सुबह प्रमोशन शाम को रिटायरमेंट: डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर सिर्फ 6 घंटे की सेवा; पेंशन-ग्रेच्युटी के लाभ पर उठे सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश के सहकारिता विभाग में पदोन्नति और सेवानिवृत्ति से जुड़ा एक मामला चर्चा में है। बड़वानी में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत सुरेश सांवले को शासन ने पदोन्नति देकर डिप्टी रजिस्ट्रार बनाया।
उन्होंने 31 अगस्त को सुबह करीब 11 बजे इंदौर में डिप्टी रजिस्ट्रार के पद का प्रभार संभाला और उसी दिन शाम 5 बजे सेवानिवृत्त हो गए।
यानी पदोन्नति के बाद नए पद पर उनकी सरकारी सेवा करीब छह घंटे रही। इस दौरान कोई न्यायिक आदेश पारित नहीं हुआ।
सांवले के मुताबिक, समय अधिकारियों-कर्मचारियों से परिचय और सामान्य बातचीत में बीता। हालांकि, इस पदोन्नति के बाद उन्हें सेवानिवृत्ति से जुड़े पेंशन और ग्रेच्युटी संबंधी लाभ मिलने की बात सामने आ रही है।
सुबह स्वागत, शाम को विदाई
31 अगस्त का दिन सांवले के लिए पदोन्नति और सेवानिवृत्ति दोनों का रहा। सुबह करीब 11 बजे उन्होंने डिप्टी रजिस्ट्रार का पदभार संभाला। तत्कालीन ज्वॉइंट रजिस्ट्रार डॉ. मनोज जायसवाल ने उन्हें चार्ज सौंपा।
पदभार ग्रहण करने के बाद विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनका स्वागत किया। इसके करीब छह घंटे बाद शाम 5 बजे विभाग की ओर से उनका विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस तरह एक ही दिन में उनके लिए पदोन्नति का स्वागत और सेवानिवृत्ति की विदाई दोनों कार्यक्रम हुए।
बोले- छह घंटे में न्यायिक आदेश पारित करना संभव नहीं था
सुरेश सांवले के मुताबिक, शासन ने 27 जुलाई को उनकी पदोन्नति का आदेश जारी किया था। इसके बाद 29 अगस्त को उनकी सेंधवा में सीएम जन अभियान में ड्यूटी थी। ड्यूटी पूरी करने के बाद वे शाम को रिलीव हुए।
उन्होंने 30 अगस्त को बड़वानी से रवाना होने की तैयारी की और 31 अगस्त को इंदौर पहुंचकर डिप्टी रजिस्ट्रार का प्रभार संभाला।
सांवले ने कहा कि छह घंटे के भीतर कोई न्यायिक आदेश पारित करना संभव नहीं था। उनके मुताबिक, पदभार संभालने के बाद दिन अधिकारियों और कर्मचारियों से परिचय तथा सामान्य बातचीत में ही बीता।
करीब 30 साल की सेवा के बाद हुए सेवानिवृत्त
सुरेश सांवले मूल रूप से बुरहानपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने सहकारिता विभाग में करीब 30 साल तक सेवा की। वर्ष 2016 से 2020 तक वे इंदौर में असिस्टेंट रजिस्ट्रार रहे।
इसके अलावा बड़वानी और सेंधवा में भी उन्होंने असिस्टेंट रजिस्ट्रार के रूप में जिम्मेदारी संभाली। 31 अगस्त को डिप्टी रजिस्ट्रार के पद से उनकी सेवानिवृत्ति हो गई।
ज्वॉइंट रजिस्ट्रार पद पर पदोन्नति के बाद भी अतिरिक्त प्रभार का मामला
इसी विभाग में डॉ. मनोज जायसवाल की पदस्थापना भी चर्चा में रही है। उन्हें 14 जुलाई को पदोन्नति देकर ज्वॉइंट रजिस्ट्रार (न्यायिक) बनाया गया था।
15 जुलाई को उन्होंने नए पद का प्रभार संभाल लिया, लेकिन इसके बाद करीब डेढ़ महीने तक डिप्टी रजिस्ट्रार का काम भी देखते रहे।
बाद में 27 अगस्त के आदेश के तहत उनकी पदस्थापना ज्वॉइंट रजिस्ट्रार (न्यायिक) के रूप में इंदौर में की गई। 31 अगस्त को उन्होंने इस पद का दोबारा विधिवत प्रभार संभाला।
जायसवाल ने वर्ष 1996 में बालाघाट से सहकारिता विभाग में सेवा शुरू की थी। उनकी पदस्थापना भोपाल, छिंदवाड़ा, मंडला, उज्जैन, देवास और इंदौर सहित कई स्थानों पर रही है। वे वर्ष 2019 से इंदौर में पदस्थ हैं।
पहले दिए आदेशों की अपील की सुनवाई को लेकर भी सवाल
डॉ. जायसवाल इससे पहले डिप्टी रजिस्ट्रार (न्यायिक) के पद पर कार्य कर चुके हैं। ऐसे में उनके कार्यकाल में पारित न्यायिक आदेशों की अपील यदि अब उनके ही समक्ष ज्वॉइंट रजिस्ट्रार (न्यायिक) के रूप में आती है, तो उसकी सुनवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मामले में मुख्य चिंता हितों के संभावित टकराव और निष्पक्ष सुनवाई को लेकर है। हालांकि, किसी विशेष मामले की सुनवाई की स्थिति और उस पर लागू प्रक्रिया संबंधित रिकॉर्ड व विभागीय नियमों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
पदोन्नति और सेवानिवृत्ति की टाइमिंग पर चर्चा
सुरेश सांवले का मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि पदोन्नति के बाद उन्होंने नए पद पर करीब छह घंटे ही काम किया और उसी दिन सेवानिवृत्त हो गए। वहीं, विभाग में अतिरिक्त प्रभार और पदस्थापना से जुड़े अन्य मामलों ने भी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
अब चर्चा इस बात पर है कि पदोन्नति, पदभार ग्रहण, न्यायिक दायित्व और सेवानिवृत्ति के बीच विभागीय प्रक्रिया किस तरह लागू हुई और इसके आधार पर सेवानिवृत्ति लाभों पर क्या प्रभाव पड़ा।
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