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वंदे मातरम् विवाद प्रदेश की राजनीति में गूंजा: भाजपा अध्यक्ष बोले- यह शहीदों का अपमान; कांग्रेस पार्षद के खिलाफ एफआईआर करवाएगी भाजपा

KHULASA FIRST

संवाददाता

09 अप्रैल 2026, 11:26 am
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वंदे मातरम् विवाद प्रदेश की राजनीति में गूंजा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर नगर निगम में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश स्तर की राजनीति में गूंजने लगा है। कांग्रेस पार्षदों द्वारा गीत गाने से इनकार के बाद भाजपा ने इसे शहीदों का अपमान बताते हुए कड़ा रुख अपनाया है, जिससे राजनीतिक बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। वहीं इस मामले में भाजपा पार्षदों का कहना है कि इस प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

इंदौर नगर निगम में बुधवार को बजट चर्चा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ को लेकर उत्पन्न विवाद ने सियासी माहौल को गरमा दिया। कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल द्वारा ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार किए जाने के बाद सदन में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

सभापति के निर्देश पर जब ‘वंदे मातरम्’ गाने की बात कही गई, तो पार्षद फौजिया शेख ने सवाल उठाया कि वह कौन-सा कानून या अधिनियम है, जिसमें इसे अनिवार्य किया गया है। इस पर भाजपा पार्षदों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए सभापति मुन्नालाल यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने फौजिया शेख को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए।

विवाद यहीं नहीं थमा। सदन की कार्यवाही समाप्त होने के बाद पार्षद रुबीना इकबाल ने मीडिया से बातचीत में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे किसी प्रकार की “दादागीरी” स्वीकार नहीं करेंगी। उनके इस बयान ने विवाद को और अधिक तूल दे दिया।

इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा ने कड़ा रुख अपनाया है। भाजपा पार्षदों का कहना है कि इस मामले में संबंधित पार्षदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भिंड में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इंदौर की इस घटना ने उन शहीदों का अपमान किया है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया।

उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि आजादी के 75 वर्षों बाद भी पार्टी ‘वंदे मातरम्’ और देशभक्ति की भावना से खुद को पूरी तरह नहीं जोड़ पाई है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस नेतृत्व अपने पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।

भाजपा के प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट डॉ. प्रेम व्यास ने इस मुद्दे को वैचारिक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा कि देश में दो प्रकार की मानसिकता देखने को मिलती है—एक, जो मोहम्मद अली जिन्ना की विचारधारा से प्रेरित है, और दूसरी, जो अशफाकउल्ला खां जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की सोच को मानती है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ से जुड़ाव रखने वाले लोग देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत होते हैं, जबकि जिन्ना की विचारधारा से प्रभावित लोगों को इससे स्वाभाविक रूप से आपत्ति होती है।

वहीं, भाजपा के नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ का इतिहास स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा हुआ है और इसे कांग्रेस के ही राष्ट्रीय अधिवेशनों में गाया जाता रहा है। उन्होंने महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और अशफाकउल्ला खां जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी इस गीत से प्रेरणा लेते थे।

सुमित मिश्रा ने कांग्रेस की नीतियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति के कारण ही देश का विभाजन हुआ और ‘वंदे मातरम्’ का विरोध सबसे पहले मोहम्मद अली जिन्ना ने किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज भी इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपना पा रही है।

अंत में भाजपा की ओर से यह मांग भी उठाई गई कि कांग्रेस यदि ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान करती है, तो उसे इस विरोध में शामिल पार्षदों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। कुल मिलाकर, ‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब वैचारिक टकराव, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और संगठनात्मक दबाव का बड़ा मुद्दा बन चुका है, जिसका असर आने वाले समय में और गहरा सकता है।

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