पहले क्यों की जाती है भगवान गणेश की पूजा: जानिए इससे जुड़ी मान्यताएं और मिलने वाले फल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भारतीय संस्कृति में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार की शुरुआत या किसी नए काम का आरंभ-अधिकांश लोग सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश जी को विघ्नहर्ता यानी बाधाओं को दूर करने वाला देवता माना जाता है।
क्यों कहा जाता है विघ्नहर्ता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव और पार्वती के पुत्र गणेश को देवताओं में सबसे पहले पूजनीय होने का वरदान मिला था। कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति किसी कार्य से पहले गणेश जी की पूजा करता है, उसके रास्ते में आने वाली बाधाएं कम हो जाती हैं और कार्य सफलता की ओर बढ़ता है।
बुद्धि और विवेक के देवता
गणेश जी को ज्ञान, बुद्धि और विवेक का प्रतीक माना जाता है। इसलिए विद्यार्थी परीक्षा या पढ़ाई की शुरुआत से पहले उनकी पूजा करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि गणेश जी की कृपा से व्यक्ति को सही निर्णय लेने की क्षमता मिलती है।
सुख-समृद्धि की कामना
गणेश पूजा को परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला भी माना जाता है। घर में गणेश जी की प्रतिमा या चित्र रखने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की बात कही जाती है। कई लोग बुधवार के दिन विशेष रूप से गणेश पूजा करते हैं और उन्हें दूर्वा, मोदक और लड्डू का भोग लगाते हैं।
नई शुरुआत के प्रतीक
धार्मिक मान्यताओं में गणेश जी को नई शुरुआत का देवता भी कहा जाता है। यही कारण है कि व्यापार शुरू करने, दुकान खोलने या किसी बड़े निर्णय से पहले गणेश पूजा की जाती है। इससे व्यक्ति में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बढ़ती है।
आस्था के साथ जुड़ा संदेश
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि गणेश पूजा केवल एक धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि जीवन में धैर्य, बुद्धिमत्ता और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने का संदेश भी देती है।
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