गैस कटर की धार से टुकड़ों में बदल रही कारें: कबाड़ के कारोबार पर उठे सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

चंदन नगर से बांक-सिंहासा तक पुराने और दूसरे राज्यों के वाहनों की कटिंग का खेल!
प्रितेश जैन 93007-12345 खुलासा फर्स्ट...इंदौर।
सड़क पर दौड़ने की उम्र पूरी कर चुके वाहनों को कबाड़ में बदलना कानून की नजर में महज लोहे का कारोबार नहीं है। वाहन को स्क्रैप करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया है, जिसमें वाहन के दस्तावेजों का सत्यापन, पंजीयन रिकॉर्ड, नो ड्यूज, अधिकृत रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फेसिलिटी (आरवीएसएफ), सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट और अंतिम रूप से सर्टिफिकेट ऑफ व्हीकल स्क्रैपिंग जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
इसके बावजूद इंदौर के कुछ इलाकों में जिस तरह चार पहिया वाहनों को कथित तौर पर काटकर ठिकाने लगाने की जानकारी सामने आ रही है, उसने परिवहन विभाग से लेकर पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रदेश में सामान्य निजी वाहनों के पंजीयन की प्रारंभिक अवधि 15 वर्ष होती है, जिसके बाद निर्धारित शर्तों के अधीन पंजीयन का नवीनीकरण कराया जा सकता है, लेकिन वाहन की अवधि समाप्त होना इस बात का लाइसेंस नहीं है कि उसे कोई भी कबाड़ी अपने गोदाम में ले जाकर गैस कटर से काट दे।
चंदन नगर इलाका कहीं ‘कटिंग जोन’ तो नहीं?... चंदन नगर थाना क्षेत्र में पुराने चार पहिया वाहनों को बड़े पैमाने पर डिस्मेंटल किए जाने की शिकायतें और स्थानीय स्तर पर मिली जानकारियां गंभीर पड़ताल की मांग कर रही हैं। आरोप है कि कारें और अन्य वाहन इन ठिकानों पर पहुंचते हैं, जहां कुछ ही घंटों में उनके इंजन, बॉडी, टायर, कांच और दूसरे कलपुर्जे अलग कर दिए जाते हैं। इसके बाद पूरी गाड़ी मानों हवा हो जाती है। कुछ सामान एक व्यापारी के यहां, कुछ दूसरे शहर और कुछ दूसरे राज्य तक पहुंचा दिया जाता है।
इन वाहनों का सरकारी रिकॉर्ड कहां?
सवाल ये है कि क्या ये वाहन अधिकृत आरवीएसएफ में जमा हुए थे? क्या इनके लिए सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट जारी हुआ? क्या संबंधित आरसी विधिवत निरस्त हुआ और क्या सर्टिफिकेट ऑफ व्हीकल स्क्रैपिंग जारी किया गया?
यदि इन सवालों के जवाब दस्तावेजों में नहीं हैं, तो फिर खुलेआम हो रही वाहन कटिंग की गतिविधि पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
बांक-सिंहासा में दूसरे राज्यों की गाड़ियों की आमद... बांक और सिंहासा पंचायत क्षेत्रों में भी कबाड़ कारोबार से जुड़े कुछ ठिकानों पर दूसरे राज्यों से वाहन लाकर काटे जाने की जानकारी सामने आई है। यदि दूसरे राज्यों से रोजाना दर्जनों वाहन इंदौर आ रहे हैं, तो परिवहन विभाग और पुलिस के पास इनके दस्तावेज, स्वामित्व और वाहन पहचान का रिकॉर्ड होना चाहिए।
स्थानीय स्तर पर अब्दुल करीम से जुड़े बताए जा रहे एक गोदाम को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां बड़ी संख्या में वाहनों के कटे हुए हिस्से मौजूद होने की जानकारी है। आरोप है कि पीथमपुर के कारोबारियों तक इन वाहनों के कलपुर्जे पहुंचाए जाते हैं। वहीं अयान और फरहान के चंदन नगर क्षेत्र में वाहन काटने की गतिविधियों से जुड़े होने की भी जानकारी सामने आई है। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही संभव है, लेकिन यदि मौके पर बड़ी संख्या में कटे हुए वाहन और उनके हिस्से मौजूद हैं, तो यह परिवहन विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच के लिए पर्याप्त कारण जरूर है।
एक और नाम- कालू सुरमा... इसी इलाके में चार पहिया वाहनों के कथित डिस्मेंटलिंग कारोबार से जुड़े एक अन्य नाम कालू सुरमा का भी सामने आया है। पड़ताल में मिली जानकारी के अनुसार कालू का साला मालेगांव में रहता है, जो उसे कारोबार में मदद करता है। वह मुंबई के अलग-अलग इलाकों से कार एवं अन्य वाहनों को इंदौर लाने के नेटवर्क से जुड़ा बताया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक इन वाहनों को पहले कुछ समय खाली प्लॉट अथवा सुनसान स्थानों पर रखा जाता है, फिर धीरे-धीरे उनके कलपुर्जे अलग-अलग ठिकानों पर भेज दिए जाते हैं। इंजन दिल्ली और गुजरात भेजे जाने तथा प्लास्टिक व अन्य सामग्री पीथमपुर पहुंचाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। यदि यह जानकारी सही है, तो मामला सिर्फ स्थानीय कबाड़ कारोबार का नहीं रह जाता, बल्कि अंतरराज्यीय वाहन सप्लाई और पार्ट्स नेटवर्क की जांच का विषय है।
चंद घंटों में वाहन और उसकी पहचान खत्म... इस कथित कारोबार का सबसे चिंताजनक पहलू इसकी तेजी है। आरोप है कि कुछ ही घंटों में पूरी कार को इस तरह अलग-अलग हिस्सों में बदल दिया जाता है कि मूल वाहन की पहचान करना मुश्किल हो जाए। यहीं पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। क्या इन वाहनों के चेसिस और इंजन नंबर रिकॉर्ड से मिलाए गए? क्या चोरी के वाहनों के रिकॉर्ड से जांच की गई? क्या दुर्घटना या अपराध में इस्तेमाल वाहनों की जानकारी से इनका मिलान हुआ? यदि कोई वाहन चोरी का हो, अपराध में इस्तेमाल हुआ हो अथवा उस पर किसी बैंक/फाइनेंस कंपनी का दावा हो और उसे बिना वैधानिक प्रक्रिया के काट दिया जाए, तो मामला बेहद गंभीर हो सकता है।
पर्यावरण के नियम भी कट रहे... वाहन काटते समय सिर्फ लोहा नहीं निकलता। इंजन ऑयल, ईंधन, कूलेंट, बैटरी, रेफ्रिजरेंट, टायर, प्लास्टिक और ई-वेस्ट भी निकलते हैं। इनके निस्तारण के लिए पर्यावरणीय नियम निर्धारित हैं। इसलिए ऐसे किसी भी परिसर की जांच में यह देखना जरूरी है कि उसके पास एमपीपीसीबी का कंसेंट टू एस्टेब्लिश, कंसेंट टू ऑपरेट और जहां लागू हो हैजार्ड्स वेस्ट अथॉराइजेशन है या नहीं। इस्तेमाल किया गया तेल, बैटरी और अन्य हैजार्ड्स मटेरियल किस अधिकृत एजेंसी को दिया जाता है, इसका रिकॉर्ड भी जांचा जाना चाहिए।
चंद घंटों में गाड़ी के पुर्जे पहुंच जाते हैं अलग-अलग ठिकानों पर
सुरमा और इत्र बेचकर कैसे बना ली लाखों की संपत्ति?
खुलासा फर्स्ट पड़ताल के दौरान कालू सुरमा की आर्थिक गतिविधियों और संपत्ति को लेकर भी कई जानकारियां सामने आई हैं। स्थानीय जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 तक कर्बला मैदान में वह सुरमा, मंजन और इत्र बेचता था। इसके बाद उसकी आर्थिक स्थिति में तेजी से बदलाव और संपत्ति अर्जित करने की चर्चा है। एक अवैध कॉलोनी में उसके नाम से बताए जा रहे व्यावसायिक प्लॉट की वर्तमान कीमत करीब 90 लाख रुपए होने की जानकारी सामने आई है। हाल ही जिलाबदर किए गए फारुख लंबू से उक्त संपत्ति के संबंध की भी चर्चा है। राधा नगर स्थित गोदाम से कारोबार संचालित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
प्रशासन के सामने अब कुछ सीधे सवाल
यदि कारोबार वैध है, तो हर वाहन की पहचान और उसका दस्तावेजी रिकॉर्ड सामने क्यों नहीं आना चाहिए?
यदि वाहन आरवीएसएफ प्रक्रिया से स्क्रैप किए जा रहे हैं, तो सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट और सर्टिफिकेट ऑफ व्हीकल स्क्रैपिंग कहां है?
यदि ये सर्टिफिकेट नहीं हैं, तो फिर इनके परिसरों में बड़े पैमाने पर वाहन कैसे काटे जा रहे हैं?
दूसरे राज्यों से आने वाली गाड़ियों की जांच कौन करता है?
चंदन नगर, बांक, सिंहासा और राधा नगर में चलती बताई जा रही इन गतिविधियों पर पुलिस, आरटीओ और प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने अब तक कितनी कार्रवाई की?
प्रशासन के लिए अब सिर्फ यह कहना पर्याप्त नहीं होगा कि जांच की जाएगी, बल्कि जरूरत है कि मौके पर मौजूद वाहनों के चेसिस व इंजन नंबर, वाहन रिकॉर्ड, आरसी, आरवीएसएफ रजिस्ट्रेशन, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट, आरसी कैंसिलेशन और सर्टिफिकेट ऑफ व्हीकल स्क्रैपिंग का मिलान कराया जाए, क्योंकि सवाल सिर्फ पुरानी कारों के कबाड़ में बदलने का नहीं, सवाल यह है कि कहीं गैस कटर की धार के साथ वाहन की पहचान, सरकारी रिकॉर्ड और संभावित अपराध के सबूत भी तो नहीं मिटाए जा रहे?
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