अनशन पर अब कॉकरोच: वांगचुक के अनशन पर अलसुबह हुआ पुलिस एक्शन, भारी विरोध
KHULASA FIRST
संवाददाता

मोदी सरकार की शिक्षा नीति के खिलाफ धरने पर बैठे वांगचुक को पहुंचाया अस्पताल
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का ऐलान- आंदोलन रुकेगा नहीं, आज से मैं भूख हड़ताल पर
वांगचुक व कॉकरोच जनता पार्टी ने किया था 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान, दो दिन पहले ही पुलिस ने धरनास्थल से उठा लिया
20 दिन से धरने पर बैठे वांगचुक को पुलिस बल के साथ जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया
वांगचुक का करीब 10 किलो वजन गिर गया, बीपी भी 70 तक आ गया था, अस्पताल में अब भी होश में
दिल्ली पुलिस बोली- हाई कोर्ट के आदेश का पालन किया, वांगचुक की सेहत ज्यादा खराब हो रही थी
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक के भूख हड़ताल के ऐलान के बाद जंतर-मंतर पर उमड़ने लगी युवाओं की भीड़
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20-21 दिन से आमरण अनशन कर रहे पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करा दिया है। खराब स्वास्थ्य और दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस ने 18 जुलाई की सुबह 6.30 बजे वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट कर दिया।
वह शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन और छात्रों के आंदोलन का समर्थन कर रहे थे।
यह प्रदर्शन मुख्य रूप से नीट यूजी पेपर लीक मामले को लेकर था। लगातार 21 दिन तक अनशन पर रहने के कारण उनका स्वास्थ्य काफी गिर गया था। उनका वजन भी लगभग 9.5 किलोग्राम घट गया था।
डॉक्टरों ने उनके अंगों पर पड़ने वाले गंभीर जोखिम को लेकर चिंता जताई थी। वांगचुक ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च करने का आह्वान किया था और कहा था कि वह तब तक जीवित रहेंगे। लेकिन पुलिस ने हाई कोर्ट के आदेश और चिकित्सा सलाह का पालन करते हुए उन्हें अस्पताल ले जाने की कार्रवाई की।
सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों से अपील की है कि वे 20 जुलाई को संसद तक एक शांतिपूर्ण मार्च निकालें। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी, विवेक तनखा और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, सपा सांसद डिंपल यादव सहित कई प्रमुख हस्तियों और राजनीतिक दलों ने उनके आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। केजरीवाल ने तो केंद्र सरकार से सोनम वांगचुक को शिक्षामंत्री बनाने तक की मांग की थी।
सरकार इस आंदोलन से ऊपरी तौर पर भले ही बेफिक्री दिखा रही थी, लेकिन उसकी नजर वांगचुक की सेहत पर निरंतर थी। इस बीच सरकार के लिए राहत की बात रही कि सोनम वांगचुक के खराब स्वास्थ्य को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर केंद्र सरकार के जवाब के बाद कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया और वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाया गया।
मानसून सत्र की शुरुआत होते ही होना था ‘संसद मार्च’
20 जुलाई का संसद मार्च मुख्य रूप से नीट में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में बुलाया गया एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन होने का एेलान है। यह मार्च कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित किया गया, जिसका नेतृत्व जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके कर रहे हैं।
चूंकि 20 जुलाई से ही संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद भवन तक मार्च करके सीधे सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाना है। यह मामला देश के शिक्षा तंत्र में सुधार और छात्रों के भविष्य से जुड़ा है।
राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट) में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और पेपर लीक के कारण लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि परीक्षा में हुई इस भारी चूक की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। न्याय मांगने के लिए सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे थे।
उन्होंने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों से अपील की थी कि वे 20 जुलाई को दिल्ली पहुंचें। उन्होंने कॉलेजों से इसे लोकतांत्रिक शिक्षा के एक व्यावहारिक पाठ के रूप में मनाने का आग्रह किया था, लेकिन संसद मार्च से ठीक दो दिन पहले वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।
पुलिस का कहना है कि यह कदम दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और वांगचुक की तेजी से गिरती सेहत को देखते हुए उनकी जान बचाने के लिए उठाया गया। हालांकि उनके समर्थकों और विपक्ष ने इसे आंदोलन को दबाने की कोशिश बताया है।
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