंह के नेतृत्व में 100 निगमकर्मी और 100 से अधिक पुलिस बल मौके पर पहुंचा। शुरुआती विरोध के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाई और अवैध ढांचों को ढहा दिया।
हालांकि जैसे ही प्रशासनिक टीम मौके से रवाना हुई वहां मौजूद लोगों ने व्यवस्था संभाल ली। प्रबंधन समिति के प्रबंधक साबिर हुसैन ने बताया कि तत्काल चार मजदूरों को काम पर लगाया गया और मलबा हटवाया गया ताकि दोपहर 1.30 बजे की जौहर की नमाज पढ़ी जा सके।
बार-बार नोटिस देने के बाद भी नहीं हटा रहे थे अवैध निर्माण
प्रशासन की इस कार्रवाई में केवल बाउंड्रीवॉल ही नहीं, बल्कि वहां बने आवासीय ढांचे भी प्रभावित हुए। मस्जिद कमेटी द्वारा बनाए गए 6 निर्माणाधीन आरसीसी कमरों में इमाम सरफराज खान, इमाम आबिद खान और इमरान खान अपने परिवारों के साथ निवास कर रहे थे। कार्रवाई में इन परिवारों का गृहस्थी का सामान, कपड़े और खाने-पीने की सामग्री मलबे में दब गई।
कार्रवाई थमने के बाद परिजन मलबे को हटाकर अपना बचा हुआ सामान निकालते दिखे। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना था कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को लेकर बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद निर्माण नहीं हटाया गया था, जिसके चलते यह कदम उठाना अनिवार्य था।
शांति और सौहार्द के लिए सात दिन की मोहलत
आगामी धार्मिक त्योहार होली के मद्देनजर शहर में शांति और आपसी सौहार्द बना रहे, इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने फिलहाल मुख्य ढांचे को छोड़ दिया है। एसडीएम घनश्याम धनगर ने स्पष्ट किया है कि शेष अवैध निर्माण हटाने के लिए सात दिन की मोहलत दी गई है ताकि त्योहार के दौरान कानून व्यवस्था और सामाजिक वातावरण प्रभावित न हो।
प्रशासन ने यह कदम संवेदनशीलता और त्योहारों की गरिमा को देखते हुए उठाया है। हालांकि, प्रशासन ने यह कड़ी चेतावनी भी दी है कि यदि इस अवधि के भीतर शेष अतिक्रमण स्वयं नहीं हटाया गया तो प्रशासन पुनः सख्त कार्रवाई कर पूरी 30 हजार वर्गफीट जमीन अपने नियंत्रण में ले लेगा। फिलहाल स्थिति को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और प्रशासनिक अधिकारी हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
पार्षद पंखुड़ी जैन डोसी ने की थी शिकायत
एमवाय परिसर में वर्षों से किए अवैध अतिक्रमण पर आखिरकार प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की। इस पूरे मामले की शुरुआत वार्ड 55 की पार्षद पंखुड़ी जैन डोसी की उस शिकायत से हुई, जिसमें उन्होंने नगर निगम और कलेक्टर को पत्र लिखकर अस्पताल के विस्तार में बाधक बन रहे अवैध निर्माण कार्य पर पार्षद ने तर्क दिया था कि मुख्यमंत्री द्वारा अस्पताल की चिकित्सा सुविधाओं के लिए स्वीकृत 773 करोड़ रुपए के विकास कार्यों में यह कब्जा एक बड़ी रुकावट है। पार्षद की इस शिकायत पर कलेक्टर शिवम वर्मा ने तुरंत संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि वर्ष 1985 में प्रशासन ने केवल 300 वर्ग फीट क्षेत्र में मस्जिद निर्माण की अनुमति दी थी, लेकिन मौके पर करीब 30 हजार वर्ग फीट की सरकारी जमीन पर बाउंड्रीवॉल और अन्य पक्के निर्माण कर कब्जा कर लिया गया था।
तहसीलदार कोर्ट ने दस्तावेजों की हेराफेरी और गूगल सेटेलाइट इमेज के आधार पर इस कब्जे को अवैध घोषित कर दिया। प्रशासन ने पहले मुनादी कर स्वयं अतिक्रमण हटाने का समय भी दिया था।
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