जिम्मेदार बने धृतराष्ट्र: देवगुराड़िया बायपास पर जानलेवा गड्ढे; नगर निगम और नेशनल हाईवे के बीच उलझा जनता का दर्द, कमिश्नर क्षितिज सिंघल के आदेश भी फाइलों में दफन
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देवगुराड़िया बायपास ब्रिज के पास सड़कों की हालत बदतर हो चुकी है। ब्रिज के ठीक पास और इसके आसपास की सड़कों पर इस समय इतने बड़े और गहरे गड्ढे हो चुके हैं कि वे किसी भी वक्त बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं।
इस मार्ग का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि देवगुराड़िया बायपास से मुंबई-आगरा, भोपाल, नेमावर, बैतूल, नागपुर और रायपुर तक के भारी और हल्के वाहन चौबीसों घंटे गुजरते हैं। हर दिन हजारों वाहनों की आवाजाही वाले इस मुख्य अंतरराज्यीय मार्ग पर सफर करना अब जानलेवा साबित हो रहा है।
इन गड्ढों के कारण आए दिन दोपहिया वाहन चालक फिसलकर गिर रहे हैं, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं और कभी भी कोई बड़ी जनहानि हो सकती है।
नगर निगम और नेशनल हाईवे के बीच तालमेल की कमी
इस पूरी बदहाली के पीछे सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर जनता की जान से खिलवाड़ करने वाले इन गड्ढों के लिए जिम्मेदार कौन है। स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों में नगर निगम प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है।
लोगों का सीधा आरोप है कि नगर निगम और नेशनल हाईवे के बीच तालमेल की कमी और लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। टैक्स भरने के बावजूद जनता को ऐसी जानलेवा सड़कें मिल रही हैं, जो सीधे तौर पर प्रशासनिक नाकामी का खुलासा करती हैं। बारिश होते ही इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे वाहन चालकों को इनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता और वे सीधे दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
जमीनी हकीकत कमिश्नर के दावों और निर्देशों के विपरीत
इस पूरे मामले में नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने शहर की देवगुराड़िया बायपास सहित अन्य गड्ढेदार सड़कों को लेकर सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने पिछले दिनों ही मातहत अधिकारियों की बैठक लेकर इन बदहाल सड़कों को दुरुस्त करने और त्वरित पैचवर्क के निर्देश जारी किए थे।
कमिश्नर ने स्पष्ट कहा था कि मुख्य मार्गों और बायपास से जुड़ने वाली सड़कों पर जलजमाव और गड्ढों की समस्या को तुरंत दूर किया जाए। लेकिन जमीनी हकीकत कमिश्नर के इन दावों और निर्देशों के विपरीत है। कमिश्नर क्षितिज सिंघल के आदेशों के बावजूद निचले स्तर के अधिकारी और ठेकेदार मौके से गायब हैं और देवगुराड़िया ब्रिज के पास स्थिति जस की तस बनी हुई है।
घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल
तकनीकी जानकारों का कहना है कि इन गड्ढों के बार-बार बनने का मुख्य कारण घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल और जल निकासी की सही व्यवस्था न होना है। जब तक देवगुराड़िया बायपास और ब्रिज के पास पानी निकासी के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते और डामरीकरण की गुणवत्ता नहीं सुधारी जाती, तब तक करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी जनता को इन गड्ढों से मुक्ति नहीं मिलने वाली है।
लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों पर सीधी कार्रवाई हो
नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल को स्वयं मैदानी निरीक्षण कर उन लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों पर सीधी कार्रवाई करनी होगी, जो उनके आदेशों को हल्के में ले रहे हैं। जनता को अब सड़कों का सुधार चाहिए, ताकि उन्हें इन गड्ढामुक्त और सुरक्षित सड़कों पर चलने का अधिकार मिल सके। अब देखना यह है कि इस गंभीर लापरवाही पर नगर निगम प्रशासन कब जागता है और कब देवगुराड़िया बायपास को इस जानलेवा संकट से मुक्ति मिलती है।
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