जहरीली शराब कांड पर पटवारी का सीएम को पत्र: बोले- ‘मौत के बाद तबादला कार्रवाई नहीं; निलंबन न्याय नहीं और सरकारी बयान जवाबदेही नहीं’
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है।
पटवारी ने मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और जहरीली शराब के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की मांग की है।
पटवारी ने पत्र में कहा कि बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। उन्होंने दावा किया कि वे स्वयं पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचे और उनकी स्थिति देखी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर बार जहरीली शराब की घटना के बाद कुछ अधिकारियों के तबादले या निलंबन कर दिए जाते हैं, लेकिन मूल नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश नहीं होती।
‘मौतों से पहले कार्रवाई करने वाला तंत्र कहां था?’
पटवारी ने सवाल उठाया कि यदि अवैध शराब के कारोबार की सूचनाएं और शिकायतें पहले से मौजूद थीं तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि मौतों के बाद सक्रिय होने वाला प्रशासनिक तंत्र घटना से पहले कहां था।
उन्होंने वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर और आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना की जवाबदेही तय करने की मांग भी की।
पटवारी के मुताबिक, केवल अधिकारियों के तबादले या निलंबन से जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। जमीन पर मॉनिटरिंग और प्रभावी सुपरविजन किसकी जिम्मेदारी थी, इसका स्पष्ट जवाब सरकार को देना चाहिए।
कार्रवाई के आदेश में बदलाव पर भी सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पत्र में संदिग्ध शराब को लेकर विभागीय स्तर पर हुई जांच और कार्रवाई के बीच कथित विरोधाभासों का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि पहले कार्रवाई का आदेश और फिर उसमें बदलाव जैसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पटवारी ने मांग की कि सरकार यह सार्वजनिक करे कि किसके आदेश पर क्या फैसला लिया गया और उसमें बदलाव क्यों किया गया।
‘ललितपुर से सागर तक कैसे पहुंची शराब?’
पटवारी ने जहरीली शराब के नेटवर्क की जांच स्थानीय स्तर से आगे बढ़ाकर अंतरराज्यीय स्तर तक करने की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ललितपुर से सागर तक नकली या संदिग्ध शराब पहुंची तो मध्यप्रदेश की सीमा में उसे रोकने वाला तंत्र क्या कर रहा था।
उन्होंने गुजरात में हुई जहरीली शराब त्रासदी और उज्जैन से सामने आए कथित कनेक्शन का भी उल्लेख करते हुए सरकार से पूछा कि पिछली घटनाओं के बाद मध्यप्रदेश में क्या कदम उठाए गए।
संवेदनशील जिलों में विशेष जांच या नई गाइडलाइन लागू की गई या नहीं, सरकार को इसकी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
डिस्टलरी से गांव तक पूरी सप्लाई चेन की जांच की मांग
पटवारी ने प्रदेश की डिस्टलरियों को लेकर सामने आते रहे आरोपों की भी स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी डिस्टलरी से अवैध शराब के उत्पादन या आपूर्ति की कड़ी जुड़ती है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने डिस्टलरी, गोदाम, लाइसेंसी दुकान और गांव के अंतिम विक्रेता तक पूरी सप्लाई चेन की जांच करने की मांग की है, ताकि शराब के स्रोत और उसके वितरण नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
भाजपा नेताओं की कथित भूमिका की जांच की मांग
पत्र में पटवारी ने सागर के शराब कारोबार में स्थानीय भाजपा नेताओं की कथित भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों का भी जिक्र किया है।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भाजपा नेता या उससे जुड़े व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो राजनीतिक संरक्षण के नाम पर उसे बचाया नहीं जाना चाहिए।
आबकारी विभाग के संचालन को लेकर लगाए जा रहे ‘विंध्य कोठी से रिमोट कंट्रोल’ जैसे आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
पटवारी ने आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा की भूमिका और जवाबदेही पर भी सवाल उठाते हुए नैतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
न्यायिक जांच के साथ श्वेत पत्र की मांग
पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए। इसके साथ ही मृतकों की प्रमाणित सूची सार्वजनिक करने, सभी पीड़ितों को बेहतर उपचार और उचित आर्थिक सहायता देने की मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ केवल तबादला या निलंबन नहीं, बल्कि जांच के आधार पर आपराधिक धाराओं में कार्रवाई होनी चाहिए।
जांच में यह भी सामने आना चाहिए कि जहरीली शराब तैयार करने वाला कौन था, उसे उपलब्ध कराने वाला कौन था, गांवों तक पहुंचाने वाला कौन था और उसे संरक्षण देने वालों की भूमिका क्या थी।
‘मध्यप्रदेश को जहरीली शराब के नेटवर्क से मुक्ति चाहिए’
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग भी की है। इसमें गुजरात और मुरैना में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तैयार किए गए एक्शन प्लान की जानकारी देने की मांग की गई है।
पटवारी ने पत्र के अंत में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘मौत के बाद तबादला कार्रवाई नहीं है, निलंबन न्याय नहीं है और सरकारी बयान जवाबदेही नहीं है।’
उन्होंने कहा कि सागर के मृतकों को न्याय, पीड़ित परिवारों को जवाब और मध्यप्रदेश को जहरीली शराब के पूरे नेटवर्क से मुक्ति चाहिए।
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