‘सर तन से जुदा’ नारे पर हाईकोर्ट सख्त: कहा-कानून और देश की एकता को चुनौती; तौकीर रजा की जमानत खारिज
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा मामले में मौलाना तौकीर रजा खान और उनके करीबी डॉ. नफीस खान की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ जैसे नारे को लेकर सख्त टिप्पणी की।
जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह का नारा देश के कानून और उसकी एकता को खुली चुनौती देता है तथा लोगों को हिंसा और देश के खिलाफ उकसाने वाला है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे नारे की तुलना ‘जय श्रीराम’, ‘हर हर महादेव’, ‘सत श्री अकाल’ या ‘अल्लाहु-अकबर’ जैसे धार्मिक नारों से नहीं की जा सकती। अदालत ने मामले के तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया।
तौकीर रजा सितंबर 2025 से जेल में
तौकीर रजा बरेली में 26 सितंबर 2025 को हुई हिंसा के मामले में आरोपी है। वह 27 सितंबर 2025 से जेल में बंद है। पुलिस ने उसे मामले का मुख्य आरोपी और कथित मास्टरमाइंड बताया है।
वहीं, तौकीर रजा की ओर से आरोपों से इनकार करते हुए कहा गया है कि उसे राजनीतिक साजिश और रंजिश के चलते फंसाया गया है।
बचाव पक्ष ने कहा- हिंसा के लिए कोई आह्वान नहीं किया
तौकीर रजा के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि मौलाना निर्दोष है और उसने कभी हिंसा का आह्वान नहीं किया। वकील के मुताबिक, घटना के समय तौकीर मौके पर मौजूद भी नहीं था और 26 सितंबर को उसे घर में नजरबंद कर दिया गया था।
बचाव पक्ष ने कहा कि तौकीर ने न कोई भाषण दिया और न ही ऐसी कोई अपील की, जिसे हिंसा, अव्यवस्था या सार्वजनिक शांति भंग करने के लिए उकसाने वाला माना जा सके।
वकील ने यह भी तर्क दिया कि प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने और धारा 163 लागू होने के बाद प्रस्तावित प्रदर्शन का आह्वान वापस ले लिया गया था।
सरकार ने कहा- भीड़ जुटाने का आह्वान किया गया
राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि 19 सितंबर 2025 को एक बैठक के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों से इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में जुटने की अपील की गई थी।
सरकार के मुताबिक, प्रशासन ने BNSS की धारा 163 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद करीब 200 से 250 लोग इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान की ओर बढ़े।
अभियोजन के अनुसार, पुलिस ने भीड़ को रोकने की कोशिश की तो नारेबाजी और पथराव हुआ। इस दौरान पेट्रोल बम से हमला और हवाई फायरिंग किए जाने के भी आरोप हैं। घटना में कई पुलिसकर्मी घायल हुए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
कोर्ट ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने पर जताई सख्ती
हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट, दंगा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले कृत्यों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने तौकीर रजा की ओर से भीड़ जुटाने के आरोप और उसके बाद हुई हिंसा से जुड़े तथ्यों को भी जमानत पर विचार करते समय महत्वपूर्ण माना।
वीडियो और नारेबाजी भी जांच के दायरे में
सरकार की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि घटना के बाद मुख्य आरोपी की ओर से सह-आरोपियों के माध्यम से एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें भीड़ को धन्यवाद और उसकी सराहना की गई। अभियोजन ने इन परिस्थितियों को मामले में आरोपी की भूमिका से जोड़ते हुए जमानत का विरोध किया।
क्या था बरेली हिंसा का पूरा मामला?
26 सितंबर 2025 को बरेली में ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर विवाद को लेकर विरोध-प्रदर्शन की स्थिति बनी थी। तौकीर रजा की ओर से लोगों से इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान में जुटने की अपील किए जाने का आरोप है।
प्रशासन की अनुमति नहीं मिलने और निषेधात्मक आदेश लागू होने के बावजूद भीड़ के जुटने के बाद पुलिस के साथ टकराव हुआ।
अभियोजन के अनुसार, इस दौरान पथराव, पेट्रोल बम से हमला और हवाई फायरिंग की घटनाएं हुईं, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए।
मामले में तौकीर रजा को मुख्य आरोपी बनाया गया और उसके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए गए। गिरफ्तारी के बाद उसने जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
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