पटरी पर बाघ आया तो थमेगी ट्रेन: रेल लाइन पर 20-30 KM की स्पीड; सुरंग-अंडरपास से बनेगा वन्यजीव कॉरिडोर
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर-खंडवा नई रेल लाइन सिर्फ शहरों के बीच सफर आसान नहीं करेगी, बल्कि घने जंगलों से गुजरते समय वन्यजीवों की सुरक्षा का भी खास ख्याल रखा जाएगा।
वन क्षेत्र में ट्रेनों की रफ्तार 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित रखने का सुझाव दिया गया है। मकसद साफ है, अगर अचानक पटरी पर बाघ, तेंदुआ, हिरण या कोई दूसरा वन्यजीव आ जाए तो लोको पायलट को ट्रेन रोकने का पर्याप्त समय मिल सके।
रेलवे और वन विभाग की योजना में सुरंग, अंडरपास, वायडक्ट और ट्रैक के दोनों ओर सुरक्षा दीवार जैसे प्रावधान शामिल हैं। कोशिश यह है कि रेल आए, लेकिन जंगल के जानवरों का प्राकृतिक रास्ता न रुके।
ट्रैक नहीं, जानवरों के लिए बनेगा अलग रास्ता
जंगल में वन्यजीव भोजन और पानी की तलाश में लगातार एक हिस्से से दूसरे हिस्से में आते-जाते हैं। नई रेल लाइन उनके इस प्राकृतिक मूवमेंट में बाधा न बने, इसके लिए ट्रैक के आसपास मजबूत और ऊंची दीवारें बनाने की योजना है।
इन दीवारों का उद्देश्य वन्यजीवों को सीधे रेलवे ट्रैक पर आने से रोकना होगा। वहीं उनके आवागमन के लिए अंडरपास और सुरंगें बनाई जाएंगी, ताकि जानवर बिना पटरी पर आए सुरक्षित तरीके से जंगल के दूसरे हिस्से में जा सकें।
20 KM के हिस्से में 16 सुरंगों का प्रस्ताव
परियोजना के करीब 20 किलोमीटर हिस्से में 16 सुरंगें प्रस्तावित हैं। इनका निर्माण पहाड़ी और घने वन क्षेत्र वाले हिस्सों में किया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार बड़िया-बेका के बीच 4.1 KM, चोरल-मुख्यतियार बलवाड़ा के बीच 2.2 KM और राजपुर के पास 1.6 KM लंबी सुरंगें बनाई जाएंगी। इसके अलावा करीब 12.1 KM हिस्से में 13 छोटी सुरंगों का भी प्रावधान है।
सुरंगों से एक ओर पहाड़ी और जंगल वाले हिस्सों में रेल लाइन निकालने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर पेड़ों की कटाई और वन्यजीवों के प्राकृतिक रास्तों पर पड़ने वाला असर कम करने की कोशिश होगी।
जमीन के बजाय ऊंचाई से निकलेगा ट्रैक
जहां संभव होगा, रेलवे ट्रैक को सीधे जमीन पर बिछाने के बजाय वायडक्ट के जरिए ऊंचाई से निकालने की योजना है। करीब 30-30 मीटर लंबे वायडक्ट बनाए जाने का प्रस्ताव है।
रेलवे के प्रस्तावित डिजाइन के मुताबिक, इससे करीब 17 हजार पेड़ों को बचाने में मदद मिल सकती है। यानी जहां ट्रैक के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई करनी पड़ती, वहां ऊंचाई से ट्रैक निकालकर वन क्षेत्र को कम नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
454 हेक्टेयर वनभूमि परियोजना में आएगी
नई रेल लाइन के लिए करीब 454 हेक्टेयर वनभूमि की जरूरत होगी। इसमें इंदौर वनमंडल की करीब 407 हेक्टेयर और खरगोन वनमंडल की करीब 46 हेक्टेयर वनभूमि शामिल है।
परियोजना के लिए बाधक पेड़ों की कटाई अक्टूबर से शुरू करने की तैयारी है। करीब 1.34 लाख पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। पेड़ों की कटाई एक साथ न करके चार से पांच चरणों में किए जाने की योजना है। इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के मद्देनजर वन विभाग ने प्रतिपूरक पौधरोपण पर भी जोर दिया है।
नए पौधों में 5% दुर्लभ और औषधीय प्रजातियां
पेड़ों की भरपाई के लिए रेलवे को दूसरी जगह पौधरोपण करना होगा। वन विभाग ने इस बार केवल सामान्य प्रजातियों के पौधे लगाने के बजाय पौधरोपण में करीब 5 प्रतिशत दुर्लभ और औषधीय प्रजातियां शामिल करने की शर्त रखी है। इसका उद्देश्य सिर्फ पेड़ों की संख्या की भरपाई करना नहीं, बल्कि जंगल की जैव विविधता को बनाए रखना भी है।
महू-चोरल के जंगल में बाघ का मूवमेंट
इंदौर-खंडवा रेल लाइन का बड़ा हिस्सा ऐसे वन क्षेत्र से गुजरता है जहां वन्यजीवों की मौजूदगी रहती है। इंदौर वनमंडल में 110 से अधिक तेंदुओं की मौजूदगी बताई जा रही है। वहीं महू-चोरल के जंगल में हाल ही में बाघ का मूवमेंट भी दर्ज किया गया है।
हिरण समेत कई अन्य वन्यजीव भी इन जंगलों में विचरण करते हैं। ऐसे में रेल लाइन शुरू होने के बाद ट्रैक पर वन्यजीवों की मौजूदगी को देखते हुए उनकी सुरक्षा को परियोजना की अहम जरूरत माना जा रहा है।
बाघ या तेंदुआ पटरी पर आया तो क्यों कम होगी स्पीड?
वन विभाग का मानना है कि जंगल में तेज रफ्तार ट्रेन वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। यदि कोई जानवर अचानक ट्रैक पर आ जाए तो अधिक गति में ट्रेन को रोकना मुश्किल होगा।
इसीलिए वन क्षेत्र में 20 से 30 KM प्रति घंटा की गति रखने का सुझाव दिया गया है। कम स्पीड में लोको पायलट को ट्रैक पर वन्यजीव नजर आने पर ब्रेक लगाने और ट्रेन रोकने के लिए ज्यादा समय मिल सकेगा।
रातापानी की घटनाओं से लिया सबक
वन विभाग ने दूसरे वन क्षेत्रों में रेलवे ट्रैक पर वन्यजीवों की मौत की घटनाओं को भी ध्यान में रखा है। रातापानी क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर वन्यजीवों की मौत की घटनाओं के बाद रेल परियोजनाओं में पहले से सुरक्षा इंतजाम करने की जरूरत पर जोर बढ़ा है।
इंदौर-खंडवा रेल लाइन में भी इसी सोच के तहत दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने की योजना है।
विकास भी जरूरी, जंगल की सुरक्षा भी
इंदौर-खंडवा रेल परियोजना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में चुनौती सिर्फ ट्रैक बिछाने की नहीं, बल्कि रेल विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की भी है।
एक तरफ करीब 1.34 लाख पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है, तो दूसरी तरफ सुरंग, अंडरपास और वायडक्ट के जरिए नुकसान कम करने की कोशिश की जा रही है। वन क्षेत्र में ट्रेन की गति नियंत्रित करने का सुझाव भी इसी रणनीति का हिस्सा है।
DFO बोले- वन्यजीवों की सुरक्षा जरूरी
इंदौर वनमंडल के DFO लाल सुधाकर सिंह के अनुसार महू-खंडवा रेल प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण है, लेकिन जंगल से गुजरने वाले रेल मार्ग को वन्यजीवों के लिए सुरक्षित बनाना भी जरूरी है।
विभाग ने रेलवे को वन क्षेत्र में ट्रेन की गति कम रखने का सुझाव दिया है, क्योंकि इंदौर-बड़वाह क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही अधिक रहती है।
वन विभाग का जोर इस बात पर है कि रेल लाइन बने, यातायात बढ़े, लेकिन इसके साथ जंगल में रहने वाले वन्यजीवों का प्राकृतिक कॉरिडोर भी सुरक्षित रहे।
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