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जब रजिस्ट्री और लोन सरकारी थे: तो अब मकान अवैध कैसे; अंधा प्रशासन, उजड़ते आशियाने

KHULASA FIRST

संवाददाता

07 अप्रैल 2026, 5:49 pm
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जब रजिस्ट्री और लोन सरकारी थे

300 परिवारों पर प्रशासन की दोहरी मार, सरकारी मुहर पर भरोसा करने वालों को अब बेघर करने की तैयारी

रहवासियों ने रखा अपना पक्ष

चंचल भारतीय 98936-44317 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर की कृष्ण बाग कॉलोनी के 300 परिवारों के आशियानों पर आज बेदखली का जो खतरा मंडरा रहा है, उसने प्रशासनिक शुचिता और सरकारी तंत्र की नीयत पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिला प्रशासन अब इन मकानों को अवैध और इनकी रजिस्ट्रियों को फर्जी बताकर अपना पल्ला झाड़ रहा है, वहीं रहवासियों का कहना है जब हम अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर रजिस्ट्री करा रहे थे और सरकारी बैंक हमें लोन बांट रहे थे, तब यह नियम-कायदे बताने वाला प्रशासन क्या सोया था?

यह पूरा मामला केवल जमीन के मालिकाना हक का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र द्वारा आम नागरिक के साथ किए गए उस विश्वासघात का है, जिसमें मध्यमवर्गीय परिवारों ने अपनी पूरी जमापूंजी झोंक दी थी।

प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि जिस निर्माण को आज अतिक्रमण बताया जा रहा है, उसी के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय ने सरकारी मुहर लगाकर दस्तावेज पंजीकृत किए और सालों तक नगर निगम टैक्स भी वसूलता रहा। यहां तक कि सरकारी और निजी बैंकों ने भी कागजों की जांच के बाद ही लोन स्वीकृत किए।

रहवासियों का आरोप है कि बिल्डर ने रसूख के बल पर तथ्यों को छिपाया और अधिकारियों की मौन सहमति से यह पूरा मायाजाल बुना गया, जिसकी कीमत अब वे परिवार चुका रहे हैं, जिन्होंने नियम-कायदों के दायरे में रहकर अपने आशियाने बनाए।

रहवासी पहुंचे कलेक्टोरेट, लगाई न्याय की गुहार
वर्तमान में मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है, जहां से रहवासियों को अंतरिम राहत मिली हुई है। कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि बिना विधिसम्मत सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया पूरी किए किसी भी परिवार के विरुद्ध कोई कठोर कार्रवाई न की जाए।

इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन द्वारा बार-बार जारी किए जा रहे नोटिस और मानसिक दबाव ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। इसी के चलते सोमवार को बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और मांग की कि जांच उन रसूखदारों और लापरवाह अफसरों के खिलाफ होनी चाहिए, जिन्होंने इस फर्जीवाड़े को संरक्षण दिया, न कि उन परिवारों पर, जो आज अपनी छत बचाने के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हैं।

कलेक्टोरेट पहुंचे रहवासियों में दुलारी मोहनिया, सुनीता चौहान, पप्पू राठौर, बबलू पंवार, रुक्मिणी बाई, जगदीशप्रसाद कुमावत, लक्ष्मी सोनी, रीना प्रजापत, धापूबाई पाटीदार, भगवान डांगी, राजेश भट्ट, राजमल कदम, रजनी राठौर, किरण कौशल, सोनू शुक्ला, मीरा यादव, मोना अग्रवाल, भगतसिंह करोले, श्याम सिलावट, शैलेंद्र गुप्ता, मंजूदेवी गुप्ता, आशा, विमला पटेल, राजेश मालाकार, मुन्नी गुप्ता, नरेश मुंद्रे, रामकिशोर यादव, रीता गुप्ता, रूबी गुप्ता, कमल सिंह, विनोद विश्वकर्मा, अनिल चौहान, प्रेमलता अग्रवाल, शांतिबाई, गायत्री गुप्ता, राजेंद्र राठौर, नवल सिंह, कमलेश सिमरिया, हर्षिता राठौर, मोनिका पाटिल, जानकीबाई अलावे, सुशीलाबाई झा, भीमराव भिड़े, कालूराम सांगते, कैलाश रैकवार, संतोष मालवीय, कमलाबाई भालसे, ममता राठौर, जितेंद्र गांगले, जितेंद्र भामदरे, ललिता चौहान, रमेश भोमराज, इसराम इंगले, बेबीबाई बलसे, रामाबाई कानड़े, सुहागवती डाक्से, देवकी, रेखाबाई साखले, उर्मिला करोले, विजय यादव, पूनम पंवार और पोपसिंह अहिरवार शामिल थे।

कागजों की निष्पक्ष रूप से हो जांच
हम कृष्ण बाग कॉलोनी में 20 साल से रह रहे हैं। अब श्रीराम बिल्डर आकर इस जमीन पर अपना हक जता रहा है। उसने कोर्ट में फर्जी दस्तावेज लगाकर केस जीत लिया और हमें नोटिस दे रहा है। हम सरकार से बस इतना चाहते हैं कि हमारे और उनके कागजों की ठीक से जांच की जाए।

हमारे पास वैध रजिस्ट्री है, पानी-बिजली के बिल सहित टैक्स भी समय पर भर रहे हैं। अगर यह कॉलोनी अवैध थी, तो सरकार अब तक हमसे टैक्स क्यों और कैसे वसूलती रही? हमने कलेक्टर, विधायक, पार्षद और मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई, लेकिन हर जगह से यही जवाब मिलता है कि कोर्ट के मामले में कुछ नहीं किया जा सकता। -ममता चौहान, रहवासी

सरकार हमें न्याय दिलाए
मैं कृष्ण बाग कॉलोनी में 10 साल से रह रहा हूं। श्रीराम बिल्डर्स के नोटिस लगातार आ रहे हैं और हमें बेघर करने की कोशिश की जा रही है। जब हमने मकान बनाए थे, तब क्या बिल्डर सो रहा था? इतने मकान बन गए, बिजली कनेक्शन हो गए, हम नल का बिल भर रहे हैं, बिजली का बिल भर रहे हैं, टैक्स भर रहे हैं।

अब हमारी गुहार कोई नहीं सुन रहा है। सरकार से यही गुहार है कि हमें न्याय दिलाया जाए। -विजेंद्र राठौड़, रहवासी

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