डॉग फीडिंग विवाद ने खोली सत्ता की परतें
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर ।
कभी भाजपा और संघ की मजबूत विचारधारा का गढ़ मानी जाने वाली इंदौर की विधानसभा-4 अब लगातार विवादों, आरोपों और संगठनात्मक असंतोष का केंद्र बनती जा रही है।
क्षेत्र में अवैध वसूली, राजनीतिक संरक्षण, गुंडागर्दी, तोड़फोड़ और प्रशासनिक दबाव जैसे आरोपों के बीच एक मामूली डॉग फीडिंग विवाद ने ऐसा राजनीतिक रूप ले लिया है कि अब मामला भाजपा संगठन और संघ परिवार तक पहुंच गया है।
क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और नागरिकों के बीच यह चर्चा तेज है कि जिस विधानसभा को कभी ‘अयोध्या’ कहा जाता था, वह अब अराजकता और गुटबाजी के कारण ‘लंका’ बनने की ओर बढ़ रही है।
विवाद से भड़की हिंसा, भाजपा कार्यकर्ता के घर पर हमला...हिंद रक्षक संगठन से जुड़े कार्यकर्ता शानू दिघे ने आरोप लगाया है कि कुत्तों को खाना खिलाने को लेकर हुए विवाद के बाद 50 से 70 लोगों ने उनके घर पर हमला किया।
राजनीतिक संरक्षण के दम पर एकतरफा कार्रवाई के आरोप... घटना के बाद सबसे बड़ा विवाद पुलिस कार्रवाई को लेकर खड़ा हो गया है। स्वयंसेवकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों के दबाव में पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की कोशिश की।
आरोप यह भी हैं कि वास्तविक पीड़ितों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया, जबकि रसूखदार लोगों के पक्ष को प्राथमिकता मिली। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो मामला केवल मारपीट और तोड़फोड़ का नहीं बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता और कानून व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी है।
संघ स्वयंसेवकों का फूटा आक्रोश, अन्नपूर्णा थाने का घेराव...घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में संघ स्वयंसेवक और भाजपा कार्यकर्ता अन्नपूर्णा थाने पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों के खिलाफ समान कार्रवाई की मांग की।
उनका आरोप था कि राजनीतिक दबाव में पुलिस वास्तविक तथ्यों से भटक रही है। सूत्रों के अनुसार पूरे घटनाक्रम की जानकारी संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक पहुंचाई गई है और मामले की रिपोर्ट शीर्ष स्तर पर भेजी गई है।
भाजपा संगठन हरकत में, विधानसभा प्रभारी पर कार्रवाई...विवाद बढ़ने के बाद भाजपा संगठन को हस्तक्षेप करना पड़ा। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद भाजपा महानगर अध्यक्ष ने विधानसभा-4 के प्रभारी वीरेंद्र शेंडगे को पद से हटाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत हो सकती है। यदि विवाद और बढ़ा तो संगठन स्तर पर और भी बड़े फैसले सामने आ सकते हैं।
अवैध वसूली, निर्माण और दबंगई को लेकर पहले भी उठते रहे सवाल...विधानसभा-4 में यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले भी अवैध निर्माण, अवैध वसूली, दबंगई, व्यापारियों पर दबाव और राजनीतिक संरक्षण जैसे आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
कई शिकायतें जांच और फाइलों के बीच दब गईं, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ता गया। इसी कारण डॉग फीडिंग का मामूली विवाद अब वर्षों से जमा नाराजगी के विस्फोट के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि मामला केवल दो पक्षों का विवाद नहीं, बल्कि संगठन और सत्ता के बीच बढ़ते असंतोष का संकेत भी हो सकता है।
जिस तरह संघ और भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता खुलकर सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट है कि नाराजगी स्थानीय स्तर से कहीं अधिक गहरी है।
एसीपी बोले: दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच जारी... एसीपी शिवेंदु जोशी के अनुसार कुत्तों को घुमाने और उन्हें खाना खिलाने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जो गाली-गलौज और मारपीट तक पहुंच गया।
दोनों पक्ष थाने पहुंचे थे और पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। संबंधित लोगों के बयान लिए जा रहे हैं तथा तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
कानून सबके लिए बराबर हो...पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में एक सवाल सबसे ज्यादा गूंज रहा है, क्या राजनीतिक संरक्षण कानून से बड़ा हो गया है? आम नागरिक, स्वयंसेवक और कार्यकर्ता अब निष्पक्ष कार्रवाई, समान न्याय और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त प्रशासन की मांग कर रहे हैं।
विधायक पुत्र का नाम चर्चा में, क्षेत्र में बढ़ी राजनीतिक हलचल
घटना के बाद विधायक पुत्र एकलव्य गौड़ का नाम भी चर्चाओं में बना हुआ है। क्षेत्र में लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि कुछ स्थानीय नेता राजनीतिक संरक्षण के बल पर प्रभाव स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस विवाद ने उन चर्चाओं को फिर से हवा दे दी है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संगठन से जुड़े कई कार्यकर्ता निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
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