इस ऐतिहासिक मंदिर में वरमाला पर क्यों रोक: क्यों बनी विवाद की स्थिति; वायरल वीडियो में युवक ने क्या कहा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
राजधानी भोपाल से सटे प्राचीन भोजपुर मंदिर में नवविवाहित दंपती को वरमाला की रस्म करने से रोके जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में युवक खुद को भूपेंद्र शर्मा बताते हुए सुरक्षा कर्मियों पर रोक लगाने का आरोप लगा रहा है। युवक का कहना है कि वह विधिवत विवाह के बाद पत्नी के साथ केवल दो मिनट के लिए प्रतीकात्मक वरमाला और दर्शन करने मंदिर पहुंचा था, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने ‘अनुमति लेने’ की बात कहकर रोक दिया।
वीडियो में क्या दिख रहा है?
पहले वीडियो में युवक मंदिर परिसर में खड़ा होकर कहता है कि “पूजा से मना नहीं कर रहे, वरमाला से मना कर रहे हैं।” वह सवाल उठाता है-“भगवान के मंदिर में भी परमिशन लेनी पड़े तो कैसा मंदिर?” दूसरे वीडियो में वह बताता है कि शादी के बाद भगवान शिव के समक्ष अर्धांगिनी को अपनाने की रस्म करना चाहता था। वीडियो में एक सुरक्षाकर्मी ‘सेंट्रल मोन्यूमेंट’ और ‘आर्कियोलॉजिकल’ नियमों का हवाला देते हुए अनुमति की बात करता सुनाई देता है। अंत में युवक ‘हर-हर महादेव’ के नारे लगाते हुए युवती के गले में माला डालता नजर आता है।
युवक का पक्ष
भूपेंद्र शर्मा के मुताबिक, 26 तारीख को शादी के बाद वह पत्नी और परिजनों के साथ मंदिर पहुंचे थे। वैदिक रीति से विवाह पहले ही संपन्न हो चुका था। उनका दावा है कि ढोल, कैमरा और वाहन को गेट पर ही रोक दिया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।वे मंदिर के प्रांगण में गए, गर्भगृह में प्रवेश नहीं किया और करीब 30 सेकंड में वरमाला की रस्म पूरी कर ली। कुल मिलाकर 4-5 मिनट ही परिसर में रुके। युवक का कहना है कि इतनी छोटी और प्रतीकात्मक रस्म के लिए अनुमति की शर्त अनुचित है।
पुजारी का बयान
मंदिर के पुजारी अनूप गिरी ने स्पष्ट किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन होने के कारण मंदिर एक संरक्षित स्मारक है। ऐसे में सुरक्षा और प्रशासनिक नियम विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू होते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट या पुजारी पक्ष की ओर से कोई आपत्ति नहीं है। यदि सुरक्षा कर्मियों ने रोका है तो वह ASI के नियमों के तहत किया गया होगा।
पुरातत्व विभाग का पक्ष
अधिकारियों के अनुसार भोजपुर मंदिर, सांची स्तूप, खजुराहो मंदिर, भीमबेटका शैलाश्रय और उदयगिरि गुफाएं जैसे स्मारक केंद्र सरकार के अधीन संरक्षित हैं। इन स्थलों पर किसी भी प्रकार का आयोजन, सार्वजनिक रस्म या शूटिंग पूर्व अनुमति के बिना नहीं की जा सकती। निजी शूट के लिए निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क है। अधिकारियों का कहना है कि वरमाला जैसी रस्म भी आयोजन की श्रेणी में आ सकती है, इसलिए पूर्व अनुमति आवश्यक है।
विवाद की जड़
विवाद इस बात पर केंद्रित है कि क्या कुछ मिनट की प्रतीकात्मक वरमाला को भी ‘आयोजन’ माना जाए और उसके लिए औपचारिक अनुमति अनिवार्य हो। सामान्य दर्शन और पूजा पर कोई रोक नहीं है, लेकिन संरक्षित स्मारक होने के कारण नियम अपेक्षाकृत सख्त हैं। फिलहाल वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
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