पहले निर्माण फिर गतिविधि पर थमाया नोटिस: एमआईसी मेंबर उदावत के दबाव में निगम का कारनामा
KHULASA FIRST
संवाददाता

विधवा के फ्लैट को लेकर निगम का दोहरा रवैया, कागजों में उलझाकर सील किया फ्लैट
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
निगम के वार्ड 49 के पार्षद एवं एमआईसी सदस्य राजेश उदावत के कथित दबाव और निगम प्रशासन की संदिग्ध कार्यप्रणाली की परतें अब आधिकारिक दस्तावेजों से खुलने लगी हैं। तिलक नगर स्थित मंगल श्री अपार्टमेंट के ब्लॉक जी-1 में रहने वाली पीड़ित विधवा महिला पिंकी पति रूपेश बौरासी के फ्लैट को सील करने की पूरी पटकथा नगर निगम के जोन 10 कार्यालय द्वारा जारी विरोधाभासी नोटिसों से साफ बयां हो रही है।
जिस तरह से प्रशासनिक तंत्र ने बिना किसी पारदर्शी जांच के एक असहाय महिला के आशियाने को निशाना बनाया और कार्रवाई को अंजाम दिया, उसने निगम की निष्पक्षता और कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
बेटी के क्लिनिक के लिए लेना चाहते थे फ्लैट... पीड़ित महिला की ओर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंड पीठ में दायर याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने सितंबर 2025 में कर्ज लेकर मंगल श्री अपार्टमेंट में यह फ्लैट खरीदा था।
फ्लैट लेने के बाद अपने और अपने दो मासूम बच्चों की जीविकोपार्जन के लिए वहां ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण केंद्र संचालित करना शुरू किया था। याचिका में उल्लेख किया गया है कि एमआईसी मेंबर राजेश उदावत यह फ्लैट अपनी डॉक्टर बेटी के क्लिनिक के लिए प्राप्त करना चाहते थे।
जब इस सौदे को लेकर बात नहीं बनी और महिला ने फ्लैट खरीद लिया तो उसके बाद से ही उन पर दबाव बनाने और फ्लैट खाली कराने की साजिश रची जाने लगी।
सीलिंग कार्रवाई में मेरी कोई भूमिका नहीं
शहर के मंगल श्री अपार्टमेंट में हुई सीलिंग कार्रवाई में मेरी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भूमिका नहीं है। अपार्टमेंट के रहवासियों ने स्वयं निगम आयुक्त की जनसुनवाई में पहुंचकर आवासीय परिसर में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
रहवासियों की शिकायत के आधार पर ही निगम प्रशासन और जोन 10 के भवन अधिकारी ने नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। फ्लैट खरीदने अथवा पुत्री के क्लिनिक के लिए दबाव बनाने संबंधी लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से झूठे और राजनीतिक छवि को धूमिल करने की नीयत से प्रेरित हैं।
मामला अब उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है और हम अपना पक्ष विधि अनुसार अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। - राजेश उदावत, एमआईसी सदस्य, योजना एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, नगर निगम इंदौर
कलेक्टर से की शिकायत
इस एकतरफा और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की शिकायत पीड़ित महिला द्वारा कलेक्टर शिवम वर्मा से भी की गई थी, लेकिन प्रशासनिक तंत्र से राहत मिलने से पहले ही निगम की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फ्लैट सील कर दिया।
अब यह पूरा मामला हाईकोर्ट की शरण में है, जहां अधिवक्ता अजय मिश्रा द्वारा प्रस्तुत तर्कों के आधार पर जस्टिस संदीप भट्ट की एकलपीठ ने एमआईसी मेंबर राजेश उदावत, निगम आयुक्त और जोन 10 के भवन अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। उच्च न्यायालय के इस कड़े रुख के बाद से निगम प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधि की भूमिका को लेकर शहर के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा गर्म है।
व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने का दिया दूसरा नोटिस
इसके बाद अपनी ही गलती पर पर्दा डालने और किसी भी तरह पीड़ित महिला को परेशान करने की नीयत से नगर निगम ने ठीक दो महीने बाद रुख बदलते हुए दूसरा नोटिस दिनांक 27 जून को थमा दिया। इस अधिभोग परिवर्तन संबंधी सूचना पत्र में पूर्व के अवैध निर्माण वाले नोटिस को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया और एक नया कारण गढ़ा गया।
इस नोटिस में कहा गया कि फ्लैट में रहवासी हेतु स्वीकृत अनुज्ञा का उल्लंघन कर व्यावसायिक गतिविधि ब्यूटी पार्लर संचालित की जा रही है। नोटिस में मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के उपनियम 11 का उल्लंघन बताते हुए 10 दिन के भीतर व्यावसायिक गतिविधि बंद करने की सख्त चेतावनी दी गई।
लिपिकीय गलती मानकर मामले को दबाने का किया प्रयास
प्रशासनिक स्तर पर दबाव के खेल का खुलासा तब हुआ जब निगम के जोन 10 के भवन अधिकारी द्वारा पहला नोटिस 26 अप्रैल को जारी किया गया। इस आधिकारिक सूचना पत्र में मध्यप्रदेश नगर पालिका निगम अधिनियम 1956 एवं मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के प्रावधानों का हवाला देते हुए महिला को स्वीकृति के विपरीत निर्माण एवं अधिभोग करने का दोषी ठहराया गया।
नोटिस में तीन दिन के भीतर भू-स्वामित्व, भवन अनुज्ञा स्वीकृति और स्वीकृत मानचित्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। हकीकत यह थी कि महिला ने बहुमंजिला इमारत में बना बनाया फ्लैट खरीदा था और उसमें किसी भी प्रकार का नया या अवैध निर्माण कराया ही नहीं गया था। जब महिला ने इस संबंध में जवाब प्रस्तुत किया, तो निगम अमले ने इसे लिपिकीय गलती मानकर मामला दबाने का प्रयास किया।
11 जुलाई को सील कर दिया फ्लैट... इन सरकारी दस्तावेजों का क्रम यह साफ दर्शाता है कि नगर निगम का अमला किसी भी सूरत में महिला के फ्लैट पर दंडात्मक कार्रवाई करने का मन बना चुका था। पहले अवैध निर्माण का मनगढ़ंत आधार बनाया गया और जब वह वैधानिक धरातल पर टिक नहीं सका, तो व्यावसायिक गतिविधि का नया पैंतरा अपनाकर 11 जुलाई को फ्लैट को सील कर दिया गया।
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