कृष्ण कीर्तन से ही होगा परिवर्तन: भक्ति को कूल बनाकर युवाओं तक पहुंचा रहे राधिका दास
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आधुनिक संगीत, भारतीय और वेस्टर्न इंस्ट्रूमेंट्स का अनोखा संगम, और उसके केंद्र में कृष्ण भक्ति का गहरा संदेश यही पहचान बन चुकी है राधिका दास के कीर्तन की। लंदन जैसे आधुनिक शहर से शुरू हुई उनकी आध्यात्मिक यात्रा आज दुनिया भर के युवाओं को भक्ति मार्ग से जोड़ रही है।
इंदौर पहुंचे राधिका दास ने खुलासा फर्स्ट से विशेष साक्षात्कार में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनका उद्देश्य मनोरंजन नहीं, बल्कि हर व्यक्ति को उसके भीतर बसे ईश्वर से जोड़ना है। उन्होंने आज की युवा पीढ़ी को नाम जप का महत्व बताते हुए कहा कि कलयुग में नाम जप ही मुक्ति का सबसे सरल मार्ग है।
आज के युवाओं को नाम जप अवश्य करना चाहिए। यह केवल धार्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन का माध्यम भी है। अध्यात्म, संगीत और आंतरिक शांति का अद्भुत संगम देखने के लिए इंदौर तैयार है। 3 अप्रैल की शाम शहर का वातावरण भक्ति रस में डूब जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कीर्तनकार राधिका दास अपने बहुप्रतीक्षित ‘साइलेंस इन साउंड’ कीर्तन टूर के तहत यहां लाइव प्रस्तुति देंगे। यह आयोजन शहर के प्रतिष्ठित फिनिक्स सिटाडेल मॉल में शाम 7 बजे से शुरू होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु, युवा और संगीत प्रेमियों के शामिल होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, संस्कृति विभाग और आयोजक प्रबल प्रताप सिंह और ‘ड्रॉप लाइव’ और ‘ईवा लाइव जीतो यूथ’ सहभागी ने इस महोत्सव में युवाओं को शामिल होने की अपील की।
भक्ति का अर्थ बाहरी वेशभूषा नहीं
जेन जी और जेन अल्फा को लेकर कहा कि उनकी सबसे अच्छी बात यह है कि उनके माता-पिता ने उन पर मंदिर जाने या पूजा करने का दबाव नहीं डाला। यही कारण है कि वे पूरी स्वतंत्रता के साथ अपनी तरह से आध्यात्म को समझ रहे हैं। वे अध्यात्म को अपनी भाषा में परिभाषित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भक्ति का अर्थ बाहरी वेशभूषा नहीं है। आप टाई और कोट पहनकर भी भक्त हो सकते हैं। इसके लिए संन्यासी जैसा वेश धारण करना जरूरी नहीं है। प्रसिद्ध कीर्तन गायक और आध्यात्मिक वक्ता राधिका दास ने कहा कि उनकी भक्ति यात्रा की शुरुआत उस समय हुई, जब वह मात्र 17 वर्ष के थे।
उस उम्र में उन्होंने भक्ति मार्ग से जुड़ने का निर्णय लिया और कीर्तन को अपने जीवन का माध्यम बनाया। उन्होंने बताया कि लंदन जैसी आधुनिक और पश्चिमी जीवनशैली वाली जगह में उस दौर में भक्ति और कीर्तन के रास्ते पर चलना बेहद कठिन था।
कीर्तन के माध्यम से भक्ति का संदेश लोगों तक पहुंचाना
उन्होंने कहा कि उस समय यदि आप ड्रिंक नहीं करते थे, तो दोस्तों के साथ बाहर जाना भी मुश्किल हो जाता था। सामाजिक दायरे में स्वीकार्यता पाने के लिए कई तरह के दबाव होते थे। लेकिन मैंने जब कीर्तन शुरू किया, तब धीरे-धीरे लोग इससे जुड़ने लगे।
उस समय यह ‘कूल’ नहीं माना जाता था, लेकिन लोगों के भीतर कहीं न कहीं शांति की तलाश जरूर थी। राधिका दास ने बताया कि उन्होंने भक्ति के संदेश को आधुनिक रूप में लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। संगीत से लेकर पहनावे तक हर चीज को इस तरह प्रस्तुत किया गया कि युवा उससे खुद को जोड़ सकें।
हमने अपने म्यूजिक और कपड़ों को ऐसा बनाया कि लोगों को लगे कि यह उन्हीं की दुनिया का हिस्सा है। हमारा मकसद केवल संगीत प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि उसके माध्यम से भक्ति का संदेश लोगों तक पहुंचाना है।
भगवान से जोड़ना उद्देश्य: उन्होंने कहा कि मैं यहां ऑडियंस में एड्रेनालिन पंप करने नहीं आया हूं। मेरा उद्देश्य आपको आपके भगवान से जोड़ना है। उस भगवान से नहीं जो आपके परिवार या माता-पिता के हैं, बल्कि उस भगवान से जो सिर्फ आपके हैं। यदि कोई व्यक्ति मेरे इवेंट से जाने के बाद अपने भीतर ईश्वर का जुड़ाव महसूस करता है, तो मैं समझता हूं कि मेरा उद्देश्य पूरा हो गया।
मिशन का हिस्सा बनाने के लिए आभार...
राधिका से भारत में पांच-छह साल पहले मिली थी। शुरु से ही सभी को साथ लाकर कीर्तन करने का प्रयास करते थे। यह देख बहुत अच्छा लगा पांच-छह वर्षों में अपनी ईमानदारी और सच्ची रुचि से उन्होंने कई लोगों के जीवन और दिलों को बदल दिया।
अब उनके कीर्तन को बड़े मंच पर देखना सुखद अनुभव है। मैं उनके साथ यात्रा करने और दुनियाभर में इन मंत्रों को फैलाने के उनके इस अद्भुत मिशन का हिस्सा बनने के लिए आभारी हूं। - कृष्णा प्रिया, कीर्तन कलाकार
कीर्तन की प्रासंगिकता शाश्वत...
राधिकादास जी के साथ 5 साल से कीर्तन कर रहा हूं। जब हमने शुरुआत की थी, तब कमरे में सिर्फ पांच लोग हुआ करते थे और आज यहां हजारों लोग हैं। मैंने महसूस किया कीर्तन शाश्वत रूप से प्रासंगिक है। कभी संगीतकार था, लेकिन असंतुष्ट रहता था क्योंकि तब केवल भौतिक कारणों से संगीत से जुड़ा था।
अब कीर्तन रचनात्मक और आध्यात्मिक, दोनों ही रूपों में पूर्णता का अनुभव कराता है। मेरा मानना है कीर्तन के गायन में भाग लेने वाले हर व्यक्ति को ऐसा ही महसूस होता है। मैं राधिका दास के कीर्तन बैंड का हिस्सा हूँ। -केली वुड्स, कीर्तन कलाकार
सीएम व प्रबल प्रतापसिंह तोमर को धन्यवाद
राधिकादासजी के कॉन्सर्ट में करीब 4 से 5 हजार लोगों के आने की उम्मीद है। फीनिक्स सिटाडेल में तैयारी जोर-शोर से चल रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और हमारे युवा नेता प्रबलप्रतापसिंह तोमर का धन्यवाद करना चाहूंगा। हम सब कृष्ण, राम और शिव की भक्ति में लीन हों, यही हमारा एक छोटा-सा प्रयास है।
इस इवेंट के जरिए संदेश देना चाहते हैं हमारे धर्म में इतनी ताकत है कि वेस्टर्न कल्चर को अपनाने की जरूरत नहीं है। मैं अपने सभी स्पॉन्सर्स का भी आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने इस इवेंट को सफल बनाने में मदद की। आप सभी कल आएं और इस आयोजन के साक्षी बनें। -आकाश विरानी, इवेंट ऑर्गेनाइजिंग
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