वीडियो देखिये, तीर्थ नगरी को सबसे स्वच्छ शहर को ‘गोद’ देने के बयान पर सियासी घमासान: विधायक के सुझाव से गरमाई राजनीति; लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, खंडवा।
देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल पवित्र तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को लेकर भाजपा विधायक नारायण पटेल के एक बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच विधायक ने सुझाव दिया कि ओंकारेश्वर के बेहतर विकास, स्वच्छता और व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए इसे इंदौर नगर निगम के "गोद" दे दिया जाना चाहिए।
बयान सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। कांग्रेस ने इसे भाजपा सरकार की नाकामी का प्रमाण बताया, जबकि भाजपा सांसद ने इसे विकास और बेहतर प्रबंधन की दिशा में दिया गया सकारात्मक सुझाव करार दिया है।
सिंहस्थ-2028 से पहले विकास मॉडल पर छिड़ी बहस
आगामी सिंहस्थ महापर्व को देखते हुए ओंकारेश्वर में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, स्वच्छता व्यवस्था, पार्किंग, यातायात प्रबंधन, आवासीय सुविधाओं और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। ऐसे समय में विधायक का यह सुझाव सामने आने से विकास मॉडल और प्रशासनिक व्यवस्था पर नई बहस शुरू हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाले तीर्थस्थल के लिए किसी दूसरे शहर की प्रशासनिक विशेषज्ञता लेने की बात अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।
विकास कार्यों को लेकर दिया बयान
मीडिया से चर्चा के दौरान विधायक नारायण पटेल से वर्ष 2020 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने और विकास कार्यों के वादों को लेकर सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लगातार विकास कार्य हो रहे हैं और कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं प्रगति पर हैं।
उन्होंने दावा किया कि लंबे समय से लंबित खंडवा-मूंदी सड़क परियोजना पर भी जल्द काम शुरू होगा। इसी दौरान ओंकारेश्वर के विकास को लेकर उन्होंने इंदौर के अनुभव का लाभ लेने का सुझाव दिया, जो बाद में राजनीतिक विवाद का कारण बन गया।
कांग्रेस ने कहा- यह भाजपा की विफलता का प्रमाण
उत्तमपाल सिंह ने विधायक के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर नगर परिषद, प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार तीनों स्तरों पर भाजपा का नियंत्रण है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब स्थानीय निकाय से लेकर राज्य और केंद्र तक भाजपा की सरकार है, तब विकास और व्यवस्थाओं के लिए दूसरे शहर की मदद की बात करना यह दर्शाता है कि सरकार अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर पा रही है।
कांग्रेस का आरोप है कि यदि भाजपा अपने शासनकाल में ओंकारेश्वर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल का विकास नहीं कर पा रही है, तो जनता के सामने विकास के दावों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
भाजपा सांसद ने किया समर्थन
दूसरी ओर ज्ञानेश्वर पाटिल विधायक के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर नगर निगम देशभर में स्वच्छता, शहरी प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं के संचालन में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करता रहा है।
सांसद का कहना है कि यदि इंदौर की विशेषज्ञता, संसाधन और प्रबंधन मॉडल का लाभ ओंकारेश्वर को मिलता है, तो इससे तीर्थनगरी के विकास और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को गति मिल सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि विधायक का सुझाव राजनीतिक नहीं बल्कि बेहतर प्रबंधन और विकास की सोच से जुड़ा हुआ है। साथ ही विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का प्रयास करता है।
सोशल मीडिया पर भी बंटी राय
विधायक के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे विकास और आधुनिक प्रबंधन की दिशा में सकारात्मक सोच बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे स्थानीय प्रशासन और शासन व्यवस्था पर अविश्वास के रूप में देख रहे हैं।
कई नागरिकों का मानना है कि ओंकारेश्वर जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले नगर का विकास स्थानीय संस्थाओं को मजबूत बनाकर किया जाना चाहिए, जबकि कुछ लोग इंदौर मॉडल को अपनाने के पक्ष में भी नजर आ रहे हैं।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है सियासी गर्मी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और ओंकारेश्वर के विकास को लेकर यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी का दौर तेज होने की संभावना है।
फिलहाल, विधायक नारायण पटेल का एक सुझाव विकास, प्रशासनिक मॉडल और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बड़ी बहस का कारण बन गया है। अब देखना यह होगा कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहता है या ओंकारेश्वर के विकास के लिए किसी नई कार्ययोजना का आधार बनता है।
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