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वंदे मातरम् विवाद: खुलकर सामने आए मतभेद; नेताओं के अलग-अलग बयान, अब जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार

KHULASA FIRST

संवाददाता

16 अप्रैल 2026, 11:38 am
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वंदे मातरम् विवाद

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर में वंदे मातरम् विवाद के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पार्टी के दिग्गज नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आने से संगठन दो खेमों में बंटता नजर आ रहा है। अब इस पूरे मामले में कांग्रेस द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, वहीं पुलिस ने भी केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा विवाद
इंदौर नगर निगम के 8 अप्रैल को हुए बजट सत्र के दौरान कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम देरी से पहुंचीं। इस पर बीजेपी पार्षदों ने आरोप लगाया कि वह वंदे मातरम् गाने से बचने के लिए देर से आईं। जवाब में फौजिया ने कहा कि संविधान में कहीं भी वंदे मातरम् गाना अनिवार्य नहीं है। इसी दौरान पार्षद रुबीना इकबाल खान ने भी विवादित बयान देते हुए कहा कि “किसी के बाप में हिम्मत नहीं जो जबरदस्ती वंदे मातरम् बुलवा सके।” इसके बाद मामला राजनीतिक तूल पकड़ गया।

नेताओं के बयानों से बढ़ा विवाद
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इसे बीजेपी की “कुटिल साजिश” बताते हुए कहा कि यह मुद्दा हिंदू-मुस्लिम के बीच विभाजन पैदा करने के लिए उठाया गया है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि वंदे मातरम् न गाना संवैधानिक अधिकार हो सकता है, लेकिन इस तरह का बयान देना उचित नहीं है और पार्टी इस पर कार्रवाई करेगी।

उमंग सिंघार ने कही ये बात, सज्जन का ये बयान
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने समय रहते कार्रवाई की जरूरत बताई, जबकि पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि किसी भी कार्रवाई से पहले पार्षदों को नोटिस देकर उनका पक्ष सुना जाना चाहिए।

तीन बयान शहर कांग्रेस अध्यक्ष के
शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने इस मामले में तीन अलग-अलग बयान दिए। पहले इसे पार्षदों की व्यक्तिगत राय बताया, फिर सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई की बात कही, और बाद में राष्ट्रवाद व सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

केके मिश्रा ने कही ये बात
प्रवक्ता केके मिश्रा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो राष्ट्रधर्म नहीं निभा सकते, उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। वहीं डॉ. अमीनुल सूरी ने वंदे मातरम् के सम्मान की बात तो कही, लेकिन इसे अनिवार्य करने का विरोध किया।

पार्षदों का पक्ष
फौजिया शेख ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि वह हमेशा राष्ट्रगीत का सम्मान करती रही हैं, लेकिन संविधान किसी को इसे गाने के लिए बाध्य नहीं करता। वहीं रुबीना खान ने अपने बयान पर खेद जताते हुए कहा कि उनसे शब्दों की गलती हुई और वह हमेशा राष्ट्रगान व राष्ट्रगीत का सम्मान करती हैं।

कानूनी कार्रवाई भी शुरू
निगम सभापति मुन्नालाल यादव और बीजेपी पार्षद कमल वाघेला की शिकायत पर पुलिस ने दोनों पार्षदों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में सामाजिक वैमनस्य फैलाने और सामूहिक अपराध से जुड़े प्रावधान शामिल हैं, जिनमें सजा का भी प्रावधान है।

जांच कमेटी गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस ने जांच कमेटी का गठन किया है। महेश चौधरी के निर्देश पर बनाई गई इस कमेटी में सह-प्रभारी संजय दत्त और उषा नायडू को शामिल किया गया है। कमेटी को 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है, जिसके आधार पर संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ राजनीतिक माहौल गरमा दिया है, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी वैचारिक मतभेद को उजागर कर दिया है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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