जवाबदेही मर चुकी, तभी जिंदा है जहरीली शराब: 20 रुपए सस्ती शराब; 22 जिंदगियों की कीमत पर
KHULASA FIRST
संवाददाता

क्लीनचिट के अगले ही दिन ही लाशों का ढेर
पांच साल, आठ हादसे, सिस्टम फिर वहीं खड़ा
अब तक 24 मौतें, 13 आईसीयू में
सागर के ततरवारा में तैयार होता था जहर, मुरैना तक फैला था नेटवर्क
हेमंत उपाध्याय 99930-99008 खुलासा फर्स्ट, सागर।
जहरीली शराब से मौत का आंकड़ा 24 पहुंच गया है। सोमवार को 9 और जानें गईं, हालांकि सभी मौतों की प्रशासनिक पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच पुलिस के छापों ने तस्करों में ऐसा हड़कंप मचाया कि वे बची शराब ठिकाने लगाने लगे। कहीं पेटियां खेतों में फेंक दीं, कहीं औने-पौने दाम पर बेच दीं तो कहीं क्वार्टर मुफ्त बांटकर भाग गए।
लेकिन जान बचाने के लिए तस्करों ने जिस शराब से पीछा छुड़ाया, वही लोगों के हाथ लग गई। उसे पीने के बाद सोमवार को गूगरा खुर्द में 3 और छापरी में 2 समेत 9 लोगों की मौत सामने आई। बीएमसी में रविवार सुबह से सोमवार शाम तक 140 से ज्यादा मरीज पहुंचे। 50 से ज्यादा का इलाज जारी है, इनमें 13 आईसीयू में हैं। 20 मरीजों को छुट्टी मिली, जबकि सोमवार को 11 का डायलिसिस किया गया।
इधर, एएसपी जयवीर भदौरिया के मुताबिक, मुख्य सरगना चंदू राजा और राघवेंद्र सिंह समेत 30 नामजद आरोपियों में से 14 गिरफ्तार हो चुके हैं। आरोपियों से पैकिंग सामग्री मिली है। पुलिस के मुताबिक, ड्रमों में केमिकल लाकर बंडा के ततरवारा गांव की अवैध फैक्टरी में अलग-अलग ब्रांड की शराब तैयार और पैक की जाती थी। नेटवर्क के तार मुरैना से भी जुड़ने की आशंका है।
शिकायतकर्ता पर एससी-एसटी एट्रोसिटी एक्ट का केस... बरायठा थाना क्षेत्र के अदावन गांव के ब्रजेश महाराज का आरोप है उनके घर के सामने लल्ला बाई लोधी का परिवार अवैध शराब बेचता है। वे दो महीने से पुलिस चौकी से लेकर वरिष्ठ अफसरों तक शिकायत कर रहे हैं।
31 अगस्त को एसपी को दिए सीसीटीवी फुटेज में सुबह और देर रात वाहनों से शराब की पेटियां उतरती दिख रही हैं। एसडीओपी ने कार्रवाई का भरोसा दिया। ब्रजेश का आरोप है कि शिकायत के बाद उनका कैमरा तोड़ दिया गया। जुलाई में भी शिकायत करने पर उनके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट का झूठा केस दर्ज कराया गया था।
आंखों की रोशनी गई... हिनौती के उत्तम अहिरवार (50) को सोमवार को बीएमसी के आईसीयू में भर्ती कराया गया। उन्हें दिखाई देना बंद हो गया। मुंह से खून आने व पेशाब में तकलीफ भी है।एक मरीज ने डॉक्टर को बताया कि शनिवार को शराब पीने के बाद वह दिनभर खेत में पड़ा रहा। रविवार को जहरीली शराब को लेकर मुनादी सुनी तो अस्पताल के लिए निकला। उसका दावा है कि रास्ते में सांप ने काट लिया।
यूपी पुलिस ने एसपी को बताया झूठा.... शराब कांड अब एमपी-यूपी पुलिस के टकराव और सियासी मोड़ पर आ गया है. ललितपुर यूपी के एसपी कालो सिंह ने एसपी अनुराग सुजानिया के जहरीली शराब के ललितपुर से आने के दावे को झूठा बताया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी एसपी अनुराग सुजानिया पर सवाल उठाते हुए हटाने की मांग की है. पटवारी ने कहा 2021 के मुरैना शराब कांड 24 मौतें हुईं थी, तब भी सुजानिया ही एसपी थे. इसके बाद से यह मामला भी चर्चा में आ गया है.
मुरैना में हुईं थी 24 से ज्यादा मौतें.... 2021 में मुरैना जिले में जहरीली शराब से 24 से अधिक मौतें हुई थी। उस समय अनुराग सुजानिया ही जिले के एसपी थे। मामले की जांच के बाद तत्कालीन सरकार ने सुजानिया को पद से हटा दिया था।
मध्यप्रदेश में शिवराज के कार्यकाल में हुए जहरीली शराब कांड में कलेक्टर को हटाया था, सागर में मेहरबानी क्यों?
आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा के गृह जिले मंदसौर में जहरीली शराब कांड से हुई मौत के बाद सरकार ने आबकारी अधिकारियों, जिम्मेदारों पर कार्रवाई करते हुए तत्कालीन कलेक्टर मनोज पुष्प को हटा दिया था। सागर जिले में जहरीली शराब कांड में हुई मौत के बाद मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने कलेक्टर प्रतिभा पाल को अब तक क्यों नहीं हटाया।
सीधे तौर पर आबकारी अधिकारी कलेक्टर के अधीन होता है। आबकारी उपायुक्त की जिम्मेदारी बाद में होती है। ज्ञातव्य है कि उच्च न्यायालय ने आईएएस प्रतिभा पाल की कार्यशैली को लेकर सख्त टिपण्णी की थी, लेकिन उसके बाद भी सरकार ने प्रतिभा पाल को कलेक्टर बनाए रखा।
पति की मौत, अपाहिज पत्नी का बुरा हाल
मरने वालों में खटोरा के 45 वर्षीय भोपाली भी शामिल हैं। उनकी मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। भोपाली मजदूरी करके परिवार का पोषण करते थे। भोपाली घर में अकेले कमाने वाले थे, उनकी पत्नी दिव्यांग है, घर में दो बच्चे भी हैं। भोपाली की मौत के बाद परिवार के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
भोपाली रोज मजदूरी कर जो कमाकर लाता था, उसी से परिवार का खर्च चलता था. भोपाली की मौत के बाद पत्नी और दोनों बच्चों के सामने जीवन-यापन की समस्या खड़ी हो गई। दिव्यांग पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है. वह बलिख कर बार-बार यही कह रही है कि अब बच्चों को कैसे पालूंगी।
हर साल 30 लाख लोगों की लील रही शराब
विश्व स्वास्थ्य संगठनके द्वारा 2024 में जारी वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में होने वाली कुल मौतों का लगभग 4.7% से 5.3% हिस्सा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शराब के सेवन के कारण होता है। इसका सीधा अर्थ है कि वैश्विक स्तर पर होने वाली हर 20 में से 1 मौत की वजह शराब है।
रिपोर्ट के अनुसार, शराब के अत्यधिक सेवन, ड्रंक एंड ड्राइव, इसके कारण होने वाली हिंसा, घरेलू दुर्व्यवहार और गंभीर बीमारियों से हर साल लगभग 26 लाख से 30 लाख लोगों की जान जाती है। वर्ष 2019 के आंकड़ों के मुताबिक, शराब से हुई कुल मौतों में लगभग तीन-चौथाई (75%) हिस्सेदारी पुरुषों की थी।
यह लापरवाही की मौत नहीं
सबसे कड़वा सच यह है इस पूरी त्रासदी में जवाबदेही शब्द ही मर चुका है। अफसर सस्पेंड होते हैं, फिर जांच के बाद बहाल हो जाते हैं, आधा वेतन मिलता है और फिर बकाया एकमुश्त मानो सजा नहीं, छुट्टी दी गई हो। जब तक जिम्मेदारों पर हत्या जैसी गंभीर धाराएं नहीं लगेंगी, तब तक यह चक्र नहीं टूटेगा। यह लापरवाही की मौत नहीं है। यह लापरवाही के कारण की गई हत्या है, और इसे उसी नजर से देखा जाना चाहिए।
बीस रुपयों के लालच में... मेथेनॉल की मिलावट वाली यह शराब 20 रुपए सस्ती बेची गई। 20 रुपए के लालच में 22 जिंदगी खरीद ली गईं। यह सिर्फ एक ठेकेदार या एक दुकानदार की कहानी नहीं, यह उस पूरी जंजीर की कहानी है जो लाइसेंसी ठेकेदारों से लेकर आबकारी विभाग तक फैली है, और जिसका हर कड़ी जानती-बूझती चुप है।
सवाल वहीं खड़ा रहेगा... चिताएं बुझ जाएंगी, राख धीरे-धीरे ठंडी हो जाएगी, लेकिन सवाल वहीं खड़ा रहेगा। अगली बार किस शहर की बारी है? जब तक जहरीले सिस्टम का इलाज नहीं होगा, जहरीली शराब का बिकना बंद नहीं होगा। और तब तक हर मौत सिर्फ एक आंकड़ा बनकर रह जाएगी, न्याय की फाइल में दबी हुई एक और तारीख।
सागर की मिट्टी लाशों के बोझ तले दब गई। अब तक 22 मौतें, 112 अस्पताल में तड़पते लोग, और गांव की गलियों में बिखरी शराब की खाली बोतलें - यह किसी हादसे की तस्वीर नहीं, बल्कि एक पूरी व्यवस्था के मुंह पर लगा तमाचा है। पिता-पुत्र एक साथ चिता पर चढ़े, तीन भाइयों में से एक ने दम तोड़ा, और एक मां अपने ही घर में अकेली बैठी शराब मंगवाकर काल के गाल में समा गई। यह सिर्फ आंकड़े नहीं, टूटे हुए घर हैं।
सबसे तकलीफदेह यह है त्रासदी अनजाने में नहीं आई। मीडिया ने दो दिन पहले ही आगाह किया था इस ब्रांड की शराब पीने लायक नहीं है। और सिस्टम ने जवाब में क्या किया? क्लीनचिट दे दी। एक दिन की क्लीनचिट और उसके अगले ही दिन एक दर्जन से ज्यादा लाशें। यह लापरवाही नहीं, यह अपराध है और अपराध की सजा सस्पेंशन नहीं, जवाबदेही होनी चाहिए।
यह पहली बार नहीं हुआ
आंकड़े बता रहे हैं पहली बार नहीं हुआ। पांच साल में आठवीं बार मध्य प्रदेश जहरीली शराब से लाशें गिनने पर मजबूर हुआ है। अतीत के पन्ने पलेटिए- 2020, 2021, 2022, 2023। हर साल एक नया शहर, एक नया आंकड़ा, एक जैसी कहानी। सबसे चौंकाने वाला संयोग यह सागर के मौजूदा एसपी 2021 में मुरैना में भी तैनात थे, जब वहां 24 लोगों की जान इसी तरह गई थी। सवाल यह नहीं कि गलती किसकी है । सवाल यह है कि इतने साफ पैटर्न के बावजूद सिस्टम ने सबक क्यों नहीं सीखा।
राज नहीं, बल्कि गांव-गांव का सच
जानकारों का स्पष्ट मत है कि शराब का अवैध कारोबार पुलिस और आबकारी विभाग की जानकारी के बिना नहीं चल सकता। यह कोई राज नहीं, बल्कि गांव-गांव का सच है। ग्रामीण नाम लेने से डरते हैं, क्योंकि दहशत का साम्राज्य वहीं बसा है जहां प्रशासन की आंखें बंद रहती हैं। जब जनता खुद कह रही हो कि पुलिस भी कार्रवाई से कतराती है, तो यह मान लेना गलत नहीं कि यह लापरवाही नहीं, मिलीभगत है।
जवाबदेही किसी के हिस्से में नहीं आती
फिर शुरू होता है वही पुराना तमाशा। राजनीति का दोषारोपण। एक नेता एसपी पर एफआईआर मांगता है, दूसरा दावा करता है मौतों का आंकड़ा पचास पार है, तीसरा नेटवर्क का कनेक्शन किसी शहर को बताता है, तो कोई पुरानी दवाओं और पानी की मिलावट तक जोड़कर पूरी सरकार को कठघरे में खड़ा करता है।
हर बयान में सच्चाई का एक टुकड़ा है, लेकिन जवाबदेही किसी के हिस्से में नहीं आती। नेताजी, जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचते हैं, फोटो खिंचती है, सांत्वना बंटती है और अगली सुर्खी तक सब भुला दिया जाता है।
संबंधित समाचार

दुबई में मुख्यमंत्री ने की निवेशकों से मुलाकात:ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए दिया न्योता; बोले- AI सहित कई सेक्टर पर नजर

मानहानि केस में इनकी याचिका खारिज:समन रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार; छह हफ्ते की राहत

ट्रैफिक पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी:कोर्ट के सामने ही दिखे हूटर-सायरन और गलत नंबर प्लेट वाले वाहन; सड़कों पर नजर नहीं आ रहा काम

लोधिया कुंड में डूबने के कारण भाई-बहन की मौत:चेतावनी बोर्ड फटा होने से हादसे की आशंका

जमीन विवाद:पूर्व महिला अफसर समेत 3 आरोपियों की अग्रिम जमानत खारिज; संपत्ति कुर्की की मांग

जिलाबदर के आदेश को ठेंगा दिखाकर घूम रहा था सादिक काला:पुलिस ने धर दबोचा; हत्या सहित दो दर्जन से ज्यादा अपराध पहले से हैं दर्ज

क्राइम ब्रांच ने धर दबोचा फर्जी सिम एक्टिवेशन का खिलाड़ी:मोबाइल दुकान का संचालक है आरोपी; ग्राहकों के दस्तावेजों का करता था दुरुपयोग

नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई:215 लीटर कच्ची शराब और 3300 किलो महुआ लहान जब्त; लाखों का माल पकड़ा

खाता दीपक का, सिम गौरव की और खाते में डलते रहे ठगी के रुपए:तमिलनाडु से बिहार तक 14 राज्यों की साइबर ठगी से कनेक्शन

देखिए वीडियो:बाइक की पिछली सीट पर फन फैलाए बैठी थी नागिन; पीछे मुड़कर देखा तो उड़े होश, कराया रेस्क्यू

लाभकारी मूल्य की मांग:किसान करेंगे देशव्यापी आंदोलन फिर उठी लागत के आधार पर

साइबर ठगी से लेकर ट्रैफिक मैनेजमेंट तक बेहतर काम करने वाले 20 पुलिसकर्मी सम्मानित:कमिश्नर ने किया पुरस्कृत

‘सर तन से जुदा’ नारे पर हाईकोर्ट सख्त:कहा-कानून और देश की एकता को चुनौती; तौकीर रजा की जमानत खारिज

जिम 365 डिग्री के 5 ठिकानों पर सेंट्रल जीएसटी का छापा:एक करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी का खुलासा

लॉकडाउन में शादियां बंद:कागजों में बंट गए करोड़ों; विवाह सहायता घोटाले में मिले अहम सुराग

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का निधन:नया दायित्व संभालने से पहले आया हार्ट अटैक; प्रशासनिक गलियारों में शोक की लहर

देखिए वीडियो:सूने घरों को बनाते थे निशाना; सीसीटीवी ने पहुंचाया आरोपियों तक: 2 बदमाश गिरफ्तार, लाखों के सोने के जेवर जब्त

खतरनाक ड्राइविंग पर सख्ती:इतने वाहन चालकों पर FIR; अब लाइसेंस भी होंगे सस्पेंड, ड्रोन से भी निगरानी

जनसुनवाई में युवक ने खुद पर डाला केरोसिन:आत्मदाह की कोशिश से मचा हड़कंप; सुरक्षाकर्मियों ने बचाया

यहां कमर्शियल गतिविधियों पर रोक की मांग:सीएस, कलेक्टर और निगमायुक्त को ‘डिमांड ऑफ जस्टिस’ नोटिस
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!