तुम पास आए यूं मुस्कुराए: कैलाश-मोहन के बीच चल रही तल्खी हुई दूर
KHULASA FIRST
संवाददाता

सीएम-कैलाश : मेयर की बिछाई जाजम पर रिश्तों में पुनः दिखी गर्माहट
विजयवर्गीय ने दूर किए सारे संशय, मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में पूरे समय रहे मौजूद
मुख्यमंत्री ने भी अपने ‘भाईसाहब’ को दिया पूरा मान, पुरानी जुगलबंदी फिर आई नजर
‘मोहन-कैलाश’ ने साथ-साथ, पास-पास बैठकर सुनी पीएम की मन की बात, चर्चित हुई तस्वीरें
नर्मदा जल के आयोजन में दशहरा मैदान पर विजयवर्गीय विरोधियों के मंसूबों पर गिरा घड़ा-भर जल
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कैलाश विजयवर्गीय के न आने की लगाई जा रही थी अटकलें
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मां नर्मदा के जल के कलकल निनाद को पुनः इंदौर की धरा पर लाने के शंखनाद ने प्रदेश के राजनीतिक माहौल के कयासों को थाम दिया व शहर की उम्मीदों को पुनः जगा दिया। पूरा मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व मोहन सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जुड़ा है। दोनो नेताओं के बीच का याराना अरसे से मिसाल रहा है।
जब न डॉ. यादव सीएम थे, न विजयवर्गीय मंत्री। प्रदेश की राजनीति से दूर रहते हुए भी विजयवर्गीय व यादव की जुगलबंदी विरोधियों के लिए रश्क का विषय रही। जब अपने ही मित्र को या यूं कह लें सहोदर को प्रदेश की कमान मिली तो ये जुगलजोड़ी भाजपा ही नहीं, प्रदेश की राजनीति में सिरमौर हो गई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सहजता, सौजन्यता व विनम्रता ने इस जोड़ी को व दोस्ती को ओर ऊंचाई भी दी, लेकिन न जाने फिर किसकी नजर लगी या ये जोड़ी नजराई कि ये तक अटकलें लगने लगीं कि देखते हैं रविवार को मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में मंत्री विजयवर्गीय शामिल भी होते हैं या नहीं? ये कयास भी जोरों पर थे कि दोनों के बीच दूरी बनी रहेगी या दूर होगी?
यानी रिश्तों में तल्खी इस कदर बढ़ गई कि सहज मेल-मुलाकत तक पर संशय के बादल मंडरा गए। इस बीच प्रदेश की सियासत में ‘बड़े-छोटे’ की चली उठापटक ने भी संबंधों की गर्मजोशी में ठंडा जल डालने का काम किया, लेकिन कल इसी जल के एक आयोजन से ऐसी तस्वीरें निकलकर आईं कि विरोधी ‘जल-जल’ गए।
रविवार को इंदौर में एक बार फिर ‘मोहन-कैलाश’ को पास पास देखा, एक साथ देखा, एक-दूजे को मान देते देखा। न सिर्फ बतियाते देखा, बल्कि कान में फुसफुसाते भी देखा। खिलखिलाते भी देखा और एक-दूजे की शान में कसीदाकारी करते भी देखा। उन सब अटकलों व कयासों को धूलधूसरित होते भी देखा, जो इन दो ‘धुरंधरों’ के बीच के फासले को घटाने की बजाय बढ़ाने की जुगत में जुटाई जा रही थी।
दोनों नेताओं के बीच रिश्तों की गर्माहट को एक बार फिर न सिर्फ इंदौर शहर, बल्कि मध्यप्रदेश की भाजपाई राजनीति ने भी महसूस किया। औसत भाजपाई दोनों नेताओं के बीच ‘पिघलती बर्फ’ देख गदगद हुआ। जिन्हें राजनीति से कोई नाता नहीं रखना वे भी खुश हुए कि ये इंदौर के भले के लिए है कि ‘मोहन-कैलाश’ साथ-साथ हों।
पीएम नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ साथ-साथ बैठकर सुनने की दोनों नेताओं की एक अदा पर दुर्दिनों के दौर से गुजर रहा शहर गदगद हो गया। ये बात सरकार के मुखिया को भी समझ आई, जब दोनों नेताओं की तस्वीरें तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुई। अब इसके पीछे दोनों नेताओं का बड़प्पन है या फिर दिल्ली दरबार से मिले दिशा-निर्देश का मान?
ये सबकी पड़ताल राजनीति का विषय है, लेकिन हकीकत बस वही है जो तस्वीरों से निकलकर सामने आई है और इंदौर शहर व मध्यप्रदेश भाजपा की राजनीति ऐसी ही तस्वीरों की तलबगार है। ये बात शायद दोनों नेताओं को भी समझ आ गई हो तो न सिर्फ मालवा अंचल, बल्कि कमलदल के लिए भी सुकून की बात होगी और राजनीतिक नफे की भी।
...इंदौर यही तो तस्वीर देखना चाहता है। अहिल्या नहरी की ढेरों उम्मीदें इस तस्वीर से जुड़ी हुई हैं। ‘मिशन 2028' में एक ही दल के दामन में अपना सर्वस्व लाड़ लड़ाकर इंदौर ने अनेक उम्मीदें बांधी थीं, कई सपने संजोए थे, बहुत आशाएं की थीं। सरकार ही नहीं, सरकार के मुखिया से भी।
शहर के बगल से प्रदेश के मुखिया के चुने जाने पर इंदौरी भी फूले न समाए थे और मुखिया भी कैसा? ठेठ इंदौरी मिजाज जैसा, इंदौर से प्रेम करने वाला। इंदौरी रंग में रचा बसा। फर्क भी क्या है वैसे अहिल्या नगरी व अवंतिकापुरी में? दोनों शहर सगे सहोदरों जैसे ही तो हैं। ऐसे ही सहोदर यानी सगे भाइयों समान दो नेताओं की जुगलबंदी ने भी इंदौर की उम्मीदों को आसमानी पंख दे दिए थे।
हर जुबां पर बस एक ही बात थी कि अब जाकर दिन फिरे हैं इंदौर के, लेकिन बीते कुछ समय से इन सब उम्मीदों के बीच एक धुंधलका सा छा गया था। उम्मीदों के पंख उड़ान भरने की जगह फड़फड़ाने लगे थे। यूं लगने लगा था कि ये पंख यूं ही फड़फड़ाकर दम न तोड़ दें?
लेकिन रविवार को मां अहिल्या के आंगन से निकली तस्वीरों ने न सिर्फ मालवा अंचल, बल्कि प्रदेश को सुकून पहुंचाया। ये इस बात का सबूत भी है कि राजनीति में मत भिन्नता स्वीकार्य है, लेकिन मन भिन्नता का कोई स्थान नहीं। न दल के बीच, न जनमानस के मध्य, न सरकार के अंदर, न सार्वजनिक रूप से बाहर।
चर्चा में रही सीएम की सज्जन के घर पहुंचने की सौजन्यता
मुख्यमंत्री रविवार को शहर में करीब आधा दर्जन कार्यक्रमों में शामिल हुए। मुख्य जाजम महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बिछाई थी। दशहरा मैदान में बिछी इस जाजम ने मुख्यमंत्री व विजयवर्गीय को नजदीक लाने में अहम भूमिका निभाई। मां नर्मदा के श्री चरणों के चौथे स्वरूप का शहर में आगमन को लेकर ये आयोजन था, जिसमें अरसे बाद भाजपा एक विराट परिवार के रूप में नजर आई।
हालांकि परिवार के बुजुर्गों को यहां वह मान नहीं मिल पाया जिसके वे स्वभाविक हकदार हैं। ये नाइंतजामी प्रशासनिक थी या राजनीतिक, इसकी जांच होना ही चाहिए कि आखिर पार्टी के वयोवृद्ध नेताओं को ही नहीं, नगर इकाई के पदाधिकारियों को भी भीड़ के धक्के क्यों खाना पड़े।
मुख्यमंत्री ने अपने इंदौर प्रवास में एक सौजन्यता और दिखाई, जो राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय रही। मुख्यमंत्री तमाम व्यस्तताओं के बावजूद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के निवास पर जाना नहीं भूले।
वर्मा की जीवनसंगिनी का हाल ही में निधन हो गया था। सीएम शोक संतप्त परिवार के बीच पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की। वर्मा से मिलकर डॉ. यादव ने उन्हें ढांढस भी बंधवाया। सीएम के साथ विधायक रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला व नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा भी थे।
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