लौट आओ... मेघराज: एक-दो दिन में फिर बारिश के आसार; बारिश की खेंच से किसान चिंतित, सोयाबीन फसल पर असर
KHULASA FIRST
संवाददाता

जुलाई की शुरुआत में झमाझम बरसकर एकाएक गुम हो गए नीर भरे बादल
रोज उमड़-घुमड़ रहे स्याह मेघ, पर नहीं बरसे, इंदौरी तरसे
स्याह घटाटोप, ठंडी हवा के बावजूद उमस से बेहाल जनजीवन
करीब एक पखवाड़े से नहीं बरसा पानी, तापमान 34 डिग्री तक उछला
मौसम विभाग ने किया दावा- रविवार से बारिश का नया सिस्टम होगा सक्रिय
पहली बारिश में ही बोवनी करने वाले माटी पुत्रों की पेशानी पर उभरी चिंता की लकीरें
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मेघराज! तुम जहां भी हो, लौट आओ। तुम बिन सकल चराचर जगत के हाल बेहाल हैं। मालवी मनुहार से रीझकर तुम सही समय पर आ गए थे। तुम्हारे आगमन से मन-मयूर कुलांचें मारने लगा था। तुमने भी निराश नहीं किया।
अपने दामन में भरकर लाए तमाम निर्मल नीर की एक-एक बूंद धरा पर निचोड़ दी। सूखी, तपती, जलती धरा तुम्हारे बरसाए इस नेह से गद्गद् हो गई, लेकिन अभी वसुंधरा की तपन व तृप्ति शांत नहीं हुई है। अपने हिस्से के नीर की एक किस्त से भला इस मालवे का क्या होना? उसे तो ऐसी दर्जनभर से ज्यादा किस्तें चाहिए।
वह भी अगर एकमुश्त मिल जाएं तो बात ही क्या? वो माटी पुत्र किसान भी अब तो चिंता से घिर गया है, जिसने तुम्हारी मौजूदगी को जान धरती के उदर में बीज बो दिया था। ऐसे में तुम्हारा लौट जाना और अब तक न आना हम सबको चिंता में डाल रहा है। तुम कहीं भी हो मेघराज, अब मत सताओ, लौट आओ।
12-15 दिन होने को आए, हमसे दूर गए। स्याह-घूसर बादलों के रूप में तुम अपने दूत तो रोज भेज रहे, लेकिन वे रीते ही विदा हो रहे हैं। तुम बिन अब भी रीते हैं ताल-तलैया, नदी-सरोवर, कूप-नलकूप। तो हे मेघराज! जन-जन की सुनो पुकार और झमाझम के साथ फिर ला दो बरखा-बहार...!
जु लाई का आगाज तो मानसून के मिजाज के हिसाब से मनोनुकूल हुआ। सात-आठ दिन में ही आठ-नौ इंच पानी बरस गया। जन-जन के चेहरे खिल गए, क्योंकि इस बरस मानसून पूर्व की बौछारों से मालवा व इंदौर अछूता रह गया था।
जून यूं ही सूखा-सूखा बीत गया, लेकिन जुलाई की शुरुआत होते ही इतना पानी बरस गया कि जुलाई महीने का सरकारी आंकड़ा, यानी 12 इंच के आसपास पूर्ण हो गया, लेकिन उसके बाद से बारिश थम ही गई। तेज तो दूर रिमझिम तक नहीं हुई। बूंदाबांदी को भी मालवा अंचल व इंदौर तरस गया।
बारिश की इस खेंच ने मौसम को फिर गर्मी में तब्दील कर दिया। दिन का तापमान 34 डिग्री तक चढ़ गया। बिन पानी के भी वातावरण में डटी हुई नमी के कारण उमस से हाल बेहाल हो गए। पावस ऋतु के आगमन के बाद भी तन-बदन पसीने से तरबतर हो रहे हैं, लेकिन बारिश के कहीं भी अब तक अते-पते नहीं हैं।
12 दिन से थमी बारिश के कारण जुलाई का महीना सूखे की तरफ बढ़ चला है। अगर ये अंदेशा सही होता है, तो एक दशक में ये तीसरी ऐसी जुलाई होगी, जो सूखे में तब्दील होगी। मौसम के बदले इस मिजाज से एक बार फिर घर-दफ्तरों में एसी-कूलर ने जगह बना ली है।
मौसम के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से आ रही सूखी व गर्म हवा ने न सिर्फ मालवा, बल्कि पूरे प्रदेश का मानसूनी मिजाज बिगाड़ दिया है। अरब सागर से हवा तो जोरदार आ रही है, लेकिन ये बीच-बीच में दिशा भटक रही है।
इसके कारण बारिश का मौसम नहीं बन रहा। जो कुछ भी थोड़ा बहुत बारिश का सिस्टम मौजूद है, वह सिर्फ पूर्वी मध्य प्रदेश में ही है। प्रदेश का पश्चिम हिस्सा फिर तरस रहा है। शनिवार को वातावरण में नमी का स्तर सुबह 80 प्रतिशत व शाम को 52 फीसदी दर्ज किया गया।
लिहाजा शनिवार को अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिग्री ऊपर 32 डिग्री दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान 24 डिग्री तक जा पहुंचा। शुक्रवार को भी दिन का तापमान सामान्य से चार डिग्री ज्यादा 34 डिग्री दर्ज हुआ था।
इधर, रविवार से मौसम के बदलाव की बात कही जा रही है, जिसके कारण बारिश हो सकती है। मौसम महकमे के इस अंदेशे ने एक बार फिर झमाझम बारिश की आस जगा दी है। बशर्ते मौसम विभाग की भविष्यवाणी सही साबित हो।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार बंगाल की खाड़ी में एक नया कम दबाव का क्षेत्र आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही 19 जुलाई से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इन दोनों सिस्टम के एक साथ सक्रिय होने से मानसून मालवा-निमाड़ में फिर से गतिमान होगा।
अगले पूरे सप्ताह में जोरदार बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। इंदौर में अमूमन जुलाई में औसत 12 इंच बारिश होती है और इतने ही दिन पानी बरसता है। इस बार शुरुआत में ही अच्छा पानी बरसने से महीने का कोटा लगभग पूरा हो चुका है।
किसान अपनी फसल का 31 जुलाई तक बीमा करा लें
किसान कल्याण विभाग ने अपील की है कि किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसलों का बीमा 31 जुलाई तक करा लें, ताकि सूखा, अतिवृष्टि या मौसम के जोखिम से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।
जानकारों के मुताबिक शुरुआती बारिश में बोई गई सोयाबीन व अन्य फसलों को अब जल्द से जल्द अगली बारिश का इंतजार है। हालांकि अभी स्थिति चिंताजनक नहीं है।
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