खूब करी गडकरी जी: करोड़ों की जमीन कौड़ियों के दाम छीन रहे अफसर
KHULASA FIRST
संवाददाता

कलेक्टर कार्यालय पर ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ आंदोलन
नेशनल हाईवे भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का आक्रोश, चार गुना मुआवजे की मांग
डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया, जिसके केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी साहब हैं। गडकरी साहब एक्सप्रेस हाईवे के सपने बेचकर राज्यों के माध्यम से किसानों की भूमि को कौड़ियों के दाम बिना किसान की सहमति लिए अरबों रुपया कमाने वाली टोल कंपनियों को टोल टैक्स के लिए देते हैं।
यही नहीं टोल नहीं देने वाले को अपराधी तक घोषित कर देते हैं। टोल कंपनियों से ऐसा प्रेम कि हाईवे पर टोल नहीं देने वालों को बुरी तरह से प्रताड़ित करवाया जाता है। यह सबकुछ गरीब, मेहनतकश किसानों की आजीविका और उनकी उपजाऊ खेती की भूमि को छीनकर किया जाता है।
इसके बदले में औने-पौने दाम पर मुआवजा थमा दिया जाता है। यह आरोप लगाते हुए आंदोलन कर रहे किसान कहते हैं कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी की मनमानी से किसानों के साथ लगातार अन्याय किया जा रहा है। कहीं पर भी किसानों की सुनवाई नहीं हो रही है, इसलिए भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में झाबुआ से लेकर धार तक किसान सड़कों पर आ गए हैं।
धार जिले के बदनावर से लेकर झाबुआ जिले के अंतिम छोर तक बनने वाले लगभग 80 किलोमीटर के नेशनल हाईवे के लिए लगभग 900 आदिवासी और सैकड़ों अन्य किसानों की जमीन अंधेरे में रखकर अधिग्रहित की जा रही है। बदले में शिवराज सरकार के काले कानून गुणांक 1 के अंतर्गत मात्र दोगुना मुआवजा दिया जा रहा है।
यह जानते हुए कि मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने इस काले कानून को निरस्त करते हुए किसानों के हित में चार गुना मुआवजे का कानून लागू कर दिया है। गडकरी जी के अधिकारियों और धार-झाबुआ के प्रशासन ने ऐसा खेल किया कि मुख्यमंत्री के चार गुना मुआवजा देने के कानून की घोषणा के ठीक पहले भूमि अधिग्रहण का अवार्ड घोषित कर दिया।
नतीजे में करोड़ों की जमीन का मुआवजा मात्र सवा लाख से लेकर 25 से 50 लाख तक का बना। सरकार की इस सुनियोजित रीति-नीति के खिलाफ किसान बीते दो माह से आंदोलन कर रहे हैं। वे मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी दे चुके हैं।
मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं...मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद भी किसानों की मांगों पर अधिकारी उचित कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। नतीजे में किसान आज से झाबुआ कलेक्टर कार्यालय पर अनिश्चितकालीन ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ आंदोलन शुरू कर रहे हैं।झाबुआ-बदनावर-टिमरवानी मार्ग निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर किसानों का असंतोष बढ़ रहा है।
अधिग्रहित कृषि भूमि के वास्तविक बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा मिले...भारतीय किसान संघ, मालवा प्रांत के झाबुआ जिला इकाई ने मुख्यमंत्री को दिए ज्ञापन में अधिग्रहित कृषि भूमि के वास्तविक बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने की मांग की है।
यह जानकारी देते हुए किसान संघ के संभागीय अध्यक्ष कृष्णपाल सिंह राठौड़ और जिला अध्यक्ष वृदचंद्र पाटीदार ने बताया कि किसानों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पांच प्रमुख मांगें रखी हैं, इसमें भूमि का पुनर्मूल्यांकन, वास्तविक बाजार दरों के आधार पर मुआवजा, बाजार मूल्य का चार गुना प्रतिकर, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं आजीविका संरक्षण के विशेष प्रावधान तथा मुआवजा निर्धारण में किसानों और उनके प्रतिनिधियों की भागीदारी शामिल हैं।
किसानों का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए अवार्ड केवल दो गुना आधार पर पारित किए जा रहे हैं, जबकि जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य इससे कहीं अधिक है। किसानों को कौड़ियों के दाम पर मुआवजा दिया जा रहा है।
आंदोलन का रास्ता अपनाएगा संघ... ज्ञापन में चेतावनी दी गई थी कि मांगों पर सात दिन में संतोषजनक निर्णय नहीं हुआ तो भारतीय किसान संघ किसानों के हित में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक आंदोलन का रास्ता अपनाएगा। इससे बदनावर-टिमरवानी मार्ग की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर प्रशासन के सामने किसानों के असंतोष को दूर करने की चुनौती बढ़ गई है।
झाबुआ जिला अध्यक्ष पाटीदार ने बताया कि कलेक्टर उनकी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार नहीं करते हुए सिर्फ परिसंपत्तियों के मूल्यांकन को बढ़ाकर देने की बात कर रहे हैं, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। किसान नेताओं का कहना है कि केंद्र के प्रोजेक्ट में गुणांक दो यानी चार गुना मुआवजे का प्रावधान स्पष्ट रूप से किया गया है।
खासकर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के भूमि अधिग्रहण नियम में इसका उल्लेख है, लेकिन गडकरी साहब ने मुआवजा राज्य के नियमों के तहत देने की नीति अपनाई है, जो किसान विरोधी है। भूमि के बदले दो गुना मुआवजा भी 20 साल पुरानी बेहद कम गाइडलाइन के आधार पर तय किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट में ली जाने वाली भूमि का मुआवजा कम से कम देना पड़े, इस कारण वर्षों से गाइडलाइन में नियम से बढ़ोतरी नहीं की गई, जिसके चलते करोड़ों की जमीन का मुआवजा कौड़ियों के दाम पर निर्धारित किया जा रहा है।
केंद्र के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग भूमि अधिग्रहण में मुआवजा 2013 के कानून के तहत निर्धारित होता है और निर्धारित बाजार मूल्य के आधार पर 2 से 4 गुना तक का प्रतिकर संभव है, इसलिए किसानों की चार गुना मांग को सीधे ‘कानूनी रूप से अनिवार्य चार गुना’ कहना सही नहीं होगा।
एनएच-752D के प्रस्तावित निर्माण के लिए कानूनी रूप से अधिग्रहित किए जाने की घोषणा की गई। इसका अर्थ है अधिसूचना में दर्ज जमीनों को एनएच-752D के प्रस्तावित निर्माण के लिए कानूनी रूप से अधिग्रहित किए जाने की घोषणा हो गई है।
अब प्रभावित जमीन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज वह 3जी अवार्ड/मुआवजा निर्धारण आदेश होगा, जिसमें जमीन का बाजार मूल्य, लागू गुणांक, भवन/फसल/पेड़ आदि की कीमत और अन्य देय मुआवजे की वास्तविक राशि निर्धारित होती है।
खेसारी प्रक्रिया इतनी तेजी से अपनाई गई कि किसानों को पता ही नहीं चला और प्रशासन ने मुआवजा घोषित कर मुआवजा राशि का आवंटन भी शुरू कर दिया, जबकि इसके एक महीने बाद ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश में भूमि अधिग्रहण के बदले चार गुना मुआवजा गाइडलाइन बाजार मूल्य के आधार पर देने की घोषणा और नीति लागू की। इस अवार्ड की घोषणा के साथ ही जमीन का बाजार मूल्य, लागू गुणांक,भवन/फसल/पेड़ आदि की कीमत और अन्य देय मुआवजे की वास्तविक राशि निर्धारित किया जा रहा है।
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