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यूथ विंग टीम ठंडी गार: भाजपा युवा मोर्चा कार्यकारिणी से निराश हुआ इंदौर

KHULASA FIRST

संवाददाता

03 अप्रैल 2026, 1:41 pm
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यूथ विंग टीम ठंडी गार

मीडिया विभाग: कांग्रेस की ‘जम्बो’ कार्यकारिणी वाली बुराई की भाजपा में भी हुई एंट्री

युवा मोर्चा की प्रदेश टीम में इंदौर से एक से बढ़कर एक थे दावेदार, सब हाथ मलते रह गए

नामचीनों की जगह ‘गुमनाम’ नामों ने बनाई मोर्चा टीम में जगह, शहर भाजपा भी हतप्रभ

मीडिया विभाग की घोषित हुई टीम ने कांग्रेस की भारी-भरकम कार्यकारिणी की याद दिलाई

44 नेता मीडिया पैनलिस्ट, 33 प्रदेश प्रवक्ता, 9 सह मीडिया प्रभारी, मुख्य मीडिया प्रभारी सहित 89 नेता खप गए

संभावित फेरबदल में अर्चना-उषा जैसी मंत्री पद की प्रबल दावेदार भी पार्टी का ‘लाउडस्पीकर’ बना दी गईं

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पहले बात करें भाजयुमो की उस प्रदेश कार्यकारिणी की, जिसे लेकर इंदौर से भोपाल तक घमासान मचा हुआ था। मोर्चा अध्यक्ष श्याम टेलर का इंदौर प्रवास का कार्यक्रम बार-बार मुल्तवी होने का एक कारण ये सूची और इसमें शामिल होने वाले दावेदार भी थे। इसमें मोर्चा नगर अध्यक्ष की दावेदारी भी एक कारण बनी थी। अब जो प्रदेश की मोर्चा टीम बनी है, वह साफ इशारा कर रही है कि मोर्चा अध्यक्ष टेलर का इंदौर आगमन टलना नुकसानदायक रहा।

खासकर उन युवा नेताओं के लिए, जो प्रदेश की टीम में स्वाभाविक दावेदार माने जा रहे थे। अब जारी हुई सूची से खुलासा होता है कि ‘टेलर’ समय रहते अगर इंदौर का ‘नाप’ ले लेते तो टीम यूथ विंग से इंदौर को निराशा हाथ नहीं लगती। न इस टीम पर ‘ठंडी गार’ होने के आरोप चस्पा होते।

इंदौर से एक से बढ़कर एक दावेदार टेलर टीम का हिस्सा बनकर उनके अगल-बगल में खड़े होने को लालायित थे। इसके लिए न सिर्फ दावेदार, बल्कि उनके आका नेताओं ने भी खासी मोर्चाबंदी कर रखी थी। कुछ नेता अपने भारी-भरकम कारोबारी ताकत व रिश्ते तो कुछ कथित रूप से आरएसएस के रिश्ते से स्वयं को जोड़कर आगे-आगे दौड़ रहे थे।

कोई विधायक के जरिये स्वयं को टीम टेलर का हिस्सा मानकर चल रहा था तो किसी को अपनी धन उगलती जमीन पर ज्यादा भरोसा था, बजाय भाजपा के लिए जमीन पर मजबूत होने के। ऐसे तमाम दावेदार हाथ मलते रह गए और बाजी उनके हाथ लगी, जो भाजपा की वर्तमान बाजीगरी को भांप मौन धारण किए हुए थे। इंदौर से धीरज ठाकुर, मनोज ठाकुर, रोहित चौधरी, मयूरेश पिंगले, शुभेंदु गौड़, गंगा पांडे आदि जमीन पर सक्रिय युवा नेताओं के नाम प्रबलता से लिए जा रहे थे।

युवा मोर्चा की प्रदेश टीम में विधायकों के हाथ लगभग खाली ही रहे। जो नाम आए, उनमें ज्यादातर संगठन, यानी मातृसंस्था की चैनल से सामने आए हैं। एबीवीपी से जुड़े युवाओं को भी जगह मिली। टीम हेमंत खंडेलवाल का हिस्सा इंदौर के एक तेजी से उभरते नेताजी के हाथ सबसे बड़ी निराशा लगी।

उनकी पैरवी वाले नाम को बहुत नीचे व छोटा पद मिलना न जाने क्या-क्या इशारे कर रहा है। कुछ चतुर सुजान युवा नेताओं ने अपनी पीठ पर आरएसएस का ठप्पा लगवा रखा था। प्रचार भी किया व करवाया था कि ये ‘सुदर्शन’ व ‘अर्चना’ की ठंडी छांव में खड़े हैं।

ऐसे युवा नेताओं में कांग्रेस पृष्ठभूमि परिवारों के भी युवा थे, लेकिन पार्टी का प्रदेश संगठन ऐसे ‘आयातित कलाकारों’ से ज्यादा चतुर सुजान निकला। आजकल आरएसएस के नाम पर भाजपा में सीधे उच्च पद पर बैकडोर एंट्री का जो दौर चलन में आ गया है, ये सूची कम से कम इस विकृति पर विराम तो लगा रही है।

जो भगवा वाहिनी के नाम से जगह बना पाए, वे ठोस व जमीनी रूप से मातृसंस्था के लिए पसीना बहा रहे थे। मीडिया विभाग में जगह बना पाए सचिन बघेल उनमें से एक रहे।

मीडिया विभाग की टीम ने तो कांग्रेस की याद दिला दी। एक-दो नहीं, 90 के लगभग नेता पार्टी के ‘माईक’ व ‘लाउडस्पीकर’ मनोनीत किए गए। थोकबंद 44 नेता मीडिया पैनलिस्ट मुकर्रर किए गए हैं। इतने चैनल तो प्रदेश क्या, देश में ही नहीं, जितने नेता इन चैनलों की स्क्रीन के लिए तय कर दिए। प्रदेश प्रवक्ता भी 33 बनाए हैं।

इसमें अर्चना चिटनीस, उषा ठाकुर जैसी बड़ी व कद्दावर महिला नेता भी खपा दी गईं। इन दोनों नेताओं के नाम डॉ. मोहन यादव सरकार की संभावित कैबिनेट विस्तार के लिए सबसे ऊपर थे और अब भी हैं। हालांकि अभी ये विस्तार दावेदारों के लिए ‘दिवास्वप्न’ ही है। 9 सह मीडिया प्रभारी भी बनाए गए हैं।

इस घोषित टीम में अच्छी बात ये रही कि इस पद के जरिये इंदौर के आलोक दुबे की प्रदेश स्तर पर एंट्री हो गई। दुबे संभागीय मीडिया प्रभारी पर बेहतर परफार्मेंस के बावजूद हाशिये पर डाल दिए गए थे। दुबे की ताजपोशी में इंदौर के तमाम बड़े नेता, खासकर विधायक रमेश मेंदोला बधाई के पात्र हैं।

जेपी मूलचंदानी ने भी अपना दायित्व बचाकर सबको चौंका दिया। तेजतर्रार महिला नेता दिव्या गुप्ता के आंचल में भाजपा की तरफ से एक और पद आ गया। वे केंद्र के एक आयोग की भी सदस्य बताई जाती हैं, जिसमें राज्यमंत्री का दर्जा रहता है।

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