छात्रों को पढ़ाए बिना कर दिया सह प्राध्यापकों का प्रमोशन: स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई में नया फर्जीवाड़ा
KHULASA FIRST
संवाददाता

भ्रष्टाचार के चलते आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने अपने
40 करोड़ रुपए वापस मांगे
पुनीत विजयवर्गीय 99770-00405 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई में एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां के डॉक्टर्स को बिना छात्रों को पढ़ाए प्राध्यापक बना दिया गया। स्कूल की स्थापना राष्ट्रीय स्तर पर राज्य शासन और मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर के सहयोग से की गई थी, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की उत्कृष्ट चिकित्सा शिक्षा सुविधा प्रदान करना एवं नेत्र रोग विषय में नेशनल मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से स्वीकृति प्राप्त कर पीजी और फैलोशिप की सीट प्रारंभ करना एवं नेत्र रोग में सुपर स्पेशलिटी शिक्षा का प्रशिक्षण देना है।
एसओई की स्थापना और शिक्षा प्रशिक्षण के लिए 40 करोड़ रुपए की राशि मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर द्वारा दी गई थी। स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई को शुरू हुए कई वर्ष बीत गए, लेकिन यहां अब तक कोई भी पीजी एवं फैलोशिप कोर्स प्रारंभ नहीं हुआ। इसके चलते विवि जबलपुर ने उक्त राशि वापस मांगी है।
शुरुआत से ही हो रहा भारी भ्रष्टाचार... मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नॉर्म्स अनुसार डॉक्टर्स की भर्ती न करते हुए स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई में भारी भ्रष्टाचार कर फर्जी नियुक्तियां की गईं, जिसके कारण एसओई को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा छात्रों की पढ़ाई के लिए कोई सीट नहीं दी गई, जबकि स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई द्वारा 80 लाख रुपए का ड्राफ्ट जमा कर सीट की मांग की गई थी, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते 80 लाख रुपए जब्त हो गए और एसओई को 1 भी सीट नहीं मिली।
आज तक पीजी सीट या फैलोशिप कोर्स के लिए छात्रों का कोई प्रवेश नहीं हुआ। इसके बावजूद एसओई में पदस्थ सह प्राध्यापक एवं सहायक प्राध्यापक डॉक्टर्स को प्राध्यापक बना दिया गया। इस फर्जीवाड़े की शिकायत संभागायुक्त और मुख्यमंत्री तक की गई है।
विश्वविद्यालय ने 40 करोड़ वापस मांगे... स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई ने डॉ. मीता जोशी, डॉ. टीना अग्रवाल, डॉ. ऋषि गुप्ता की पदोन्नति कर दी, जबकि हाई कोर्ट में फर्जी नियुक्ति के खिलाफ याचिका दायर है और कोर्ट ने निर्देश भी दिए हैं कि फर्जी नियुक्ति वाले चिकित्सकों को इलाज करने का अधिकार नहीं है।
एसओई में नियुक्ति में हुए भ्रष्टाचार और लापरवाही की वजह से नेशनल मेडिकल काउंसिल ने यहां एक भी सीट नहीं दी, जिसके चलते आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर द्वारा एसओई के लिए दी गई 40 करोड़ रुपए की ग्रांट लौटाने की मांग की गई है।
पदोन्नति के भी हैं नियम... एमजीएम मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर्स की पदोन्नति के लिए भी नियम हैं। जो डॉक्टर्स मरीजों को देखने के साथ ही कॉलेज में पढ़ा भी रहे हैं, उन्हें एक निश्चित समय में प्रमोट कर दिया जाता है, लेकिन जो डॉक्टर्स किसी भी छात्र को नहीं पढ़ा रहे, उन्हें किस आधार पर सह प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक के पद से पदोन्नत कर दिया गया, यह सवालों के घेरे में है।
यही नहीं नियम यह भी है यदि किसी की कोई शिकायत जांच में लंबित है, तो उसका प्रमोशन नहीं होगा, लेकिन यहां तो कई शिकायतों के साथ ही हाई कोर्ट में केस भी लंबित है, इसके बावजूद प्रमोशन दे दिया गया। पदोन्नति के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज की खुद की एक कमेटी है, जो पूरी जांच करने के बाद ही प्रमोशन की अनुशंसा करती है, ऐसे में इस कमेटी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिम्मेदारों के बयानो में विरोधाभास... स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई में पढ़ने के लिए कोई छात्र नहीं जाने को लेकर जब डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया से बात की गई तो उनका कहना था कि ऑप्टोमेट्री ब्रांच में पढ़ाई करने वाले पीजी स्टूडेंट्स पढ़ाई और प्रैक्टिस के लिए एसओई जाते हैं, जबकि यहां की डायरेक्टर डॉ. प्रीति रावत का स्पष्ट कहना है कि यहां पढ़ाई के लिए कोई छात्र नहीं आता।
स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई के निर्माण का मुख्य उद्देश्य मरीजों को आंखों का गुणवत्तापूर्ण उपचार देने के साथ ही बेहतरीन डॉक्टर्स तैयार करना था, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते ऐसा संभव नहीं हो सका।
भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण
स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि यहां के अधीक्षक आंखों के नहीं, बल्कि हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके शर्मा हैं। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के पास डॉक्टर्स की कितनी कमी है, इसका अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि इन्हीं डॉ. डीके शर्मा को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का भी अधीक्षक बनाया हुआ है। यहां सवाल यही खड़ा होता है कि क्या एमजीएम मेडिकल कॉलेज के पास एक भी ऐसा नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं, जिसे एसओई की कमान दी जा सके?
प्रमोशन होल्ड पर है
स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई के कुछ सह और सहायक प्राध्यापक की पदोन्नति की गई थी, लेकिन इसे अभी होल्ड किया गया है। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर द्वारा 40 करोड़ रुपए वापस मांगे जाने वाली बात संज्ञान में नहीं है, इसे देखना पड़ेगा। एसओई में पढ़ाई के लिए पीजी स्टूडेंट्स आते हैं। - डॉ. अरविंद घनघोरिया, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज
दिसंबर से पहले हो गए प्रमोशन
मैंने स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई दिसंबर में जॉइन किया था। इससे पहले ही यहां प्रमोशन हो गए थे। ये प्रमोशन किस आधार पर हुए, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। यह सही है कि एसओई में कोई छात्र पढ़ने या प्रैक्टिस के लिए नहीं आता है, उन सबकी पढ़ाई एमजीएम मेडिकल कॉलेज में ही होती है। इनके प्रमोशन की और भी वजह हो सकती है। -डॉ. प्रीति रावत, डायरेक्टर, एसओई
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