वंदे मातरम् विवाद से कांग्रेस में गहराई गुटबाजी: पार्षद का सनसनीखेज आरोप; किसने कहा- यह सोची समझी राजनीतिक रणनीति, महापौर के साथ हुई डील
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर नगर निगम के बजट सत्र के दौरान शुरू हुआ ‘वंदे मातरम्’ विवाद अब केवल राष्ट्रीय गीत के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और गुटीय संघर्ष का प्रतीक बनता जा रहा है। सतह पर यह राष्ट्रवाद और परंपरा का मुद्दा दिखता है, लेकिन इसके पीछे पार्टी के भीतर नेतृत्व, पद और प्रभाव को लेकर चल रही खींचतान खुलकर सामने आ गई है।
इंदौर नगर निगम में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर उठा विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस के भीतर ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, जिससे पार्टी की आंतरिक कलह उजागर हो रही है। इस पूरे विवाद के केंद्र में कांग्रेस नगर अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे तथा पार्षद फौजिया शेख अलीम के बीच पुराना मतभेद बताया जा रहा है। चौकसे समर्थक पार्षद राजू भदौरिया ने फौजिया शेख पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरा मामला एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
भदौरिया का दावा है कि फौजिया शेख और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के बीच किसी तरह की राजनीतिक समझ या ‘डील’ हुई है, जिसके तहत यह विवाद खड़ा किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यक्तिगत और राजनीतिक हितों के लिए सिद्धांतों से समझौता किया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फौजिया शेख के पति शेख अलीम बार काउंसिल का चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं और इस मुद्दे को धार्मिक भावनाओं से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।
भदौरिया ने यह भी याद दिलाया कि फौजिया शेख पहले कई मौकों पर ‘वंदे मातरम्’ के दौरान सम्मानपूर्वक खड़ी रही हैं और इसे गाया भी है। ऐसे में इस बार उनका विरोध करना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि फौजिया जानबूझकर बैठक में देर से पहुंचीं, जबकि उनका सवाल चर्चा की शुरुआत में ही शामिल था।
उन्होंने यह भी कहा कि जब उनसे ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सवाल किया गया, तो वे चाहतीं तो शांतिपूर्वक मना कर सकती थीं, लेकिन उन्होंने तीखी भाषा का इस्तेमाल किया, जिसकी उस समय कोई आवश्यकता नहीं थी। भदौरिया के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम एक रणनीति के तहत रचा गया, ताकि बजट और शहर के अहम मुद्दों पर चर्चा को भटकाया जा सके।
दूसरी ओर, भोपाल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से जब इस मुद्दे पर सवाल किया गया, तो उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा कि राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के सम्मान पर किसी को आपत्ति नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी इस मामले पर उचित समय पर निर्णय लेगी, लेकिन कब तक फैसला होगा, यह बताना आवश्यक नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, इंदौर कांग्रेस में लंबे समय से दो गुट सक्रिय हैं-एक का नेतृत्व चिंटू चौकसे कर रहे हैं, जबकि दूसरा गुट फौजिया शेख और उनके समर्थकों का है। विवाद की एक बड़ी वजह नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर खींचतान भी मानी जा रही है। फौजिया शेख पहले इस पद पर रह चुकी हैं और उनका गुट चाहता है कि उन्हें दोबारा यह जिम्मेदारी दी जाए। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब दोनों पक्षों के बीच टकराव सामने आया हो। इससे पहले मई 2023 में भी चिंटू चौकसे और शेख अलीम के बीच तीखा विवाद हुआ था, जो हाथापाई तक पहुंच गया था।
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