IAS अफसर की कोर्ट का फर्जी आदेश: हाईकोर्ट में पेश कर जमीन कब्जाने की कोशिश; वकील और कंपनी जांच के घेरे में
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में जमीन कब्जाने की कोशिश का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक तंत्र को भी चौंका दिया है। 2012 बैच के सीनियर IAS अधिकारी और अपर आयुक्त तरुण भटनागर की कोर्ट के नाम से फर्जी आदेश तैयार किया गया।
अर्जेंट सुनवाई में पेश किया गया आदेश
मामला यहीं नहीं रुका, इस आदेश को रविवार को हाईकोर्ट की अर्जेंट सुनवाई में पेश किया गया और इसके आधार पर जमीन का कब्जा दिलाने के लिए तहसीलदार स्तर पर कार्रवाई भी शुरू हो गई। कलेक्ट्रेट से अधिकारियों का दल तक गठित कर दिया गया था।
संभागायुक्त कार्यालय में मचा हड़कंप
मामला सामने आने के बाद संभागायुक्त कार्यालय में हड़कंप मच गया। शुरुआती जांच में आदेश फर्जी पाए जाने के बाद अब इसे तैयार करने और इस्तेमाल करने वालों की भूमिका की जांच की जा रही है।
खजराना की जमीन को लेकर चल रहा विवाद
पूरा विवाद खजराना स्थित सर्वे नंबर 388/2/14 की करीब 5 हजार वर्गफीट जमीन को लेकर है। जमीन को लेकर पुष्परतन रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अंकित जैन की कंपनी और राजीव अग्निहोत्री के बीच सौदे को लेकर विवाद चल रहा है।
मामला मध्यस्थ कोर्ट तक पहुंच चुका है। इसी जमीन पर लक्ष्मीबाई नाम की महिला झोपड़ी बनाकर रह रही है। कंपनी की ओर से उसे हटाने के लिए पहले तहसीलदार कोर्ट में मामला लगाया गया था।
पहले तहसीलदार और फिर अपील कोर्ट से खारिज हुआ केस
कंपनी ने वर्ष 2023 में झोपड़ी हटाने और कब्जा लेने के लिए तहसीलदार कोर्ट में याचिका दायर की थी। जमीन से जुड़ा विवाद पहले से मध्यस्थता में होने के कारण तहसीलदार कोर्ट ने कंपनी का दावा खारिज कर दिया।
कंपनी की याचिका निरस्त कर दी
इसके बाद 2024 में एसडीओ जूनी इंदौर की अपील कोर्ट ने भी कंपनी की याचिका निरस्त कर दी। इसके बाद मामला अपर आयुक्त तरुण भटनागर की कोर्ट में पहुंचा। इसी बीच 20 अप्रैल 2026 का एक कथित आदेश सामने आया, जिसमें निचली अदालतों के फैसले पलटते हुए कंपनी को जमीन का कब्जा देने की बात कही गई थी।
आदेश में लक्ष्मीबाई के पास जमीन से जुड़े दस्तावेज नहीं होने का हवाला देकर उनका कब्जा अमान्य बताया गया था।
फर्जी आदेश के आधार पर कब्जे की तैयारी
मामले में एक अधिवक्ता की भूमिका भी जांच के घेरे में है। आरोप है कि अधिवक्ता आशीष अग्रवाल की ओर से इस आदेश की सत्यापित कॉपी अधिकारियों को उपलब्ध कराई गई। इसके बाद कलेक्ट्रेट स्तर पर अधिकारियों से संपर्क कर आदेश का पालन कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
20 अगस्त को तहसीलदार जूनी इंदौर ने जमीन का कब्जा दिलाने के लिए एक दल गठित कर दिया। यानी फर्जी आदेश के आधार पर प्रशासनिक कार्रवाई लगभग शुरू हो चुकी थी।
हाईकोर्ट की सुनवाई में खुला राज
मामले में उस वक्त बड़ा मोड़ आया, जब रविवार को हाईकोर्ट में हुई अर्जेंट सुनवाई के दौरान यही आदेश पेश किया गया। आदेश की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने इसकी जांच कराई। जांच में आदेश फर्जी पाया गया।
इसके बाद अधिकारियों ने संबंधित अधिवक्ता से आदेश मिलने का स्रोत पूछा। जांच में सत्यापित कॉपी आशीष अग्रवाल की ओर से दिए जाने की बात सामने आई। अब उनकी भूमिका की जांच के साथ तलाश भी की जा रही है।
संभागायुक्त बोले- शुरुआती जांच में आदेश फर्जी
संभागायुक्त IAS भास्कर लक्षकार ने कहा कि शुरुआती जांच में अपर आयुक्त की कोर्ट के नाम से सामने आया आदेश फर्जी पाया गया है। उन्होंने बताया कि मामले की अपील की सुनवाई अभी चल रही है और प्रशासन की ओर से आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
हाईकोर्ट ने लक्ष्मीबाई की याचिका खारिज की
इसी मामले की अर्जेंट सुनवाई में हाईकोर्ट ने पुराने आदेशों और विवाद की स्थिति को देखते हुए कहा कि चौकीदार को जमीन पर कब्जे का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने माना कि विवाद मूल रूप से दो जमीन मालिकों के बीच का है। इसी आधार पर लक्ष्मीबाई की याचिका खारिज कर दी गई।
IAS तरुण भटनागर ने भी बताया आदेश फर्जी
अपर आयुक्त तरुण भटनागर ने मामले में कहा कि प्रकरण अभी उनकी कोर्ट में विचाराधीन है और सामने आया आदेश फर्जी है। उनके अनुसार प्रशासन से इस संबंध में रिपोर्ट मिली है और उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अपर आयुक्त की कोर्ट के नाम से यह फर्जी आदेश किसने तैयार किया, उसे सत्यापित कॉपी के रूप में अधिकारियों तक कैसे पहुंचाया गया और हाईकोर्ट में इसे पेश करने से पहले इसकी जांच क्यों नहीं हुई। इन सभी पहलुओं की जांच के बाद मामले में और भी नाम सामने आने की संभावना है।
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