अयोध्या में टूरिज्म को झटका कारोबार पड़ा धीमा: राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या घटी, होटलों में ऑक्यूपेंसी गिरी, व्यापारियों में चिंता की लहर
KHULASA FIRST
संवाददाता

रामनगरी अयोध्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही में कमी का असर स्थानीय कारोबार पर दिखाई देने लगा है। राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद होटल, प्रसाद, फूल-माला और परिवहन से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि उनकी आमदनी प्रभावित हुई है। हालांकि श्रद्धालुओं की आस्था अब भी कायम है और दर्शन व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक सुगम नजर आ रही है। रामपथ क्षेत्र के दुकानदारों के अनुसार, पहले की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम हुई है। प्रसाद और पूजा सामग्री बेचने वाले व्यापारियों का कहना है कि जहां पहले प्रतिदिन हजारों रुपये की बिक्री हो जाती थी, वहीं अब कमाई काफी घट गई है। फूल-माला विक्रेताओं और ई-रिक्शा चालकों ने भी कारोबार में गिरावट की बात कही है।
खुलासा फर्स्ट, अयोध्या ।
व्यापारियों का कहना है कि पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते थे, जिससे होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी और छोटे दुकानदारों को सीधा लाभ मिलता था। अब कई दुकानदारों की बिक्री में भारी कमी आई है। रामपथ क्षेत्र के कुछ रेस्टोरेंट संचालकों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से ग्राहकों की संख्या कम हुई है। उन्होंने इसके पीछे चढ़ावा विवाद के साथ-साथ बारिश और स्कूल खुलने जैसे कारणों को भी जिम्मेदार बताया। होटल कारोबार पर भी इसका असर पड़ा है। अयोध्या होटल एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, मिड-सेगमेंट होटलों की ऑक्यूपेंसी में गिरावट आई है।
कई यात्रियों का कहना है कि दर्शन के लिए लगने वाला समय पहले की तुलना में कम हुआ है। संत समाज में अलग-अलग राय... चढ़ावा विवाद को लेकर अयोध्या के संत समाज में भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ संतों का कहना है कि यह व्यवस्था से जुड़ी समस्या है, जबकि कुछ ने मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में बदलाव की मांग उठाई है। कुछ संतों ने दोषियों पर कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि कुछ व्यक्तियों की गलती को पूरे संस्थान से जोड़ना उचित नहीं है। वहीं, कुछ अन्य संतों ने ट्रस्ट में अधिक धार्मिक प्रतिनिधित्व और व्यवस्थागत सुधार की आवश्यकता बताई है।
राजनीतिक मुद्दा भी बना विवाद... राम मंदिर से जुड़ा विवाद अब धार्मिक और प्रशासनिक मुद्दे के साथ-साथ राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। विपक्ष ने इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा और उससे जुड़े संगठन जांच और कार्रवाई के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को देखते हुए यह मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की ओर से दोषियों पर कार्रवाई और व्यवस्था में सुधार के कदमों को सामने रखा जा रहा है। फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और मंदिर प्रशासन की ओर से सुरक्षा, पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
कई बैंक कर्मचारी जांच के दायरे में... राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच का दायरा बढ़ रहा है। एसआईटी और पुलिस जांच के साथ अब भारतीय स्टेट बैंक ने भी अपनी आंतरिक जांच तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि इस विभागीय जांच के दायरे में करीब दर्जन भर बैंक कर्मचारी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई और चढ़ावा गणना व्यवस्था को लेकर निर्णय लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, एसबीआई अपनी आंतरिक व्यवस्था और कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा कर रहा है।
बैंक की यह जांच ऐसे समय में हो रही है, जब एसआईटी की नई जांच टीम भी मामले की पड़ताल में जुटने वाली है। बैंक प्रबंधन अपनी स्थिति स्पष्ट करने और प्रक्रियाओं की समीक्षा करने में लगा है। मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जांच में चढ़ावा गणना प्रक्रिया, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और इसमें शामिल एजेंसियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है। बैंक के भीतर चर्चा है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ बैंक नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में पुलिस पहले ही कुछ संदिग्ध बैंक कर्मचारियों से पूछताछ कर चुकी है। वहीं, एसबीआई की जांच रिपोर्ट का इंतजार मंदिर ट्रस्ट और जांच एजेंसियों को भी है।
ट्रस्ट और बैंक के रिश्तों पर असर...चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और एसबीआई के बीच संबंधों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ट्रस्ट की बैठकों में बैंक की भूमिका और प्रतिक्रिया को लेकर असंतोष की बात सामने आई है। ट्रस्ट की ओर से बैंक के साथ मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा के संकेत दिए गए हैं। ट्रस्ट की वित्त समिति को बैंक के साथ संबंधों और भविष्य की व्यवस्था पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया है।
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