स्टेशन री-डेवलपमेंट पर रेलवे के दो फैसले: जीएम बोले सिंहस्थ बाद; चेयरमैन बोले अभी शुरू करो
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर रेलवे स्टेशन के 412 करोड़ रुपए के री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को लेकर रेलवे के स्तर पर ही स्थिति स्पष्ट नहीं नजर आ रही है।
ढाई महीने के भीतर रेलवे के दो बड़े अधिकारियों के इंदौर दौरे हुए और दोनों मौकों पर प्रोजेक्ट को लेकर अलग-अलग बातें सामने आईं।
जुलाई की शुरुआत में पश्चिम रेलवे के जीएम रामाश्रय पांडेय ने री-डेवलपमेंट का काम सिंहस्थ-2028 के बाद शुरू करने की बात कही थी। अब रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार के इंदौर दौरे के बाद काम दोबारा शुरू करने की बात सामने आई है।
रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल आगे की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऊपर से जो भी निर्णय होगा, उसका पालन किया जाएगा। अधिकारी ने यह भी माना कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए सिंहस्थ तक पूरा प्रोजेक्ट तैयार होना संभव नहीं है।
15 महीने में सिर्फ 8% काम
स्टेशन री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट दिसंबर 2024 में हुआ था और अप्रैल 2025 से काम शुरू किया गया। करीब 15 महीने बीतने के बावजूद अब तक महज 8 प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है।
काम की रफ्तार शुरुआत से ही धीमी रही है। अभी तक निर्माण मुख्य रूप से पार्सल ऑफिस और जीआरपी के आसपास के हिस्से तक सीमित रहा है। ऐसे में बड़े प्रोजेक्ट के समय पर पूरा होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
2 जुलाई को जीएम ने कहा था- सिंहस्थ के बाद होगा काम
पश्चिम रेलवे के जीएम रामाश्रय पांडेय ने 2 जुलाई को इंदौर दौरे के दौरान कहा था कि स्टेशन री-डेवलपमेंट का काम अब सिंहस्थ-2028 के बाद किया जाएगा।
उनके मुताबिक, रेलवे पहले नए शास्त्री ब्रिज का निर्माण करेगा। इसके बाद री-डेवलपमेंट और यार्ड रिमॉडलिंग का काम एक साथ करने की योजना है।
रेलवे का तर्क था कि पुराना री-डेवलपमेंट प्लान मौजूदा शास्त्री ब्रिज को ध्यान में रखकर बनाया गया था। अब नया ब्रिज मंजूर होने के बाद स्टेशन की पूरी प्लानिंग में बदलाव करना होगा।
नए शास्त्री ब्रिज से स्टेशन के कर्व खत्म होने की बात भी कही गई थी। रेलवे का मानना था कि री-डेवलपमेंट और ब्रिज का काम सिंहस्थ से पहले पूरा करना मुश्किल होगा और निर्माण के दौरान यात्रियों व श्रद्धालुओं को परेशानी हो सकती है।
अब चेयरमैन के दौरे के बाद फिर शुरू करने की बात
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार के इंदौर दौरे के बाद री-डेवलपमेंट का काम फिर शुरू करने की बात सामने आई है।
जुलाई में जीएम के स्तर पर काम सिंहस्थ के बाद करने की बात कही गई थी, जबकि अब रेलवे बोर्ड के स्तर से काम आगे बढ़ाने का संकेत मिला है।
इस बदलाव से रेलवे की कार्ययोजना और विभिन्न स्तरों पर लिए जा रहे फैसलों में तालमेल को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
‘पहले यार्ड रिमॉडलिंग पर फोकस जरूरी’
रेलवे एक्सपर्ट नागेश नामजोशी के मुताबिक, रेलवे को पूरे मामले की समीक्षा करनी चाहिए। फिलहाल सबसे जरूरी काम यार्ड रिमॉडलिंग का है।
उनके अनुसार, स्टेशन री-डेवलपमेंट को लेकर बार-बार बदलते फैसले यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या रेलवे के अलग-अलग स्तरों पर निर्णयों के बीच पर्याप्त समन्वय है।
उन्होंने कहा कि टीही टनल सहित इंदौर-दाहोद प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट शॉर्ट टर्मिनेट करना भी बड़ी गलती साबित हुआ था। करीब तीन किलोमीटर लंबी टनल का काम सात साल बाद भी पूरी तरह पूरा नहीं हो सका है।
सिंहस्थ तक जितना संभव होगा, उतना काम करेंगे
सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि स्टेशन री-डेवलपमेंट का काम अब फिर से शुरू होगा। सिंहस्थ तक जितना काम संभव होगा, उतना किया जाएगा।
हालांकि, सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए उस अवधि में निर्माण कार्य बंद रखा जाएगा।
सवाल यही- 412 करोड़ का प्रोजेक्ट कब पूरा होगा?
412 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट को शुरू हुए करीब 15 महीने हो चुके हैं, लेकिन काम सिर्फ 8 प्रतिशत तक पहुंचा है। एक तरफ सिंहस्थ-2028 करीब है, दूसरी तरफ रेलवे की ओर से काम रोकने और फिर शुरू करने को लेकर अलग-अलग संकेत मिल रहे हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मौजूदा रफ्तार और बदलती कार्ययोजना के बीच स्टेशन का री-डेवलपमेंट समय पर पूरा हो पाएगा?
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