जब पहाड़ संवाद करते हैं हिमालय की उस अनकही भाषा की कहानी: जिसे विज्ञान नहीं, पढ़ता है अनुभव
KHULASA FIRST
संवाददाता

आसमान का व्याकरण और परिंदों की चेतावनी, अब हवा की एक सरसराहट भी सचेत कर देती है
हेमंत उपाध्याय 99930-99008 खुलासा फर्स्ट।
केदारनाथ की चोटियां जब सुबह की पहली सफेदी ओढ़ रही होती हैं, तब वहां एक अलग ही ‘बुलेटिन’ जारी होता है। यह बुलेटिन किसी उपग्रह या सेंसर से नहीं, बल्कि उन अनुभवी फेफड़ों से निकलता है जिन्होंने दशकों तक हिमालय की बर्फीली हवाओं को जिया है।
जब कोई वृद्ध पहाड़ी आसमान के स्लेटी होते रंग को देख अपनी लाठी टेककर ठहर जाता है, तो समझ लीजिए कि कुदरत ने अपना ‘सिग्नल’ भेज दिया है। हिमालय के इन रास्तों पर विज्ञान अभी छोटा है और वह ‘लोक-बोध’ कहीं बड़ा, जो हवा की थपक, पंक्षियों की उड़ान और पत्थरों की तासीर से आने वाले संकट को भांप लेता है। इस वर्ष की इस आधुनिक चार धाम यात्रा के शोर में भी, यहां आज भी पहाड़ अपनी एक गुप्त भाषा में बात करते हैं। आवश्यकता बस उस कान की है जो इन संकेतों के व्याकरण को समझ सके।
किसी सर्द सुबह जब केदारनाथ के आधार शिविर में सूरज की पहली किरण ने दस्तक भी नहीं दी है। चारों ओर एक रहस्यमयी सन्नाटा है, जिसे केवल मंदाकिनी नदी की दूर से आती गर्जना तोड़ रही है। तभी एक बुजुर्ग गाइड, जिनके चेहरे की झुर्रियों में हिमालय के कई दशकों का भूगोल दर्ज है, अपने हाथ की लाठी को जमीन पर पटकते हुए धीरे से कहता है कि आज घोड़ों को नीचे ही रहने दो, ऊपर की हवा में आज सोंधापन नहीं, बल्कि नमी की चुभन है।
बाबा आज एकांत चाहते हैं। यह कोई मौसम विभाग का बुलेटिन नहीं, बल्कि एक ऐसा संवाद है जो पहाड़ और वहां के बाशिंदों के बीच सदियों से चला आ रहा है। यहां पहाड़ वाकई बोलते हैं, शर्त बस इतनी है कि उन्हें सुनने वाला चाहिए।
प्रकृति की अपनी वर्णमाला, जब पक्षी और हवा संकेत देते हैं... चारधाम की कठिन चढ़ाइयों पर मौसम किसी नटखट बच्चे की तरह है। एक पल में खिली हुई धूप और अगले ही पल जानलेवा बर्फबारी,लेकिन गंगोत्री और यमुनोत्री की घाटियों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए यह ‘अचानक’ नहीं होता।
उनके पास प्रकृति की अपनी एक वर्णमाला है। वे बताते हैं कि यदि सुबह के वक्त हवा ठंडी होने के बजाय चिपचिपी और बोझिल लगने लगे, तो यह इस बात का संकेत है कि दोपहर तक बादल गरजेंगे। यदि कस्तूरी मृग या स्थानीय पक्षी अचानक नीचे की ओर रुख करने लगें, तो समझ लीजिए कि ऊंची चोटियों पर मौसम ने करवट बदल ली है। यह वह ज्ञान है जो किसी यूनिवर्सिटी में नहीं पढ़ाया जाता, बल्कि हिमालय की गोद में संघर्ष करते हुए पीढ़ियों ने सीखा है।
धड़कते पत्थर और रिसती जमीन... चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था की परीक्षा नहीं, बल्कि भौगोलिक चुनौतियों का महाकुंभ है। यहां हर पत्थर और हर ढलान कुछ कहती है। यमुनोत्री मार्ग पर खच्चर चलाने वाले युवा अब पहले से कहीं अधिक सतर्क हैं।
वे जानते हैं कि यदि किसी चट्टान के नीचे से अचानक पानी रिसने लगे या रास्ते पर छोटे-छोटे कंकड़ बिना किसी हवा के गिरने लगें, तो इसका मतलब है कि पहाड़ के भीतर कोई हलचल हो रही है।
यह भूस्खलन की पहली आहट होती है। स्थानीय लोग पत्थरों की ‘पकड़’ को पैरों के स्पर्श से पहचान लेते हैं। एक ऐसा विज्ञान जो भारी-भरकम मशीनों के पास भी नहीं है।
13 वर्षों का सबक... जून 2013 की उस भीषण त्रासदी ने पहाड़ों को सुनने का दृष्टिकोण पूरी तरह बदल दिया है। उस काली रात से पहले कई संकेतों को ‘पहाड़ का मिजाज समझकर अनदेखा कर दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
आज केदारनाथ मार्ग पर खड़ा हर छोटा कर्मचारी भी अब हवा की दिशा बदलने पर सचेत हो जाता है। एक बुजुर्ग तीर्थ पुरोहित कहते हैं कि पहाड़ ने 13 साल पहले हमें अपनी ताकत दिखाई थी, अब हम उसकी बात अनसुनी करने की गलती नहीं करते।
अब अगर बादलों का रंग गहरा स्लेटी होने लगे, तो हम भक्तों को मंदिर की सुरक्षा दीवार के पास ही रोक देते हैं। आज के यात्री के हाथ में 5- G इंटरनेट, हाई-टेक मौसम ऐप और जीपीएस है। अक्सर ये तकनीकें पहाड़ की स्थानीय सूक्ष्मता को पकड़ने में नाकाम रहती हैं।
अनुभव बताते हैं कि जब बद्रीनाथ के पास कोई चायवाला, जो रोज सुबह नीलकंठ चोटी को देखकर दिन की भविष्यवाणी करता है, मुस्कुराकर कहता है-मोबाइल में सूरज दिख रहा है, लेकिन चोटी पर जमी धुंध बता रही है कि दो घंटे बाद यहां रैनकोट की आवश्यकता पड़ेगी। यह दूरी केवल तकनीक की नहीं, बल्कि विश्वास की है। स्थानीय लोग पहाड़ को ‘पढ़ते’ हैं, जबकि यात्री उसे केवल ‘देखते’ हैं।
प्रकृति के विराट स्वरूप के साथ एक मौन संवाद... चारधाम की यह यात्रा केवल मीलों का फासला तय करना नहीं है, बल्कि प्रकृति के विराट स्वरूप के साथ एक मौन संवाद है।
संबंधित समाचार

राजघराना संपत्ति विवाद:इनकी आपत्ति पर सुनवाई; इस तारीख को पेश करने होंगे सबूत

चर्चित हत्याकांड में फैसला:प्रेमी और प्रेमिका को मिली फांसी की सजा; कोर्ट में आरोपी बोली- मेरी बच्चियों का ध्यान रखना

मेन रोड पर बिना अनुमति पंडाल लगाने पर हाईकोर्ट सख्त:डीसीपी को किया तलब; अदालत ने पूछा- जब मंजूरी नहीं ली तो सड़क कैसे ब्लॉक हुई?

चार महीने से ज्वाइनिंग का इंतजार:अपर कलेक्टर को संभागायुक्त का नोटिस; तीन दिन में जवाब देने के निर्देश

देखिए वीडियो, शराब पीकर गाली-गलौज और महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करने का आरोप:रहवासियों ने थाने में की शिकायत

आईडीए की इस स्कीम से मुक्त होंगे इतने हजार प्लॉटधारक!:मुख्यमंत्री से होगी जल्द चर्चा, विधायक की पीड़ितों के साथ बेैठक के बाद आंदोलन स्थगित

नए नल कनेक्शन पर रोक:कॉलोनियों को भी नहीं मिलेगा नर्मदा का बल्क कनेक्शन; कम बारिश के बीच नगर निगम का फैसला

देखिए वीडियो, दीपावली से पहले लाड़ली बहनों को तोहफा:सीएम डाॅ. मोहन यादव ने जारी की योजना की किस्त

करोड़पति हेड कांस्टेबल बेनकाब:लोकायुक्त इंदौर-उज्जैन पुलिस की छापेमारी

प्लॉट और फ्लैट के नाम पर 72 लाख की चपत:एरोड्रम में रजिस्ट्री के नाम पर धोखाधड़ी; दोस्त का दिया चेक हो गया बाउंस, फेसबुक लिंक से भी ठगी

12.33 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ पकड़े गए तस्कर का साथी भी हुआ गिरफ्तार:रिषभ से पूछताछ में मयंक उर्फ कृष्णा के नाम का खुलासा

सज्जन वर्मा ने नशे के धंधे पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को दी नसीहत:पद से इस्तीफा दे दो; दोनों मिलकर लड़ेंगे जनता की लड़ाई

सिंधिया राजघराने की 41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद फिर उलझ गया

मेट्रोपॉलिटन सिटी में बदल रहा है मालवा:मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- सिंहस्थ 2028 के लिहाज से इंदौर-उज्जैन में होटल सुविधाएं जरूरी

माता और महाकाल के जयघोष के साथ महाप्रसादी का वितरण:नवरात्रि महापर्व के पावन अवसर पर 10 दिवसीय महोत्सव

राजस्थानी संस्कृति की झलक:बालिकाओं ने गरबा और नृत्य से दिखाई

इस योजना में जुड़ सकते हैं नए नाम:फिर खुल सकता है पोर्टल; मंत्री ने दिया बड़ा बयान, छूटी हुई महिलाओं की संख्या का आकलन करने के निर्देश

‘खम्मा रे खम्मा’ की धुन पर झूमे गरबा प्रेमी

मां कूष्मांडा:एक मुस्कान; जो अंधकार को सृष्टि में बदल देती है

स्कूली बालिकाओं का किया गया निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण:शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संयोगितागंज में फैमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया का आयोजन
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!