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कब होगा महापौर के आदेश का पालन: निगम अफसर अनुबंध भूले व्यापारियों से वसूला जा रहा 10 रुपए वर्गफीट के हिसाब से किराया

KHULASA FIRST

संवाददाता

06 मार्च 2026, 1:08 pm
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कब होगा महापौर के आदेश का पालन

आदित्य शुक्ला 98260-63956 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम मार्केट की दुकानें लेने वाले व्यापारी अनुबंध के हिसाब से किराया लेने की बात कह रहे हैं, लेकिन निगम अफसर अपनी मनमानी कर उनसे जबरिया 10 रुपए वर्गफीट के हिसाब से किराया वसूल रहे हैं। व्यापारियों की समस्या जानने के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने करीब दो वर्ष पूर्व बजट सम्मेलन में घोषणा की थी कि व्यापारियों से अनुबंध के हिसाब से किराया वसूला जाए, लेकिन निगम अफसर महापौर के इस आदेश का पालन अब तक नहीं कर रहे हैं। इससे व्यापारी परेशान होकर महापौर व निगमायुक्त के चक्कर लगा रहे हैं।

नगर निगम में अफसरों की अफसरशाही हावी है। इसके चलते जो अफसर जहां बैठा है उसने अपनी कमाई के रास्ते वहीं बना लिए हैं। यही नहीं, शासन और महापौर के निर्देशों की अवहेलना करना भी निगम अफसरों की कार्यशैली बन गया है। यही वजह है कि महापौर द्वारा 23 जून 2024 को आयोजित बजट सम्मेलन में व्यापारियों से अनुबंध के हिसाब से किराया वसूलने का ऐलान किया था।

इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वह व्यापारियों से किराया वसूली में बरती जा रही लापरवाही तत्काल बंद करें, लेकिन करीब दो साल बीतने के बाद भी निगम अफसरों ने महापौर के आदेश का पालन नहीं किया है, जिससे व्यापारी परेशान हो रहे हैं। महापौर ने कई बार व्यापारियों से मुलाकात के बाद निगम अधिकारियों को अनुबंध अनुसार किराया वसूलने के निर्देश दिए, लेकिन अफसर महापौर के आदेश को हवा में उड़ा रहे हैं।

किराए के नाम पर अधिक जमा
पालिका प्लाजा व्यापारी एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि हम नगर निगम अफसरों की मनमानी किराया वसूली से व्यापारी परेशान हो गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि कुछ वर्षों में निगम अफसरों ने किराए के नाम पर इतनी राशि वसूली है कि उससे आगे के दो से तीन साल का किराया जमा हो सकता है, लेकिन महापौर पुष्यमित्र भार्गव के ऐलान के बाद यह उम्मीद बनी थी कि निगम अपनी गलती सुधारेगा, लेकिन साल बीतने के बाद भी निगम अफसरों की वसूली का रवैया नहीं बदला है। इससे आक्रोशित व्यापारियों ने निगम अफसरों के खिलाफ लामबंद होकर प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

किराया वसूलने के नाम पर लापरवाही
उन्होंने कहा कि समय पर टैक्स की राशि या किराया जमा न करने पर निगम द्वारा पैनल्टी भी वसूली जाती है, लेकिन जिस निगम ने व्यापारियों से अनुबंध किया उस अनुबंध के अनुसार किराया वसूलने के नाम पर सभी लापरवाह बने हुए हैं।

दम्मानी ने निगम अफसरों की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि अब भी निगम अफसरों ने व्यापारियो से अनुबंध के हिसाब से किराया वसूलना शुरू नहीं किया तो व्यापारियों को मजबूरन अदालत का सहारा लेना पड़ेगा।

कई दुकानदार नहीं देते किराया
सूत्रों की मानें तो निगम अफसरों की मनमानी से परेशान निगम मार्केट के कई दुकानदारों ने किराया देना बंद कर दिया है। ऐसे दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई करने से निगम अफसरों के हाथ-पांव फूलने लगते हैं। जबकि ऐसे व्यापारी जो नियमित किराया, टैक्स की राशि जमा करा रहे हैं उनका बकाया होने पर दुकानें सील करने पहुंच जाते हैं। निगम अफसरों की इस मनमानी से नाराज व्यापारी निगम के खिलाफ विरोध जताने की नई रणनीति बनाने को मजबूर हो गए हैं।

आश्वासन मिला
व्यापारी महेश दम्मानी ने बताया महापौर के साथ निगमायुक्त क्षितिज सिंघल से भी मुलाकात कर समस्या बताई, लेकिन पूर्व निगमायुक्तों की तरह ही मौजूदा निगमायुक्त सिंघल ने आश्वासन दिया, लेकिन कारगर कार्रवाई अब तक नहीं की गई है। इससे व्यापारियों से किराए के नाम पर निगम अफसरों द्वारा जानबूझकर जबरिया वसूली की जा रही है।

लापरवाह अफसर
व्यापारियों ने बताया कि वह हाल ही में महापौर पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व में निगमायुक्त क्षितिज सिंघल व अपर आयुक्त शृंगार श्रीवास्तव से मिले। इस मौके पर महापौर ने अधिकारियों को निगम व व्यापारियों के बीच होने वाले अनुबंध की जानकारी देकर कहा कि नई दुकानें और छत किराया नई दर से लिया जाए, लेकिन जिन व्यापारियों ने पहले दुकानें ली हैं उनसे किराया अनुबंध के हिसाब से लिया जाए।

इसके बाद भी अब तक व्यापारियों को अफसर की लापरवाही के कारण राहत नहीं मिली है। इससे परेशान व्यापारियों ने अब महापौर व निगमायुक्त से मिलने की तैयारी शुरू की है।

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